आज हम बात करने जा रहे है ऐसे लोगों के बारे जिनके बच्चों ने उनको घर से निकाल  दिया हो और उन्हें भीख मांगने पे मजबूर कर देते है|   आज देश के  हर एक मंदिर मस्जिद के पास ऐसे दृश्य देखने को मिलते है जहाँ एक बुजुर्ग महिला या पुरुष या बच्चे अपने  हाथ में एक पात्र  लिये  हुए  किसी किनारे पे बैठे हों   ये जरुरी नहीं यहाँ बैठा हर एक  भिखारी मजबूर हों |

 

हर मंदिर और मस्जिद के पास भक्तों से ज्यादा भिखारियों की भीड़ रहती है| किनारे बैठे भिखारी कोई न कोई रोग से ग्रसित होता है उनके पास इतने पैसे नहीं होते की वो अपनी बीमारियों का इलाज करा सके और दवाई खरीद सके | राम की इस पावन  धरती पे जहाँ भगवान  का दूसरा रूप डॉक्टर को कहा   जाता है जो लाखों लोगों की ज़िन्दगी बचाते है |

मुफ्त में गरीबों का इलाज कर बन गए फकीरों के मसीहा|

हम और आप बहुत सारे ऐसे  डॉक्टरों देखे होंगे जिनका एक क्लिनिक होता है जहाँ पे वे आये हुए मरीजों का इलाज करते है और उनसे उस इलाज का पैसा भी  लेते है , बहुत ऐसे कम  डॉक्टर को देखे होंगे जो मरीजों के पास जाकर उनका मुफ्त में इलाज और दवाई देते हों | आज हम आपको एक ऐसे मसीहा के बारे में बताने जा रहे है जो गरीबों खासकर भिखारियों के बीच ज्यादा मशहूर हैं जिनका नाम डॉक्टर अभिजीत सोनवाने है जो महाराष्ट्र के पुणे शहर के रहने वाले है |

जो न सिर्फ गरीब और भिखारियों का इलाज करते है बल्कि  दवाइयां भी उन्हें मुफ्त में बांटते हैं| ये हर रोज अपने दवाइयों का बक्सा उठा निकल जाते है उन गरीबों और भिखारियों का इलाज करने जो कई रोगों ग्रसित है  और पैसों की कमी के कारण  अपना इलाज नहीं करवा पा रहे है |

रोज के दिनचर्या में शामिल है गरीबों और भिखारियों का मुफ्त में इलाज करना |

डॉक्टर सोनवाने  कहते है की अकसर मे  ऐसे बुजुर्गों से मिलता हूँ जिनके बच्चे उन्हें अपने ही घर से बेघर कर देते है जिनके पास भीख मांगने के सिवा कोई और रास्ता नहीं होता, अपना जीवन गुजर बसर करने का | मैं हमेशा कुछ जरूरी दवाइयाँ साथ लेकर चलता हूँ  ताकि उनका इलाज करने के बाद कुछ जरुरी दवाई दे सकू |  मै रविवार के अलावा हर दिन सुबह 10 बजे से दिन के तीन बजे तक यह काम करता हूँ |

 

भिखारियों का मुफ्त इलाज करने के साथ साथ उन्हें प्रेरित करते है छोटे मोटे रोजगार की शुरुआत करने के लिए |

मै  मरीजों के इलाज के साथ साथ उनसे बातचीत भी करता हूँ कुछ अपनी सुनाता हूँ  और कुछ उनकी सुनता हूँ ताकि उनके दुखों को कम करने में उनकी मदद कर सकूँ और साथ साथ ये भी समझाने की कोशिश  करता हूँ की वो भीख  मांगना छोड़कर छोटे मोटे  काम शुरू कर ले |वो आगे बताते हुए कहते है की वह समाज के लिए कुछ करने की एक छोटी सी कोशिश  है |