बिहार या दूसरे राज्य में अधिकांशतः देखा गया है बड़े बड़े नेता लोग अगर गरीबों की थोड़ी सी मदद करते है तो उसका फोटो खींच कर सोशल मीडिया पे अपलोड  कर देते है ताकि लोगों की नजर में अच्छे नेता बने रहे |

Youth Solidarity committee

सामाजिकता से परे होती है नेताओं की वास्तविकता |

ये भी देखा जाता है की फोटो खिचवाने के लिए भी नेता लोग गरीब को कम्बल खाना और न जाने क्या बाँटते हुए दिखाए जाते है जो की सच्चाई से बिलकुल ही अलग होता है | आजकल लोग नेता बनना पसंद करते है ताकि राजनितिक दुनिया भी उनकी पहचान रहे पर गरीबों को वास्तविक रूप से कोई नहीं मदद करना चाहता |  शायद लोगों को मेरा लिखा देख बुरा लगे पर वास्तविकता से परिचय करवाना हमलोगो का  या आपलोगों का कर्तव्य है |

नेता एक ऐसा शब्द जिसका अर्थ कर देता है लोगों को गुमराह |

नेता होता क्या है ? ये एक ऐसा शब्द है जिसकी सच्चाई कुछ और है  जो बिलकुल वास्तविकता से परे है  | ये एक ऐसा शब्द जो दिखने में बस दो शब्द  का है परन्तु इसका अर्थ लोगों को गुमराह कर देता है | नेता (लीडर) ऐसे व्यक्ति को कहा जाता है जो समाज की समस्याओं को  अपना कर्तव्य समझता है की लोगों को इससे निजात मिले परन्तु आजकल के नेताओं की परिभाषा ही कुछ और हो गयी है |

दूसरों की समस्या से मुझे क्या मतलब मुझे तो राजनीति का सरताज बनना है और कुर्सी संभालनी है |आजकल युवा को देखा जाए तो वो समाज को धीरे समझने की कोशिश कर है जिससे उनके प्रति इनका रुझान बढ़ता जा रहा है | आज हम बात कर रहे है ऐसे युवा की प्रोपगंडा से बिल्कुल दूर है |

Youth Solidarity committee

पटना का एक युवा टीम (Youth solidarity committee) कर रहा है गरीबों का संरक्षण |

सच्चाई देखनी हो तो पटना के युवाओं की एक टीम “युवा एकता समिति” (Youth Solidarity committee) के द्वारा किये जा रहे कार्यो को देखें । जो प्रोपोगंडा से दूर उन गरीबो के साथ खड़े है जिन्हें वास्तव में उनकी जरूरत है । जो आजकल उन लोगो की मदद के लिए मसीहा बनकर जरूरत मंद लोगों को कम्बल बांटने , भोजन कराने का पुनीत कार्य आज कल पटना के विभिन्न इलाकों में ” युवा एकता मंच” (Youth Solidarity committee) के द्वारा किया जा रहा है। जिसकी लोगों ने सराहना की।

Youth Solidarity committee

” युवा एकता मंच” (Youth Solidarity committee) को छोड़ पटना के किसी भी इलाके में कथित समाजसेवी नजर नहीं आते |

जहां पटना में सर्द हवाओं व गलन भरी हांडकपाऊ सर्दी ने जनजीवन अस्त व्यस्त करने के लिए पाँव पसारना शुरू कर दिया था , आम जनमानस गर्म कपड़ों, रजाई व इलेक्ट्रॉनिक हीटरों का सहारा लेने को विवश कर रहा था , वहीं दूसरी ओर इस सर्दी ने गरीब असहाय लाचार बेबस लोगों की रातों की नींद छीन ली हो  या यूँ कह सकते है चयन सुकून छीन लेने की तैयारी कर चुकी था |  बेचारे आग के सहारे रातें गुजरने को मजबूर हो रहे थे ऐसे निर्धन बेसहारा लोगों के लिए अभी ही कुछ करने की जरूरत होती है , लेकिन ” युवा एकता मंच” (Youth Solidarity committee) को छोड़ पटना के किसी भी इलाके में कथित समाजसेवी नजर नही आ रहे थे । इंतजार कर रहे थे की कब सर्दी  अपनी  चरम पर पहुच जाय ।

