कौन कहता है कि युद्ध मे भाग सिर्फ़ मर्द ले सकते है ? इस बात को गलत करार किया है बिहार की एक बिटियां ने जिसने यह साबित किया है कि बेटियां भी किसी से कम नही । वायुसेना में जिस दमखम की जरूरत रहती है उसे महिला भी अधारपूर्ण कर सकती है एवं अपने कार्यो का नीतिगत निर्वाहन कर सकती है ; हर उम्मीद , हर परिस्थिति में अपनी भागदारी को अव्वल दर्जे तक ले जाने का जज़्बा रखने वाली बिहार की भावना कांत , आज यह एक ऐसी शख्सियत बन चुकी है जिन्हें युवाओं की आयरन-लेडी के नाम से सम्मानित किया जा रहा है ।।

भारत को पहली महिला फाइटर पायलट मिल गई है, इसमें अपने बिहार के बेटी भावना कांत भी शामिल है। भावना के अलावा मोहना सिंह और अवनी चतुर्वेदी भी पहली महिला फाइटर पायलट बनी है। ।

◆देश की पहली महिला फाइटर पायलट है भावना कांत :-

हर क्षेत्र में दमखम दिखाने के बाद आखिरकार देश को पहली महिला फाइटर पायलट मिल गई है, जो हवाई जंग में दुश्मनों के छक्के छुड़ाएंगी । वर्ष 2016 में वायुसेना में फ्लाइंग लेफ्टिनेंट भावना कांत प्रशिक्षित फाइटर पायलट बन गई हैं । वर्ष 2016 में यह पहला मौका था , जब भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान की कॉकपिट में कोई महिला बैठी थी , इंडियन एयरफोर्स में फिलहाल 94 महिला पायलट हैं, लेकिन ये पायलट सुखोई, मिराज, जगुआर और मिग जैसे फाइटर जेट्स नहीं उड़ाती हैं , पर बिहार की बेटी भावना कांत ने एक नया इतिहास रचकर फाइटर प्लेन उड़ाने वाली देश की पहली महिला बनी । वायुसेना में लगभग 1500 महिलाएं हैं, जो अलग-अलग विभागों में काम कर रही हैं , फ़िलहाल भावना ने वर्ष 2019 में अपना पहला चरण पूरा कर लिया है ।।

◆1991 से ही महिलाओं को एयरक्राफ्ट उड़ाने का अनुभव है प्राप्त :-

1991 से ही महिलाएं हेलीकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट उड़ा रही हैं, लेकिन फाइटर प्लेन से उन्हें दूर रखा जाता था। भावना कांत के अलावा 2 और महिला को इस फाइटर प्लेन के अध्यन में शामिल किया गया था जिसमे राजस्थान की मोहना सिंह एवं मध्यप्रदेश की अवनी चतुर्वेदी शामिल है ।

23 मई 2016 को हुई पासिंग आउट परेड में तीनों महिला पायलटों को भारतीय वायुसेना में बतौर फाइटर पायलट कमीशन शामिल कर लिया गया था, जिसके बाद इन तीनों महिलाओं की फाइटर एयरक्राफ्ट्स पर ट्रेनिंग शुरू हो गयी और कुछ महीनों के अंदर ही ये देश की पहली महिला फाइटर पायलट बन गयी ।

8 मार्च, 2016 को वायुसेना प्रमुख अरूप राहा ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर इसका औपचारिक ऐलान किया था और आज के दिन इसको अमलीजामा पहनाया गया । इसके लिए तीन महिला ट्रेनी पायलटों को चुना गया था। तीनों ने हैदराबाद के पास डुंडीगल की एयरफोर्स एकेडमी से अपनी ट्रेनिंग का पहला चरण पूरा कर लिया है।

◆आज भी भावना गर्व से कहती है ” बिहारी हुँ” ,

भावना कांत बिहार के दरभंगा ज़िले के घनश्यामपुर प्रखंड के बाऊर गांव की निवासी है। भावना बेहद साधारण परिवार से निकल कर आसमान की ऊंचाइयों तक पहुंची हैं। उनके दादा एक इलेक्ट्रिशियन, तो पिता मैकेनिक रहे हैं। भावना ने डीएवी स्कूल, बरौनी रिफ़ाइनरी, बेगूसराय से दसवीं तक की पढ़ाई की है।
भावना ने एमएस कॉलेज बेंगलुरु से बीई इलेक्ट्रिल की पढ़ाई की है । आज अपनी मेहनत के बदौलत भावना से जब भी किसी प्रोग्राम या अवसर पर उनकी उपलब्धि का राज पूछा जाता है तो वे गर्व से कहती है “बिहारी हुँ ” ; इसके अलावा मोहना सिंह राजस्थान के झुंझुनूं जिले की है। मोहना सिंह ने दिल्ली के एयरफोर्स स्कूल से पढ़ाई की है। मोहना सिंह के पिता भी भारतीय वायुसेना में हैं। अवनी चतुर्वेदी मूल रूप से मध्यप्रदेश के रीवा की रहने वाली हैं। उनके पिता एग्जीक्यूटिव इंजीनियर हैं। अवनी चतुर्वेदी ने राजस्थान के टॉक जिले में वनस्थली विद्यापीठ से कंप्यूटर साइंस की डिग्री हासिल की है।

subham Gupta

Associate Author at BiharStory.in
एक स्टोरी राइटर, जिसका मकसद सामाजिक गतिविधियों एवं अपनी लेखनी के माध्यम से सामाजिक परिदृश्य को दिखाना ही नहीं बल्कि बदलाव के लिए सदैव प्रयासरत भी रहनाहै |
subham Gupta

Latest posts by subham Gupta (see all)