जलियांवाला बाग हत्याकांड ब्रिटिश इतिहास का वो बदनुमा पन्ना है जिसका जिक्र ही अंग्रेजों के लिए शर्मिंदगी का सबब है |  जो अंग्रेज भारतीयों को सभ्य बनाने का ढोंग रचकर भारत पर शासन करने आए, उन्होंने जलियांवाला बाग जैसे बर्बर, असभ्य और जघन्य नरसंहार को अंजाम दिया |था |  वक्त का पहिया घूमते-घूमते 100 साल पार कर गया, और आज जलियांवाला बाग हत्याकांड के लिए 100 साल पूरे हो गए |

जलियाँवाला बाग़ अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के पास का एक छोटा सा बगीचा है जहाँ 13 अप्रैल1919 को ब्रिगेडियर जनरल रेजिनाल्ड एडवर्ड डायर के नेतृत्व में अंग्रेजी फौज ने गोलियां चला के निहत्थे, शांत बूढ़ों, महिलाओं और बच्चों सहित सैकड़ों लोगों को मार डाला था और हज़ारों लोगों को घायल कर दिया था। यदि किसी एक घटना ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर सबसे अधिक प्रभाव डाला था तो वह घटना यह जघन्य हत्याकाण्ड ही था।

चंदा इकठ्ठा कर बनवाया गया था स्मारक

इसी घटना की याद में यहाँ पर स्मारक बना हुआ है। इस स्मारक में लौ के रूप में एक मीनार बनाई गई है जहाँ शहीदों के नाम अंकित हैं। वह कुआँ आज भी मौजूद हैं जिसमें लोग गोलीबारी से बचने के लिए कूद गए थे। दीवारों पर गोलियों के निशान आज भी देखे जा सकते हैं। इस दुखद घटना के लिए स्मारक बनाने हेतु आम जनता से चंदा इकट्ठा करके इस जमीन के मालिकों से करीब 5 लाख 65 हजार रुपए में इसे खरीदा गया था।

1997  में महारानी एलिज़ाबेथ ने इस स्मारक पर मृतकों को श्रद्धांजलि दी थी। 2013 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरॉन भी इस स्मारक पर आए थे। विजिटर्स बुक में उन्होंनें लिखा कि “ब्रिटिश इतिहास की यह एक शर्मनाक घटना थी

13 अप्रैल, 1919 का वो काला दिन

पंजाब के अमृतसर में स्वर्ण मंदिर के पास 13 अप्रैल, 1919 को बैसाखी के दिन हज़ारों लोग अंग्रेज़ों के लाए ‘रॉलेट ऐक्ट’ के ख़िलाफ़ एक शांतिपूर्ण सभा कर रहे थे जब अंग्रेज़ अधिकारी जनरल डायर ने अचानक वहां आकर बाग़ के दरवाज़ बंद करने और फिर अपनी टुकड़ी को गोलियां चलाने का आदेश दे दिया |

ब्रितानी सरकार के रिकॉर्ड के अनुसार इस अंधाधुंध गोलीबारी में कम से कम 379 लोग मारे गए जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे |  हालांकि सूत्रों का कहना है कि इसमें तक़रीबन 1000 लोगों ने अपनी जानें गंवाईं थीं | इसके अलावा कम से कम 1200 लोग फ़ायरिंग में घायल हुए थे. आगामी 13 अप्रैल को इस नृशंस हत्याकांड के 100वीं बरसी हुई |  इस नरसंहार में मारे जाने वालों में वो लोग भी थे जो बाग़ में सिर्फ़ बैसाखी का जश्न मनाने के लिए इकट्ठे हुए थे |

‘खेद’ ज़ाहिर करने का सिलसिला

ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री और कूटनीतिज्ञ विंस्टन चर्चिल ने हत्याकांड के एक साल बाद 1920 में इसे ‘राक्षसी’ बताया था | ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय ने 1997 में जालियांवाला बाग़ के दौरे के पहले कहा था कि ये भारत के साथ हमारे अतीत का एक दर्दनाक उदाहरण है | साल 2013 में ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने अपने भारत दौरे पर जालियांवाला बाग़ जाकर वहां जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी थी. कैमरन पद पर रहते हुए ऐसा करने वाले पहले प्रधानमंत्री थे |

niraj kumar

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