कुछ वर्षों से लगातार पूरी दुनिया में भारत की छवि एक ऐसे देश के रूप में बन रही , जहां पर गंदगी और प्रदूषित वातावरण की समस्या वक़्त  के साथ- साथ  बढ़ती ही जा रही है। आज भारत के बहुत सारे  ऐसे युवा हैं जो दूसरे देश में जाकर वहां की स्वछता के नियमो को बखूबी निभाते है , पर भारत में आकर अपनी इस जिम्मेवारी को मनो जैसे भूल जाते है |

आज जागरूकता के बदौलत भारत में भी स्वछता की दिशा में कदम बढ़ाये जा रहा है जिसमे आम जनता है का पूरा पूरा योगदान देखने को मिल रहा है | इन्ही सब अभियानों में एक सबसे महत्वपूर्ण मिशन है ‘स्वच्छ भारत अभियान या मिशन’, जो एक मिसाल के रूप में उभरकर सामने आ रहा है।

स्वच्छ भारत मिशन के तहत किया गया एक लक्ष्य का निर्धारण |

ग्रामीण की एक  वेबसाइट एसबीएम  के मुताबिक़, पिछले  चार सालों में भारत के 27 राज्यों में 15,70,13,896 घरों में 9,25,13,906 शौचालयों का निर्माण हुआ और इन्हें ‘खुले में शौच से मुक्त’ होने का दर्जा भी हासिल हुआ। स्वच्छ भारत मिशन के तहत एक लक्ष्य निर्धारित किया गया था कि अक्टूबर, 2019 तक संपूर्ण भारत को खुले में शौच से मुक्त कर दिया जाएगा ताकि इससे होने वाली बिमारियों से लाखों लोगों को निजात मिल सके | आज इस मुहीम को इस  विश्व स्वास्थ्य संगठन में सराहा जा रहा है | प्रशंसा और सराहना के साथ-साथ इस मिशन की सफलता की मुख्य वजह यह है कि यह आम जनता से सीधे जुड़ने वाली एक मुहिम बनी और सरकारी अधिकारों और राजनेताओं के साथ-साथ बॉलिवुड के सितारों, खिलाड़ियों, बिज़नेस संगठनों और आम जनता सभी ने एक स्तर पर इस मिशन को सफल बनाने के लिए प्रयास किए।

ग्रामीणो की सोंच में बदलाव लाना बनी एक बड़ी चनौती |

ग्रामीण भारत के इतिहास देखा जाये तो यह प्रचल था की  घर के आधारभूत ढांचे में टॉयलट के लिए अलग से कोई जगह ही नहीं होती थी। शौच या शौचालय के बारे में खुलकर बात करने में कतराते थे , ग्रामीणो की इसी सोंच में बदलाव लाना एक बहुत बड़ी चनौती है |  |इसी व्यवस्था को पूरी तरह बदलने के लिए सरकारी नीतियां और योजनाओ  का साथ अति आवश्यक है| ताकि सरकार   के मुहीम को और अधिक बल मिल सके |एक लेख के मुताबिक़, परिवर्तन की गती उतनी ही होगी, जितनी तेज़ी के साथ लोग उसे स्वीकार करेंगे। लोगों के बीच परिवर्तन की स्वीकार्यता की गति बढ़ाने के लिए बिज़नेस समुदायों योगदान भी जरुरी है   जो समुदाय विशेष के लोगों को उनके अपने इलाके में काम करने के लिए प्रेरित कर सकें।ताकि वो  ज़मीनी स्तर पर समस्याओं को समझ सके , और इसके बाद संगठन के लोगों को अपनी मुहिम में शामिल करे ताकि समस्या की जड़ों तक शोध कर सके |

सरकारी और गैर- सरकारी संस्थानों का मिला बहुत बड़ा योगदान |

इन संगठनों ने अपनी तकनीक, पैसे, रिसर्च और अन्य संसाधनों की मदद से स्थानीय लोगों को एक सही दिशा में जागरूक करने का कार्य किया , जिससे पूरा समुदाय इस मुहीम से जुड़ सके |

प्रोफेसर मिशेल पोर्टर ने   सामाजिक मुद्दों पर काम करने के लिए एक मॉडल बनाने की मांग की ताकि जिसके माध्यम से वो लोगों को और भी प्रभावित कर सके | (जिसमें गैर-सरकारी संगठन-एनजीओ और अन्य लोक कल्याण संस्थाएं आती हैं) |
आज भी बहुत सारे  ऐसे भी मुद्दे हैं, जहां अभी भी कई समस्याएं हैं। इसका उपाय तब ही संभव है, जब बिज़नेस समुदायों  द्वारा सरकार और गैर-सरकारी संगठनों के साथ मिलकर सामुदायिक स्तर पर लोगों की प्रतिभागिता सुनिश्चित की जाए |