कहते हैं जज्बे और साहस से हर मुश्किल आसान हो जाती है। चाहे वो कोई मंजिल हो या कुछ कर गुजरने का तमन्ना। आज की हमारी कहानी  भी बिहार के गोपालगंज जिले के ऐसी ही एक जुझारू महिला की है जो आज भले 51  बसंत पर कर चुकी है लेकिन अनपढ़ होते हुए भी उन्होंने जो कर दिखाया है वो शायद हीं कोई कर पायेगा | कुछ ऐसी ही प्रेरणादायी और जिंदगी के संघर्ष की अनोखी कहानी है बिहार गोपागंज की  ट्रैक्टर लेडी के नाम से मशहूर जैबुन्निसा की |

250  महिलाओं को बनाया आत्म निर्भर

बिहार के गोपालगंज जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर की दुरी पर स्थित  कुचायकोट प्रखंड के बरनैया  गोखुल गांव की रहने वाली  जैबुन्निसा ने न सिर्फ कड़ी मेहनत व लगन से अपनी गरीबी का डट कर सामना किया, बल्कि गांव की 250 अन्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर आज पूरे गांव के लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गईं हैं। लोग उन्हें बहुत प्यार और सम्मान देते हैं।

टीवी पर देख मिली प्रेरणा

वर्ष 1998 में जैबुन्निशा हरियाणा में अपने एक रिश्तेदार के पास गई थी , वहां जैबुन्निशा टीवी पर केरल के किसी गांव पर बानी एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म देखी जिसमे महिलाएं  स्वयं सहायता समूह के बारे में बता रही थीं। टीवी देखने के बाद उन्होंने भी मन मे ठान लिया कि वो भी अपने गांव की महिलाओं के लिए कुछ करेंगी | फिर गांव आकर गांव की महिलाओं से स्वयं सहायता समूह के बारे में बात की और उससे होने वाले लाभ के बारे में बताया   कुछ महिलाएं तैयार हो गईं और उन महिलाओं के साथ जैबुन्निसा ने स्वयं सहायता समूह का गठन किया |

ट्रैक्टर खरीदा और खुद से चलाना सीखा

जैबुन्निशा ने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से बैंक में खाता खुलवाया और महिलाओं को पैसे जमा करने को प्रेरित करती रहीं और खुद भी पैसा जमा करने लगीं। कुछ दिनों बाद उन्होंने ग्रामीण बैंक सिमरा से कर्ज लेकर एर ट्रैक्टर खरीद लिया।फिर उन्होंने ठान लिया कि खुद ट्रैक्टर चलाएंगी और फिर जैबुन्निसा ने खुद से ट्रैक्टर चलाना सीखा और खेतों में काम करने लगीं। लोग हैरान हुए लेकिन आज जैबुन्निसा अपने कड़े परिश्रम के बल पर अपने परिवार के खुशहाल जीवन के साथ सैकड़ों परिवारों में खुशहाली लाने में जुटी हुयी हैं।

शुरुआती दिनों में गांव की 10 महिलाओं तथा छोटी सी पूंजी से स्वयं सहायता समूह का गठन कर काम शुरू करने वाली इस महिला, जैबुन्निशा ने अब तक बीस से ज्यादा समूहों का गठन कराया है और आज जैबुन्निसा के प्रयासों का ही नतीजा है कि गांव की 250 से ज्यादा महिलाएं आत्मनिर्भर होकर अपने परिवार का पालन-पोषण बेहतर ढंग से कर रही हैं।

महज नौ वर्ष की उम्र में हो गया था निकाह

आज जीवन के 51 वर्ष गुजार चुकी जैबुन्निसा की जीवन यात्रा मुश्किलों से भरा हुआ था । जैबुन्निसा की  शादी नौ वर्ष की उम्र में ही बरनैया गोखुल गांव के हिदायत मियां के साथ वर्ष 1967 में हुई थी। नौ साल की जैबुन्निशा आज 51 साल की हैं। इतनी बड़ी जिंदगी में उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। वो बताती हैं कि घर की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण खेत में मजदूरी करनी पड़ी, बच्चों को पालना पड़ा।

जैबुन्निसा में हमेशा कुछ नया सीखने की ललक थी

जैबुन्निसा ने भले कभी स्कूल का मुंह नहीं देखा और न ही घर पर किसी ने पढ़ाई को या उनकी इच्छा को तवज्जो दिया, बावजूद  इसके वो  हमेशा कुछ नया सीखने की ललक  रखती थी |   आज प्रखंड की सैकड़ों महिला जैबुन्निसा की प्रेरणा से समूहों का निर्माण कर एक खुशहाल तथा आत्मनिर्भर जीवन जीने के प्रयास में आगे बढ़ रही हैं। जैबुन्निसा के इस हौसले को सलाम है।

niraj kumar

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एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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