अभी का सामाजिक दृष्टिकोण एवं पहले के सामाजिक दृश्टिकोण में बहुत बदलाव आ चुका है , पर इंसानियत अभी भी किसी राह पर जिन्दा है | बदलते वक़्त और समाज के साथ बहुत कम ही लोग है जो खुद को पूरी तरह से बदल पाए है | आज  समाज  केवल स्वं  की देखभाल में व्यस्त है पर समाज मे कुछ ऐसे लोग  भी मौजूद है दूसरों की सहायता करने के लिए  जीते है  |

सात्विक सक्सेना जोकि अपने निजी कोष को खर्च कर मानसिक रूप से विकलांग लोगों की कर रहे है मदद |

बिहार के समस्तीपुर जिले के रहने वाले सात्विक सक्सेना एक ऐसे शख़्स है जो अपनी खुद की व्यवसायिक ख़र्च के मुनाफ़े एवं आय को खर्च कर मानसिक रूप से विकलांग और गरीब लोगों की मदद कर रहे है , सात्विक सक्सेना अपनी ज़िले के अंतर्गत एक टी-शर्ट प्रिंटिंग का कार्य करते है ,जिसमें उनको होने वाले मुनाफ़े के जरिये वे अपनी सामाजिक कार्य को आगे बढ़ाते है एवं गरीब-असहाय , मानसिक रूप से विकलांग व्यक्ति के सहायता हेतू सदा तातपर्य रहते है ।।

छह महीने पहले व्यक्तिगत रूप से किए थे इस मुहीम की शुरुआत |

सात्विक से खास बातचीत के अनुसार उन्होंने बताया कि , उनको ऐसे गरीब एवं निःसहाय लोगों की मदद करना काफी अच्छा लगता है मानो जैसे मन को सुकून मिलता हो ,आगे उन्होंने बताते हुए कहा की उनकी टी-शर्ट प्रिंटिंग की व्यवसाय है जो समस्तीपुर मे है जिसके इनकम से मानसिक विकलांग की मदद करता हूँ| उन्होंने आगे बताते हुए कहा की यह मेरा शौक़ है सामाजिक कार्य के प्रति ऐसे लोगों की मदद करना ,छह महीने पहले मैंने ये काम व्यक्तिगत रूप से शुरू किया था पर आज 4-5 लोग इस मुहीम से जुड़ चुके है | इसके अलावा सामाजिक रूप से हर संभव कार्य सात्विक द्वारा किया जाता है जैसे गर्मी के दिनों में अभी समस्तीपुर बस स्टैंड के पास यात्रिओं के लिया ठंढे पानी की व्यवस्था किये है, इस तरह आगे की बात चित को आगे बढ़ाते हुए कहा की इस मुहीम की शुरुआत के दौरान लोगों के ताने सुनने को मिले थे|

लोगों के ताने के आगे भी नही झुक पाया सात्विक के सामाजिक कार्य के प्रति हौसला |

सामाजिक कार्यो के पथ पर सात्विक को भिन्न मुश्किल पड़ाव का भी सामना करना पड़ा उन्हें लोग अक्सर कहते थे कि ये भी कोई काम है , पर आज के समय में वही लोग मेरे इस काम की सराहना कर रहे है| इस काम को करने के लिए सात्विक के परिवार मे माँ के अलावा किसी का सपोर्ट उन्हें नहीं मिला | फिर भी आज के समय मे सात्विक को इस बात की ख़ुशी है की वे बेसहारा लोगों के लिए कुछ पा रहे है जिससे उनको ख़ुशी मिलती है |

8 नवंबर 2018 से  गरीब,असहाय,वृद्ध लोगों को प्रत्येक दिन रात्रि में अपने निजी कोष से खाना खिला रहे हैं सात्विक । इसके अलावा अगर वो बीमार रहते है तो उनको इलाज भी करवाते हैं । बहुत ऐसे लोग दिखते है वो बिना कपड़ा के है तो उनको कपड़ा देकर तन देखने का काम करते है। बहुत लोग हँसते थे और अभी भी हँसते  है बोलते है ये क्या कर रहा है इससे क्या मिलेगा उनलोगों को मैं एक ही चीज बोलता था और अभी भी बोलता है सब अपने लिए जीते है मैं दुसरो के लिए जी रहा हूं उनको खुश देख कर जो खुशी मिलती है वो किसी खुशी किसी काम मे नही।

और अंत में

सात्विक  हर लोगो को एक ही बात बोलना चाहते हैं की   अगर  सभी लोग प्रत्येक दिन एक भूखा को भी खिलाते हैं तो हमारा भारत बहुत जल्दी ही hunger free India हो जाएगा। इन सब के अलावा सात्विक बुजुर्गों के लिए एक  आश्रम बनाने जा रहे हैं  ताकि इन लोगों को  खुले आसमान में ना सोना पड़े |

 

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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