देश मे  बहुत सारे  ऐसे  गांव है जहाँ  ऐसे बहुत सी ऐसी समस्या है जिसमे सुधार  कर एक नए भारत का निर्माण किया जा सकता है | इन्ही समस्यायों में से एक है शिक्षा | जो की हर देश के विकास का भिन्न अंग है शिक्षा चाहे ग्रामीण स्तर  का हो या शहरी स्तर का हो सब को समान मिलना चाहिये |

देश में शिक्षा का नया रूप देने की एक पहल|

आज देश में शिक्षा को व्यवसाय का रूप दिया जा रहा है जबकि शिक्षा का मुख्य रूप है व्यवस्था | ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा के स्तर  को ऊपर उठाना और  प्राइवेट स्कूल के बढ़ते मायाजाल को ख़त्म करना जो शिक्षा के मौलिक तत्व को ख़त्म कर रहा है | आज गांव  में शिक्षा के संसाधनों  के साथ साथ पैसों की भी कमी है जिसके कारण  वहां के बच्चों को अच्छी  शिक्षा प्राप्त करना मानो  सपना बना हुआ है | जो देश की सबसे बड़ी समस्या बनी  हुई है जिसको जड़  से खत्म करना बहुत जरुरी हो गया है |  देश का हर एक युवा चाह  रहा है देश का विकास  हो पर वो ये  नहीं जान रहे है देश का विकास  देश के बच्चों और युवाओ पे निर्भर करता है |

आज हम बात कर रहे है एक ऐसे शख्स की जो  अपनी व्यस्त और कठिन दिनचर्या के वावजूद भी उन्होंने अपने सपने को कभी टूटे नहीं दिया| जिन्होंने  गांव  की सरकारी स्कूलों और कॉलेज  से शिक्षा ग्रहण कर जब नौकरी के  लिए देश के कई अलग अलग जगहों पे गए जहाँ इन्होने अपने अनुभवों को विस्तार किया , और समस्याओं को बखूबी समझा  और अपना एक कदम इसके समाधान के लिय उठाया |

बिहार के रहने वाले प्रकाश पांडेय ने शुरु किया छप्परा में शिक्षा के स्तर में बदलाव की नई पहल |

बिहार के छपरा जिले के रहने वाले ये युवा जिनका पूरा नाम प्रकाश पांडेय है |निजी  जिंदगी के अलावा प्रकाश पांडेय का एक सपना था की वो एक एसे सशक्त गांव  का निर्माण किया जाये जिसमे कोई भी बच्चे या बच्चियां संसाधनों की कमी के कारण  अशिक्षित न रहे लड़कियां चूल्हे चौके की जगह कंप्यूटर के कीवर्ड पे अपना हुनर दिखाए |किसी  भी समस्या का निदान उसके जमीनी स्तर से शुरू की जाती है इसी बात को  ध्यान में रखते हुए बिहार के एक छोटे गांव  से ताल्लुक रखने वाले प्रकाश पांडेय| जो की एक वायुसेना के एक जवान है जिन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा  एक सरकारी स्कूल से हासिल कर चुके है जिन्होंने अपनी शुरुआती पढाई करने के बाद यात्रा डॉट कॉम  में काम किया|  इसके बाद इन्होने सॉफ्टवेयर जैसी आईटी कम्पनीज में भी काम किए  साथ साथ   भारतीय वायु सेना में जाने के लिए तैयारी करना जारी रखा| |एयरफोर्स में चयनित होने के बाद गांव के बच्चों के विकास के लिए स्कूल खोलने का निर्णय लिया|

एक मुहीम के तहत अबतक 400 से भी अधिक बच्चों को कर चुके है शिक्षित|

मात्र 35 बच्चों से शुरू हुई पाठशाला में अब 400 से अधिक बच्चे पढ़ाई करते हैं, और इन बच्चों को पढ़ाने के लिए बीस प्रशिक्षित लड़कियों की टीम है | और सबसे खास बात इन प्रशिक्षित लड़कियों की यह है की, इन लड़कियों की पढाई भी यही हुई है | इनका जो उद्देश्य था गांव  का विकास का आज वो सपना  धीरे धीरे पूरा हो रहा है | आज इस मुहीम के तहत बच्चों को सेवा ही नहीं बल्कि बहुत सारे ऐसे प्रोजेक्ट पे भी  काम कर रहे है जो ग्राम के विकास में अग्रसर है , उन्ही में से एक प्रोजेक्ट का नाम प्रोजेक्ट ज्ञान जिसके तहत  कंप्यूटर की शिक्षा  मुफ्त मे  मुहैया कराइ जा रही है जिसके अंतर्गत अभी तक ४५ गर्ल्स को इस सुविधा मिल चुकी है |

वेबसाइट के माध्यम से अब कर रहे है लोगों को जागरूक |

इस प्रोजेक्ट  उद्देश्य लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाना और शिक्षित करना है |दूसरे प्रोजेक्ट के अंतर्गत फ्री एजुकेशन किट डिस्ट्रीब्यूट किया जाता है ताकि पढाई के वक़्त कोई भी दिक्कत न आये और  उन बच्चों को प्रोत्साहित करना जो स्कूल नहीं जाना चाहते थे |आज इन्होने अपने इस मुहीम को वेबसाइट जोड़ने की शुरुआत  की और सोशल मीडिया पे अनेक पेजेज से जुड़ कर इस नेक काम को आगे  बढ़ा रहे है |