Youth Solidarity committee

“युवा एकता मंच” (Youth Solidarity committee) के सदस्य जो स्वयं  के खर्चे से पैसे बचा करते हैं गरीबों की मदद

इस पुण्य कार्य मे ” युवा एकता मंच” (Youth Solidarity committee)  के सदस्यों के द्वारा स्वयं  के खर्चे से पैसे बचा कर गरीबो के मदद  को आगे आ रहे है जो जरूरतमंदो के लिए किसी मसीहा से कम नही है । इन लोगो के द्वारा पटना के कई इलाकों में खास कर यारपुर पुल के नीचे , पटना हनुमान मंदिर के पास , गाँधीमैदान इलाको में जरूरत मन्द लोगों को कम्बल, कपड़े भोजन आदि बांट रहे है , ताकि इस सर्दी में उनको राहत मिल सके। इस पुनीत कार्य के लिए गरीबों के द्वारा ढेर सारी दुआएं और आशीर्वाद प्राप्त हो रहे है।

युवा एकता समिति (Youth Solidarity committee) जिसका मुख्य उद्देश्य है जरुरत मंदों की सहायता करना |

“युवा एकता समिति” (Youth Solidarity committee) जो कुछ युवाओ द्वारा बनाई गई एक संगठन है जिसका मुख्य काम जरूरतमंदों की सेवा करना और उनके अधिकार के लिए संघर्ष करना  है | ये कोई राजनैतिक संगठन नही है और ना ही किसी राजनेताओं के इशारे पर चलती है। यह समाज मे जागरूकता लाने का एक प्रयास है ताकि और लोग भी इस नेक कार्य मे आगे आये जिससे समाज मे सबको एक समान जीने रहने का अवसर मिल सके ।

आजकल यहाँ युवाओ में निस्वार्थ सेवा भाव बहुत मुश्किल से देखने को मिलता है, वही इन युवाओं को देख यह जरूर लगता है ऐसे युवाओ के नेतृत्व में बिहार प्रगृति की ओर बढ़ता रहेगा।

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Youth Solidarity committee

बिहार का युवा एकता समिति (Youth Solidarity committee)  जो है मानवी सवेदना का केंद्र|

जिस प्रकार राजनेताओं के द्वारा कहा जाता है कि हम गरीबों के साथ हैं लेकिन कोई साथ देता नहीं है । इसी को देखते हुए इस मंच ने पहल किया है की जितनी मेरी हैसियत होगी युवा एकता समिति के युवाओं से मिलकर के जिन गरीब भाइयों तक  पहुंचा पाऊं  । ठंड के मौसम में जहाँ लोग गरीबों को एक आश्रय तक नहीं देते हैं तो कंबल तो दूर की बात है , किन्तु इन युवाओं ने सोचा गरीबों के बीच जो सर्द रात में खुले आसमान के नीचे सड़को पर रात गुजारते है उन्हें एक कंबल से मदद किया जाए ताकि कम से कम ठंड से होने वाली बीमारी से और परेशानी से बचें।

युवा एकता मंच   (Youth Solidarity committee) के अनुसार  किसी भी सदस्य का कोई राजनीति लोभ नहीं है न ही इससे अपनी जीविकोपार्जन का मार्ग बनाना है । यह एक मानवी सवेदना है । जो एक  सामान्य समाज बनाने की राह सुगम कर सके  ।तथा वर्तमान से लेकर भविष्य की आने वाली युवा पीढ़ी से लेकर हर भारतवंशी एक वास्तविक भारत का निर्माण कर सके ।