आज देश मे  करोड़ो ऐसे लोग है जो आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण  अपना या अपने परिवार का इलाज सही से नहीं करवा पाते जिसके कारण  उनका हस्ता खेलता परिवार टूट के बिखर जाता है | अधिकांशतः बीमारियां हवा मे  मिली  विषैली गैसों के कारण  होती है तो कुछ गंदे पानी और ख़राब खाने का सेवन करने के कारण होता है |

आज के समय में  अगर स्वच्छ भोजन और साफ़ पानी पिने के लिय मिल भी  जाता है फिर भी स्वच्छ हवा जो की नेचुरल है वो मिलना बहुत मुश्किल है ये तभी संभव है जब हम पर्यावरण की सुरक्षा के लिए  कदम कदम मिलाएंगे | वनो को काटने से रोकेंगे ताकि हमें स्वच्छ हवा मिले | अगर हम ऐसा नहीं कर सकते तो एक स्वस्थ शरीर की भी कामना नहीं कर पाएंगे |  अगर हम हम आँख  बंद करके एक घने जंगल की कामना करते है तो हमारा मन प्रफुल्लित  हो उठता है सोचिए  अगर ये वास्तविकता में बदल जाए  तो कितना मनोरम दृश्य होगा हमारी इस धरती का |  कई अध्ययनों के मुताबिक  अगर आप हरियाली और पेड़ पौधों से घिरे है तो   आपके मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। पेड़-पौधे और वनस्पतियां हमें मानसिक रूप से स्वस्थ रखने के साथ ही बीमारियों और घाव को खत्म करने की सबसे बड़ी दवा है |

गरीबों की निःस्वार्थ मदद करने वाली सिमा मंजिल|

गरीबों  की मदद करने वाले बहुत काम ही लोग होते है जो बिना स्वार्थ के गरीबों की मदद करे पर कुछ लोग आज भी ऐसे है जो जरूरतमंदों की सेवा करना अपना धर्म  समझते है | आज हम बात कर रहे है केरल की एक 53 वर्षीय एक ऐसे युवती की जो कर्मों  को अपना पूजा मानती है|  जिनका नाम सुमा मंजिल की जो अपने बगीचे में लगे पेड़  पौधों को बेच कर लोगों का इलाज कर रही है |

 

श्वास संबंधी रोगों से जूझ रहे कई लोगों का कराया इलाज|

इनके अनुसार इनको हमेशा शहर के प्रदूषण चिंता थी जिसके कारण  इनके साथ साथ शहर के कई निवासियों को  साँसों की समस्या  हो रही थी तब मैंने उनके घरों में एक छोटा सा बगीचा  लगा दिया और साथ  ही साथ मे  प्लास्टिक के सामान का उपयोग छोड़ मिट्टी के बर्तन का उपयोग  करने लगी फिर मैंने इस साल के शुरुआत  मिनी गार्डन नामक पहल की शुरुआत की जिससे मुझे काफी प्रसिद्धि मिली और मे  अब तक  श्वास संबंधी रोगों से जूझ रहे कई लोगों का इलाज कर चुकी हूँ |  सुमा  अपने घर में लगे  पौधों को बेच कर  इनसे जो पैसे आते है वो  लोगों के इलाज में खर्च करती हैं।

ज़िन्दगी के बुरे वक़्त से मिले सबक ने दिलाई इन्हे प्रसिद्धि|

जब इनसे इस पहल के बारे में पूछा गया तो उन्होंने  बताया की  डेढ़ साल से उनके पिता  डिमेंशिया से पीड़ित थे और पिछले साल  सितंबर में उनका देहांत हो गया। उसके कुछ महीने पहले ही मेरी मां का निधन हो गया था।जो मेरे ज़िन्दगी  सबसे  बुरे वक़्त  थे | हमारे पास इतने संसाधन थे कि मैं उनका इलाज करा सकूं। लेकिन मैंने उन लोगों के बारे में सोचा जिनके पास मंहगा इलाज के  लिए  पैसे नहीं है उनके  परिवार को उनके मरने के बाद कौन देखेगा ये सोच कर मे इस  पहल की शुरूआत  की ताकि उन लोगों की मदद हो सके।’

 

Srinu Parashar

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