मुंबई की चकाचौंध के बीच मौजूद कमाठीपुरा, इंसानियत और समाज दोनों के चेहरों पर ही एक झन्नाटेदार तमाचा है. एशिया के सबसे पुराने रेड लाइट एरिया कमाठीपुरा |  कमाठीपुरा को  भारत का दूसरा सबसे बड़ा रेड लाइट एरिया माना जाता है। हालांकि वक्त के साथ इसकी सूरत बदल रही है। यहां कुछ एनजीओ मुहिम चला रहे हैं। मुहीम के तहत सेक्स वर्कर्स के बच्चों को म्यूजिक और एक्टिंग सिखाकर उनकी लाइफ बदलने की कोशिश की जा रही है। हाल ही में एक पूर्व सेक्स वर्कर की बेटी ने भी इस बदनाम दुनिया की लाइफ के बारे में बताया, जो काफी वायरल हो रहा है। बता दें कि इस लड़की की पहचान अब थियेटर है। मां को तस्करी कर केरल से लाया गया था …

यहाँ हर किसी को मिला धोखा

देश के बाकी रेडलाइट एरिये में काम कर रही सेक्स वर्करों की तरह यहां की सेक्स वर्कर की कहानी भी वैसी हीं  है, कोई प्यार में धोखा खाई तो  कोई नौकरी के झांसें में ले गई |  किसी को घरवालों ने ही इस जहन्नम का रास्ता दिखाया, तो किसी को दलाल ने पैसा कमाने का ये रास्ता सुझाया |  यहां अंदर आने के दरवाज़े अलग अलग हो सकते हैं, मगर निकलने का रास्ते एक भी नहीं है | सेक्स वर्कर की बेटी ने बताया कि उसकी मां को केरल से तस्करी कर कमाठीपुरा लाया गया। लेकिन जब वह उसके पिता से मिली तो उसने यह काम छोड़ दिया और लोगों के घर काम करने लगी। उसे रेड लाइट में रहने और डार्क स्किन होने के कारण कई परेशानियों का सामना करना पड़ा।

 

10 साल की उम्र में टीचर ने किया रेप

अपना एक्सपीरियंस बताते हुए वह कहती है कि जब मैं 10 साल की थी तो मेरे एक टीचर ने मेरा रेप किया। मुझे उसे वक्त अच्छे और बुरे टच का मतलब नहीं पता था। मुझे तब कुछ समझ नहीं आया।  इस घटना से मैं काफी डरी हुई थी। जब मैं 16 साल की थी तब मुझे एहसास हुआ मेरा रेप हुआ है। मेरे घरवाले वापस केरल चले गए लेकिन मैं यहीं रही। मुझे यहां पर काफी प्यार मिला। बाकी की सेक्स वर्कर मुझे अपनी बेटी जैसा प्यार देती हैं। हालांकि पुलिस वाले हमसे बहुत ही खराब व्यवहार करते थे। इसके अलावा कई मर्द भी मुझे गलत नजर से देखते हैं। लेकिन हमेशा कमाठीपुरा की औरतों ने ही मुझे बचाया।

थिएटर से बदली लाइफ

लड़की के मुताबिक मैं क्रांति नाम के एनजीओ से जुड़ी इसके बाद हम अमेरिका में एक प्रोग्राम करने गए। वहां मैंने देखा कि लोग मेरा बैकग्राउंड जानने के बावजूद मेरे काम को पसंद कर रहे हैं। पहली बार मैंने महसूस किया कि हम सेक्स के बारे में खुलकर बात कर सकते हैं। वह कहती हैं कि हम क्यों खूबसूरती को रंग से जोड़ते हैं? क्यों लोगों में हम अच्छी चीज नहीं देख सकते। हमें समाज क्यों नहीं स्वीकार करता है। पहले की तुलना में अब केवल 20 प्रतिशत ही सेक्स वर्कर्स बची हुई हैं कमाठीपुरा में।

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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