5683 टन लोहा से बना 1440 मीटर लम्बे कोइलवर पुल को कोई एक बार देख ले या उसपर से गुजर जाये तो एक बार उन अंग्रेज कारीगरों का लोहा जरूर मान जायेंगे कि आखिर 157 साल पहले शुरू हुयी इस पूल की समय सीमा समाप्त होने के बावजूद आज भी इस पुल के सीने से दर्जनों रेलगाड़ी ,हजारों ट्रक और गाड़िया प्रतिदिन गुजरने के बाद भी यह पूल उसी मजबूती से कैसे खड़ा है | अपने 28 पिलरों के सहारे धरती माँ के साथ जुड़ने वाला  यह नायाब और एतिहासिक पूल रोज लाखों लोगों को मंजिल तक पहुचाती है |

 पटना और आरा को जोड़ता  ‘कोइलवर पुल’

एक मजदूर नेता व स्वतंत्रता सेनानी प्रोफेसर अब्दुल बारी के नाम पर पड़ा हुआ है कोईलवर पुल का  नाम  इसलिए इसे अब्दुलबारी पुल के नाम से भी जाना जाता  है ।आरा-पटना के बीच सोन नदी पर बना कोइलवर पुल ऐतिहासिक धरोहर है।

पुल के लिए 1851 में सर्वे हुआ। 1856 में निर्माण कार्य शुरू हुआ और 1862 में तैयार हुआ। इस पुल के लिए 5653 टन लोहा इंग्लैंड से आया था। तब 1440 मीटर लंबा यह पुल एशिया महादेश का सबसे बड़ा पुल था। आज 157 साल बाद भी यह पुल शाहाबाद के चार जिलों की करीब एक करोड़ आबादी के लिए लाइफलाइन है।

इंजीनियरिंग के विंटेज मॉडल का नमूना है कोईलवर पुल 

यह पुल एक इंजिनीरिंग विंटेज का अद्भुत नमूना पेश करता है , इसकी रूपरेखा एवं पुल की बनावटी एक अनुभवी इंजीनियर की सोच को दर्शाता है ; सोन नदी पर बना कोईलवर रेल सह सड़क पुल एक ऐतिहासिक धरोहर है। वर्ष 2019 में इसकी उम्र 157 साल हो गई है। पुल का आइडिया तत्कालीन अंग्रेज लोटिस गेस्टर का था। कोइलवर पुल का निर्माण 1856 ई में शुरू हुआ।कोइलवर निवासी प्रखर स्वतंत्रता सेनानी व मजदूर नेता अब्दुल बारी के नाम पर हुआ है नामकरण ।

इस पुल में 28 पिलर हैं। पुल के ऊपरी हिस्से में रेलमार्ग व निचले हिस्से में टू लेन की सड़क है। जिसमें उत्तरी लेन 3.03 मीटर व दक्षिणी लेन 4.12 मीटर चौड़ा है। पटना राजधानी को कई जिलों को जोड़ने का एकमात्र लाइफ लाइन है।

1856 ई में जब कोईलवर पुल का निर्माण कार्य शुरू हुई थी तब की फ़ोटो
1856 ई में जब कोईलवर पुल का निर्माण कार्य शुरू हुई थी तब की फ़ोटो

सोन नदी पर बना यह पुल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र  है 

कोईलवर पुल सोन नदी पर बना हुआ है ; पुल के शुरुवात में भगवान भास्कर का मंदिर भी मौजूद है , जहाँ दूर दूर से पर्यटक दर्शन को आते है एवं इसके उपरांत सोन नदी और कोईलवर ब्रिज के लुभावने दृश्य का आनंद लेते है ।

100 साल के लिए बना पर 157 साल गुजरे

इस पुल पर लगभग प्रतिदिन 200 से अधिक रेल एवं एनएच 30 से हजारों वाहन परिचालन से करीब लाखों लोग सफर करते है एवं इसके उपरांत पुल के रास्ते से बालू का भी निर्यात किया जाता है ; कोईलवर पुल के ऊपरी मंजिल स्थित अप एवं डाउन रेल लाइन से दर्जन भर सुपर फास्ट ट्रेन समेत दर्जनों यात्री एवं गुड्स ट्रेनें गुजरती हैं। सैकड़ों भारवाहक वाहन समेत बस-कार आदि यात्री वाहन निचले मंजिल के दोहरे सुरंगनुमा सड़क मार्ग से गुजरते हैं। इसके नीचे बहती रहती है सोन नदी की अविरल धारा जिसमें नौकाएं तैरती रहती हैं।

157 वर्ष पुराना यह पुल अपनी अस्तित्व को ख़तरे में देखकर रो रहा है ; बालू खनन से पुल अपनी जर्जर स्थिति में है ; मशीनीकरण के युग मे बालू खनन के लिए आधुनिक मशीने द्वारा इतना खनन किया गया है कि पुल का चबूतरा बिखर सा गया है ; इससे परेशानी वहाँ उत्पन्न हो रही है कि जब सोन नदी अपनी तेज धारा से बहेगी तो पुल के नीचे का पिलर का ज़मीन ही ना खिसका दे । मुख्य रूप से खनन की वजह से पुल के नीचे का प्लेटफार्म अपनी मूलभूत जगह से बिखर सा गया है जिसकी वजह से ज़मीन के तल में गड़े पिलर स्पष्ट दिखाई दे रहे है ।

छह लेन का कोइलवर पुल निर्माणाधीन

कोईलवर के अब्दुल बारी ब्रिज के जर्जर हालत को देखते हुए नए पुल का निर्माण कार्य शुरू हो गया है ; जल्द ही सोन नदी पर 6 लेन पुल का परिचालन की शुरुवात होगी जिससे 157 वर्ष पुराना अब्दुल बारी ब्रिज को राहत पहुँचेगी ।

125 किमी लंबी पटना-बक्सर फोरलेन सड़क में सोन नदी पर कोईलवर में छह लेन का पुल व बक्सर में गंगा नदी पर दो लेन का नया पुल बनाया जाना है। दानापुर से बिहटा तक एलिवेटेड रोड के लिए  85 एकड़ जमीन अधिग्रहण जारी है। पटना-बक्सर रोड के बिहटा के परेव से शाहपुर तक जाने वाली 43.08 किमी सड़क पर 825 करोड़ खर्च होंगे। इसी पैकेज में सोन नदी पर छह लेन पुल का निर्माण कार्य चल रहा है।

subham Gupta

Associate Author at BiharStory.in
एक स्टोरी राइटर, जिसका मकसद सामाजिक गतिविधियों एवं अपनी लेखनी के माध्यम से सामाजिक परिदृश्य को दिखाना ही नहीं बल्कि बदलाव के लिए सदैव प्रयासरत भी रहनाहै |
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