आज हमारे समाज में बेटियों की क्या स्थिति है इससे हम अच्छी तरह से परिचित हैं | आज हर भारतीय चाहता है की हमारा देश भी विकसित राष्ट्र की श्रेणी में आ जाये, पर लोग ये नहीं सोंचते हैं की जबतक सभ्य समाज का निर्माण नहीं होगा तब तक यह संभव नहीं है | और सभ्य समाज का निर्माण तभी संभव है जब लोग समाज में बेटियों को सर्वोच्च स्थान देंगे | लेकिन समाज में अभी भी कई लोग ऐसे है जो बेटियों को महत्व नहीं देना चाहते | भले ही हमारा समाज सदियों से लड़कियों को देवी की रूप में पूजता आ रहा हो । हिन्दू समाज में अधिकांश पर्व देवी पर ही आधारित है । लेकिन कुछ लोग अभी भी लड़के को ही लड़की से बेहतर मानते हैं | ऐसी ही भ्रांतियों को दूर करने के लिए सरकार भी बहुत सारे मुहीम चला रही है | और इन मुहिमों को सार्थक करने के लिए बहुत से युवा आगे आएं जिनमे एक नाम बिहार की बेटी चंदा ठाकुर का भी हैं |

बिहार के वैशाली जिले की रहने वाली हैं

वैशाली, बिहार की रहने वाली चंदा ठाकुर लगातार महिलाओं पर हो रहे उत्पीड़न, महिला स्वास्थ और बाल विवाह को लेकर लगातार आवाज़ उठाती रही है | चंदा ठाकुर बचपन से हीं खुले विचार की थी और लड़को के साथ कंचे, हॉकी, क्रिकेट खेला करती थी |  इसलिए तथाकथित इस सभ्य समाज के लोगों द्वारा चंदा को छोटी सी उमर में ही चरित्रहीन का प्रमाण पत्र दे दिया गया था | पर इन सब बातों दरकिनार करते हुए चंदा अपने जीवन पथ पर आगे बढ़ती गई | लेकिन फिर समाज के कुछ ऐसे चीज़ों से रुबरु हो गयी जो बस कुछ अजीब सी थी | छोटी उम्र में ही इस ज़िन्दगी ने कुछ ऐसे दृश्यों से सामना करा दिया जो अकल्पनीय था |

 

चंदा के  स्कूल की दो तीन बच्चियों की शादी बाल्यावस्था में ही  हो जाना और  साल दो साल में दो तीन बच्चे और फिर उन लड़कियों का  शरीर कंकाल में बदल जाना चंदा ठाकुर के मन को इस कदर  झकझोर दिया की वो सोंचने पर मजबूर हो गई की  सोचा क्यों न मैं लोगो को जागरूक करूं? लेकिन पुरुष प्रधान समाज में चंदा की बातों को सुनने वाला कोई नहीं था | फिर सोची क्यों न एक समूह बना लूं ?  उन दिनों गांव में काम कर रहे एक गैरसरकारी संस्था प्लान आईडीएफ के द्वारा चलायें जा रहें बाल समूह की सदस्य बन गयी। जिसके जरिये चंदा ठाकुर  जागरूकता फैलाने के साथ कई बाल विवाह  को भी रोका |

जब एक दिन के लिए अमेरिकी राजदूत बनी  चंदा ठाकुर

चंदा के इस हौसले से भरे काम को देखकर इंटरनेशनल डे फॉर गर्ल चाइल्ड के मौके पर एक दिन के लिए अमेरिका की राजदूत का पद संभालने का मौका मिला। चंदा के काम से प्रभावित होकर उनके पद चिन्हों पर चलने के लिए आज बिहार की अनेकों लडकियां तैयार हैं |  UNICEF से जूड कर बतौर फील्ड ऑफिसर काम करने वाली चंदा पटना के ‘इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट फाउंडेशन’ के साथ जुड़ कर बाल अधिकारों के लिए काम करती हैं  |

भारत सरकार द्वारा भी हो चुकी है सम्मानित

महिलाओं और बच्चों में शिक्षा की अलख जगाने के साथ-साथ चंदा ठाकुर समय-दर-समय बाल विवाह,लिंग भेद-भाव के खिलाफ आवाज उठाते रही है |  इसके साथ ही वो किशोरियों के बीच मासिक स्वास्थ्य और एनीमिया के प्रति जागरूकता अभियान भी चला रही हैं |  पिछले दिनों पटना में चंदा के इन उत्कृष्ट कार्यो को देखकर भारत सरकार की केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी द्वारा सम्मान भी दिया गया  |

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
niraj kumar

Latest posts by niraj kumar (see all)