किसी ने सच ही कहा है अगर कोई काम  सच्ची निष्ठा और लग्न  से किया जाए तो वो कभी व्यर्थ नहीं जाता | आज इस बात को साबित कर दिखाया है  वाराणसी के डीरेका में रहने वाली लगभग 38 वर्षीय डॉक्टर सुनीता तिवारी ने |

14 वर्ष पूर्व हुई घटना से मिली प्रेरणा |

जो खुद ही शारीरिक रूप से कमज़ोर महिला है क्यूंकि वो बचपन मे ही पोलियो की शिकार हो चुकी थी |इस घटना ने इनको जीवन जीने का नया उद्देश्य दिया |  बात उन दिनों की थी जब सुनीता ने सर्दियों के मौसम मे एक गरीब बच्चे और उसकी माँ को ठिठुरता देखा था | मानो जैसे उनके दिल हुंकार उठी और उन्होंने ठान लिया की जब तक मे रहूंगी गरीबों और असहायों की मदद करूंगी| अपनी इसी सोंच को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने अपने आस-पड़ोस व मित्रों से पुराने कपड़े आदि मांग कर गरीबों में बांटना शुरू कर दी ताकि कोई गरीब और असहाय ठंढ की ठिठुरन का शिकार न हो | 14 वर्ष पूर्व हुई उस घटना का आज तक नहीं भूल पायी है जो उन्हें ऐसे मुहीम के लिये प्रेरित किया | उन्हें इस काम को करने से खुशी मिलती है।

गरीबों की मदद के साथ साथ करती उनकी बेटियों को निःशुल्क शिक्षित |

जहाँ तक इनके व्यक्तित्व की बात आती है तो आज ये महिलाओं के लिए आदर्श बन चुकी है | ये न सिर्फ गरीबों की मदद करती है अपितु उनकी बेटियों को निःशुल्क सिलाई तथा ब्यूटीशियन का कोर्स भी सिखाती हैं| जिससे वो सोसाइटी मे अपनी एक अलग पहचान बना सके और साथ साथ उन असहाय जिसकी वो मदद करती है उनका समय समय पर हाल चाल पूछने भी उनके घर तक जाती है ताकि उनकी और सारी समस्या को जान सके और समय रहते हल ढूंढ सके |

शरीर से कमज़ोर होने के वाबजूद भी कभी हार नहीं माना बल्कि अपने दृढ निश्चय पर डटी रही और ज़िन्दगी मे कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा |

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से पी.एचडी. की डिग्री प्राप्त कर डीजल रेल इंजन कारखाने (डीरेका) में क्लर्क के पद पर कार्यरत सुनीता के इस चुनौती भरे जीवन में उनके माता-पिता ने बखूबी साथ दिया।

सुनीता शरीर से कमज़ोर होने के वाबजूद भी कभी हार नहीं माना बल्कि अपने दृढ निश्चय पर डटी रही | ज़िन्दगी मे कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा चाहे राहे कितनी भी मुश्किल क्यों न रही हो |  आज उनके इसी  हौंसले ने उन्हें समाज में एक अलग पहचान दी है। आज वो दूसरों के लिये प्रेरणा स्रोत बन चुकी है |