जब तक हमारे देश के युवाओं में राष्ट्र सेवा की भावना जागृत नहीं होगी, तब तक हमारा देश विकसित राष्ट्र की श्रेणी में नहीं आएगा | ये युवा हीं  हैं जो अपनी नई सोंच और  दम-खम  के साथ समाज की रूढ़िवादी सोंच को पूरी तरह से बदलने का माद्दा रखते हैं | कुछ इसी तरह की सोंच चरितार्थ कर रही है  राजधानी पटना से 30  किलोमीटर की दुरी पर स्थित बिक्रम के पतुत गांव के कुछ युवाओं की टोली ‘छू लो आसमान’  जो निर्धन  बच्चों को निःशुल्क बेहतर शिक्षा  एवं पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराती हैं |

बच्चे देश के कर्णधार है

हम अंग्रेजी हुकूमत से तो मुक्त हो गए पर आज आजादी के 71 वर्ष बीत जाने के बाद 72वां स्वतंत्रता दिवस मानते समय डंके की चोट पर नहीं कह पा रहे हैं कि हम विकास की लौ भारत के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुचाँ पा रहे हैं |

हम इस शिक्षा को सबके अधिकार तो कहते हैं पर क्या सही मायने में  गरीब बच्चे को शिक्षा मिल पाई है ? अगर नहीं तो कैसा अधिकार ? जिन्हें दो जून की रोटी के लिए सुबह भेड़-बकरी चराने के बाद खेत में काम करना पड़ता है , कुछ तो बालक दुकानों, घरों और यहाँ तक कि कारखानों में कार्य करने को मजबूर हैं वैसे बच्चों को शिक्षित नहीं किया गया तो कहां से विकास, कहाँ है न्याय। छू लो आसमान के संस्थापक चेत प्रकाश ने बताया कि नन्हे मुन्ने बच्चे देश के कर्णधार है। बताते चले कि छू लो आसमान द्वारा निःशुल्क पाठशाला गरीब एवं शिक्षा से महरूम बच्चों के लिए चलाया जा रहा है।

बिक्रम के चेत प्रकाश टीम बनाकर कर रहें हैं समाज को शिक्षित करने का काम

विगत चार वर्षों से मेधा प्रतियोगिता,पेंटिंग प्रतियोगिता,डांसिग,संगीत,क्विज गावँ गावँ व विद्यालय जाकर करा रहे चेत प्रकाश व उनकी टीम के युवा समाज में शिक्षा से समाज सुधारने का बीड़ा उठाया है। इसी कड़ी में युवाओं की टोली बनाकर बिक्रम प्रखण्ड के पतुत गावँ से निःशुल्क पाठशाला की शुरुआत हुई, जहां शिक्षित युवाओं की टोली शिक्षा से महरूम बच्चों को शिक्षित कर रही है। शुरुआत में यह मुहिम कठिन थी लेकिन कहा जाता है कि “करत करत अभ्यास से जड़ मति होत सुजान रसरी आवत जात से शील पर परत निसान” मेहनत रंग लायी गावँ के टुनटुन सिंह ने अपना मकान दिया और शिक्षित युवा जुड़ गए इस मुहिम में। अब जो सबसे कठिन था वो था शिक्षा से महरूम बच्चों को पाठशाला तक लाना।

ज्योत प्रकाश और युवाओं की टोली के साथ उषा देवी घर घर जाकर शिक्षा के फायदे  बताने से लोग बच्चों के भेजने को तैयार हुए और शुरू हुई निःशुल्क पाठशाला, लगने लगे बच्चों के सपने को पंख । जो बच्चे गरीबी की वजह से भेड़-बकरी चराते थे, मजदूरी करते थे जब छू लो आसमान की टीम ने उनके हाथों में निःशुल्क पुस्तक,किताब,कॉपी,कलम दी तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। आज तो पाठशाला में बहुत बच्चे शिक्षा के साथ साथ पेंटिंग आदि सीखने आते हैं अभी 80 बच्चे प्रतिदिन आते हैं।

बच्चे पहले बेकार में इधर-उधर इधर उधर घूमते थे पर अब उनके अंदर भी शिक्षा के साथ संस्कार भी आया है और वे अब अपने माता पिता को सुबह शाम प्रणाम भी करते हैं। रविन्द्र साव,रामसुकित मोची,कुणाल साव आदि अभिभावक कहते हैं कि “हमार बचवा अब पढ़ है अउ कुछ हिसाब होव है त एकरा से करवा ही तब लगल पढ़ाई केतना जरूरी हे” अगर इस तरह की टोली हरेक गावँ में बने तो हम समाज के गरीब बच्चों को शिक्षित कर पाएंगे। इसलिए वे पूरे बिहार के गावँ में जाएंगे और युवा को प्रेरित कर प्रत्येक गावँ में निःशुल्क पाठशाला से शिक्षा से महरूम बच्चों को शिक्षित करेंगे। इनका मानना है कि गरीबी से लड़ने का मुख्य हथियार शिक्षा है। पाठशाला में बच्चे पढ़ाई के साथ साथ पेंटिंग, गायन,नृत्य भी सिख रहें हैं साथ हीं बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिए खेल-कूद भी कराया जाता है।

ग्रामीण प्रतिभा से हीं भारत बनेगा विश्व नायक

छू लो आसमान टीम द्वारा ग्रामीण प्रतिभा को निखारने की इस मुहिम में चेत प्रकाश की टीम में प्रीतम शर्मा,संजीव कुमार, सौरव कुमार, मुखिया कमलेश शर्मा, सुनील कुमार आदि लोग ने समाज में कुछ करने की ठानी बाद में धीरे-धीरे युवाओं की टीम जुड़ती गयी जिसमें ज्योत प्रकाश, कुंदन, ऋषि, शुभम,सूर्यप्रकाश,बीरेंद्र,नीतीश,प्रिंष,साहिल जैसे सैकड़ों युवा जुड़ते गए।

गरीब बच्चों को शिक्षित करना  विकास का एक मात्र रास्ता ‘चेत प्रकाश’

साहब पेट है न कमाना हीं पड़ता है किसी दिन बिना खाने के सो कर तो देखिए कम्बखत नींद भी नहीं आती । लेकिन फिर भी हमें रास्ता निकलना हीं होगा, समय देना हीं होगा कर्ज है इस मिट्टी का एक हीं रास्ता है विकास का शिक्षा , वही है भारत का भविष्य ।  गरीब बच्चों को शिक्षित करना  विकास का एक मात्र रास्ता । मिल जाएगी आजादी हम बन जाएंगे विश्व नायक लेकिन हाँ हमें सोचना तो होगा , प्रयास तो करना होगा, ठोकड़ तो मिलेगी पर जो इसके बाद सफलता होगी वह स्वर्णिम होगा । क्या हम 1 घंटे समय नहीं निकल सकते, क्या हम 1 रुपया नहीं निकला सकते हैं ? निकाल सकते हैं मेरी माँ की बाते गूंजती रही तू पैसा कमाए लागले त का तू का समझ है कि खाली हमही बनावलुक है तोरा न के में पूरा गावँ आ समाज के हाथ हौ । फिर टीम बानी 2014 में और काम हुए शुरू शिक्षा का ।  टीम के साथ मिलकर गरीब एवं शिक्षा से  वंचित बच्चों के लिए निःशुल्क पाठशाला शुरू हुई  । लेकिन फिर भी यह समुद्र में एक चम्मच पानी के बराबर हैं लेकिन अगर आप सब का साथ हो तो इस अशिक्षा रूपी पराधीनता से हमारा देश मुक्त हो जाएगा ।

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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