प्लास्टिक की बोतल उच्च घनत्व वाले प्लास्टिक से निर्मित बोतल होती है।जिसका का उपयोग आमतौर पर तरल पदार्थ जैसे पानी, शीतल पेय, मोटर तेल, खाना पकाने के तेल, दवा, शैम्पू, दूध और स्याही के रूप में किया जाता है।

एक्सपायरी डेट ऑफ़ प्लास्टिक बोतल नॉट वाटर

प्लास्टिक बोतलों का आकार बहुत छोटी नमूना बोतलों से लेकर बड़े कार्बोज तक होता है।आज हम बात करने जा रहे है प्लास्टिक बोतलों में भरे पानी की कैसे वो हमारे शरीर के लिए नुकसानदेह है और कैसे इससे बचा जा सकता है |बोतल बंद पानी जब किसी व्यक्ति तक पहुँचता है तो वो कब की पैकिंग है ये नहीं पता चलता जैसा की हम सभी जानते है पानी से भरे बोतलों पे जो एक्सपायरी डेट लिखी होती है दरअसल वो पानी की नहीं बल्कि उस प्लास्टिक के बोतलों की होती है जिसमे वो भरा गया है | एक्सपायरी डेट ऑफ़ प्लास्टिक बोतल नॉट वाटर |

प्लास्टिक का गलनांक लोहे , तांबा जस्ता इन सभी की अपेक्षा होती है बहुत कम

जहाँ तक हम सभी जानते है प्लास्टिक को गलाना बहुत मुश्किल है और अगर वो गल नहीं पायेगा तो वो कैसे उसको एक नया आकार दिया जायेगा | इसलिये प्लास्टिक को गलाना बहुत जरुरी है इसलिए इसको गलाने के लिए बहुत सारे केमिकल का यूज़ किया जाता है ताकि उसको गला कर एक नया रूप दिया जा सके | और फिर से उस प्लास्टिक का उपयोग नए चीज़ों की पैकेजिंग करने में हो सके |

प्लास्टिक को पिघलाने के लिए एक बैलेंस तापमान पर गर्म किया जाता है ताकि उसको पिघला कर नया रूप दिया जा सके | जहाँ तक हम सभी जानते है इसका गलनांक लोहे अल्मुनियम तांबा जस्ता इन सभी की अपेक्षा बहुत कम होती है यूँ कहूं तो इसको आसानी कोई भी गला सकता है |

शोध के मुताबिक बोतलबंद पानी जब तक किसी व्यक्ति तक पहुंच पाता , तब तक वह नहीं रहता पीने लायक

बात जब इसकी स्वच्छता की आती है तो ये घातक बीमारी के रूप को जन्म देता है | बोतल बंद पानी तब तक लोगों के पास पहुँचता है जब तक वो पीने लायक है |   अधिकतर लोग यह सोचते हैं कि बोतलबंद पानी साफ व बेहतर होता है। लेकिन ऐसा नहीं है। न्यूयार्क की स्टेट यूनिवर्सिटी के शोध में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है की   बोतलबंद पानी जब तक किसी व्यक्ति तक पहुंच पाता , तब तक वह पीने लायक नहीं रहता है। उसमें प्लास्टिक के कण होने के साथ कई तरह के रसायन शामिल होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत घातक हैं। जो कैंसर जैसी बीमारियों को जन्म देता है |

प्लास्टिक बोतलों में भरे पानी शरीर के लिए है नुकसानदेह

जिस बोतल को सुरक्षित और साफ़ पानी समझ कर खरीदते है वही उनके बीमार होने का सबसे बड़ा कारण है | बोतलबंद पानी की पैकिंग स्वास्थ्य के लिए कितनी सुरक्षित है, इसकी जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। सामान्य पानी को उबाल कर इस्तेमाल करने से उसमें जो भी कीटाणु या वायरस होते हैं, वे नष्ट हो जाते हैं। लेकिन बोतलबंद पानी में प्लास्टिक के जो घातक कण होते हैं, उनका कोई हल नहीं है। क्यूंकि यह प्लास्टिक कई दशक तक नहीं गलता है।

प्लास्टिक की जिन थैलियों में पानी भरा जाता है, उनकी जांच की नहीं है कोई व्यवस्था ।

प्लास्टिक की बोतल में बंद पानी की बोतलें जब कंपनियों से निकाल कर दुकानों व गोदामों में जाने के लिए ट्रकों में लोड होती हैं तो उस समय बाहर का तापमान अगर 35 से 40 डिग्री सेल्सियस है तो ट्रक के अंदर का तापमान 50 से 60 डिग्री सेल्सियस होता है। उस दौरान कई केमिकल से बनी प्लास्टिक की बोतलों में केमिकल उस पैक पानी में  मिलना शुरू हो जाता है।और वह  प्रदूषित हो जाता है। पानी की जांच की तो व्यवस्था की जाती है लेकिन जिन बोतलों, प्लास्टिक की थैलियों या कप में पानी भरा जाता है, उनकी जांच की कोई व्यवस्था नहीं है।

प्लास्टिक बोतलें जब गर्म के संपर्क में आती हैं तो इनसे निकलती है 55 से 60 जहरीले रसायन

प्लास्टिक बोतलें जब गर्मी के संपर्क में आती हैं तो इनसे 55 से 60 जहरीले रसायन निकलते हैं जो पानी में मिल जाते हैं। ऐसा पानी सेहत के लिए हानिकारक होता है।प्लास्टिक की बोतल पुरानी होने और उसमें बहुत पुराना पानी होने पर इसका इस्तेमाल करने से कब्ज, पेट गैस, कैंसर सहित अन्य बीमारियां हो सकती हैं।

अधिकतर लोगों को देखा जाता है की वो गर्म खाना बच्चे के प्लास्टिक लंच बॉक्स में भरकर देते है जो प्लास्टिक से रियेक्ट करके के खाने को प्रदूषित कर देता है जो हमारे शरीर के लिए हानिकारक होता है | यदि गर्म खाना रेफ्रिजरेटर में भी रखा जाए तो भी खाने की गर्मी के कारण जहरीले रसायन मिलने से वह नुकसान पहुंचाता है। ऐसा खाना खाने से हार्मोंन का असंतुलन हो सकता है।

कुछ ऐसे उपाय जिसकी मदद से मिल सकती है होने वाली बीमारियों से निजात |

पानी पीने से पहले उसे प्लास्टिक बोतल से शीशे की बोतल, स्टेनलेस स्टील या तांबे के बर्तन में डालें। खाना भी प्लास्टिक की बर्तन के बजाए शीशे या स्टील के बर्तन में खाएं | यदि आप बाहर खाना चाहते हैं तो किसी होटल या रेस्टोरेंट में जाएं न कि खाना घर पर मंगवाएं । क्यूंकि घर पर खाना प्लास्टिक के बर्तन में लाया जाएगा जो सेहत के लिए घातक होगा।

और साथ साथ महिलाओं को भी एक सलाह देना चाहूंगी की वे अपने बच्चों को प्लास्टिक की बोतल में दूध न पिलाएं। इसके लिए शीशे की बोतल सबसे बेहतर उपाय है।