किसी गरीब बच्चे की मदद  का मतलब ये नहीं की उसे  पैसे से मदद किया जाये या उसे खाना या कपड़ा दिया जाये , बल्कि उनकी मदद कुछ इस तरह से करें की भविष्य में उसे किसी दूसरे के आगे हांथ फैलाना न पड़े | और वो मदद हैं उन गरीब बच्चों को शिक्षित कर दिया जाये, और कुछ ऐसा हीं  कर रहे हैं उत्तर प्रदेश  के  जिला जालौन के डकोर गांव के निवासी  सिपाही जितेंद्र यादव | अक्सर लोग पुलिस वालों को रौब झाड़ने वाले और हेकड़ी जमाने वाले मानते हैं लेकिन सब एक जैसे नहीं होते इसकी कहावत को चरितार्थ करते हैं यूपी सिपाही जितेंद्र |

लोग  जितेंद्र यादव को वर्दीवाला हीरो कहकर बुलाते हैं

हर जिन्दा इंसान सपने देखता है, पर वह सपने सिर्फ खुद के लिए  ही होता है | लेकिन अगर कोई दूसरों के हित  के लिए सपने देखे और उसे पूरा करने में जी जान लगा दे तो वैसे व्यक्ति  हीं समाज के असल  हीरो कहलाते हैं | सिपाही जीतेन्द्र यादव भी कुछ इसी तरह का सपना देख उसे पूरा करने की जद्दोजहद कर रहे थे, और वो सपना था की समाज का कोई भी बच्चा निरक्षर न रह जाये | और ये जितेंद्र यादव’ के प्रयास का हीं फल था की आज सैकड़ो बच्चे कटोरे के बदले कलम पकड़ सफ़ेद कागज को स्याही से गुलजार कर रहे हैं | जितेंद्र का मानना है कि शिक्षा ही वो अलख है जिससे देश का भविष्य उज्जवल हो सकता है जितेंद्र को सोशल वर्क के लिए प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक जावेद अहमद की ओर से प्रशस्ति पत्र भी मिल चुका है।इसका सुखद परिणाम तब सामने आया जब झांस के प्रदर्शनी मैदान में दशकों से बसे गरीब आदीवासी परिवारों को वर्षा और भूख से रक्षा के लिए झांसी के एसएसपी मनोज तिवारी ने पांच हजार की धनराशि अपने वेतन से प्रदान की साथ ही गरीब बच्चों को शिक्षित करने की इच्छा भी प्रकट की |  ये सिलसिला बढ़कर दूसरे पुलिसवालों तक भी जा पहुचा.. और ये सब सिपाही जितेंद्र के प्रयासों का ही नतीजा था | शहर के लोग इस सिपाही को ‘वर्दी वाला हीरो कहकर बुलाते हैं |

गरीब बच्चों के मसीहा बने जितेंद्र

अभाव  अंधेरे में अपना बचपन खो रहे गरीब बच्चों के लिए सिपाही जितेंद्र  उम्मीद की एक रौशनी की तरह  हैं |  झांसी में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होने वहां के प्रदर्शनी ग्राउंड में रहने वाले गरीब परिवार के बच्चों को पढ़ाने का काम किया |  फिलहाल ललितपुर के पुलिस अधीक्षक कार्यालय में स्थित व्यापारी प्रकोष्ठ में तैनात सिपाही जितेंद्र यादव ने ग्राम रोड़ा की सहरिया बस्ती के 85 बच्चों को पढ़ाने का बीड़ा उठाया है | उन्होने वहां निशुल्क पाठशाला शुरू की है | खा भी जाता है  कि अच्छे काम की शुरूआत की जाएं तो कारवां खुद-ब-खुद बनता चला जाता है,  आज जितेंद्र की इस मुहिम में भी उनके साथ कई लोग जुड़ गए हैं |  उनके इस नेक काम में उनकी मदद करते हैं उनके साथी पवन यादव , गनेश सिंह , सत्येन्द्र पाल, और उम्मीद रोशनी नाम का एक एनजीओ . जितेंद्र और उनके साथियों ने इस संस्था के सहयोग से गरीब बच्चों को 15 अगस्त के मौके पर नये कपड़े, जूते, मौजे, बेल्ट और किताब –कापियां भी बांटी

भीख मांगते बच्चों को देख मिली थी प्रेरणा

पुलिस विभाग में भर्ती के बाद झांसी जनपद के सीपरी थाने में उनकी पहली पोस्टिंग साल 2006 में हुई. शुरूआत में जितेंद्र में भी पुलिसाया रौब था लेकिन कुछ घटनाओं ने जैसे उनकी सोच बदल दी और वे समाजसेवा से जुड़ गए |  परोपकार की शुरूआत झांसी के नारायण धर्मशाला पर एक नेत्रहीन बूढे भिखारी को रोज बिना नागा किए भोजन देने से हुई |  ड्यूटी के लिए आते-जाते इस दरियादिल सिपाही की नजर अक्सर फुटपाथ पर पड़े भीख मांगते गरीब बच्चों ,बूढ़ों और महिलाओं पर पड़ती तो उनका दिल दर्द से भर उठता और फिर उऩ्होने समाज सेवा का बीड़ा उठाय़ा | जितेंद्र शादीशुदा होने के साथ दो बच्चों के पिता भी हैं. वे ड्यूटी के बाद लावारिस और गरीबों की मदद करने के लिए निकल पड़ते हैं |  गरीबों की मदद के लिए चंदा इकट्ठा करने से भी उन्हे कोई परहेज नहीं  जितेंद्र  अपने साथियों  के साथ मिलकर इकट्ठा किए गए इसी चंदे की मदद से वे गरीब बच्चों की शिक्षा में मदद करते हैं |

niraj kumar

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एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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