देश में इन दिनों हर तरफ  तमाम राजनीतिक दल अपने-अपने तरीके से जनता  को लुभाने में व्यस्त हैं तथा लोगों को चुनाव में हिस्सा लेने के लिए अपने स्तर पर अभियान चला रहे हैं। तो वहीं निर्वाचन आयोग भी मतदाताओं को अपने मताधिकार का सही इस्तेमॉल  करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है | पटना का एक आम भूंजा बेचने वाले  50 वर्षीया लालमणि दास भी मतदाताओं को लोकतंत्र के इस महापर्व के बारे में अपने तरीके से लोगों को कर रहे है जागरूक |

ठेले पे भूंजा बेचते है लालमणि दास

आज राजनीती  में चायवालों और चौकीदारों की हर कोई बात कर रहा है, वही दूसरी ओर पटना में एक भुंजावाला मतदाताओं के बीच जागरुकता पैदा करने के लिए चुपचाप काम कर रहा है और मतदाताओं से लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए उम्मीदवारों की योग्यता के आधार पर मतदान करने की अपील कर रहे  है.| 50 वर्षीय लालमणि दास अपनी ‘साइकिल जागरुकता यात्रा’ के तहत बिहार की राजधानी में घूम घूम कर लोगों को अवगत  करा रहे है की  वे पैसों या किसी अन्य लालच में आकर मतदान नहीं करें, और अपने इस यात्रा को जागृति  यात्रा का नाम देते हैं।

नैतिकता की ओर बढ़ते कदम

लालमणि मानते हैं कि भारत में आज भी ईमानदार प्रत्याशी को वोट नहीं मिलते। चुनावों में नैतिकता की बात नहीं होती। वे इन सब चीजों को लेकर लोगों के पास जाते हैं। पतलून-कमीज और निर्वाचन आयोग के प्रतीक चिह्न वाली टोपी पहने दास साइकिल से पटना की गलियों में घूमते हैं और लोगों को पर्चे बांटते हैं और इनके जरिए वे उनसे समझदारी से मतदान करने की अपील करते हैं  |

कुछ इस तरह करवाते है अच्छे उमीदवार की पहचान

वह अपनी साइकिल के आगे एक बैनर लगाए रहते हैं जिसमें वह यह बताते हैं कि एक अच्छे उम्मीदवार में क्या गुण होने चाहिए जिन्हें हर मतदान को दिमाग में रखना चाहिए इसके अलावा वह स्वयं कमीज के ऊपर एक बैनर पहनते हैं जिस पर संदेश लिखा होता है ‘नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करें अपने मताधिकार का प्रयोग करें|.’लालमणि के चार बच्चे हैं। हालांकि समाज में कई लोगों ने उन्हें इस काम के लिए मना किया, लेकिन वे नहीं माने। उनका कहना है कि वे अपनी जिंदगी इस देश की भलाई के लिए लगा रहे हैं। वे लोगों को किसी भी प्रत्याशी को वोट देने से पहले उसके वयक्तिगत अस्तित्वा के बारे में जानने की कोशिश करे|

सही मायने में देखें तो लालमणि जैसे लोग इस वक्त में किसी उम्मीद की एक ज्योत की तरह हैं जो हमें अच्छा करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। दास ने कहा कि यदि मतदाताओं को अक्सर कानून तोड़ने वाले उम्मीदवारों के बीच चयन करना पड़ा तो उन्हें नोटा को प्राथमिकता देनी चाहिए।  औसतन 500 से 600 रुपए कमाने वाले लालमणि दास का फ़िलहाल पूरा वक़्त लोगों को जागरूक करने में ही बीत  रहा है जिससे उन्हें अधिक नुकसान का सामना करना पड़  रहा है। इस बात का उन्हें कतई अफ़सोस नहीं है  दास ने कहा कि उनकी पत्नी और बच्चे चाहते हैं कि वह अपनी जागरुकता मुहिम छोड़कर भुंजा बेचने का काम करें लेकिन देश के नागरिक के तौर पर वह इसे अपना कर्तव्य समझते हैं।

niraj kumar

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