कैथी, या कायथी भा कायस्थी, उत्तर भारत में इस्तेमाल होखे वाली एक ठो पुरान लिपि यानि लिखाई के सिस्टम हऽ। बीसवीं सदी के बीच के समय ले ई लिपि मुख्य रूप से पुरनका नॉर्थ-वेस्टर्न प्रोविंस, अवध आ भोजपुरी क्षेत्र में अउरी नेपाल के मधेस क्षेत्र में प्रयोग होखे।

एह लिपि में कानूनी दस्तावेज, प्रशासनिक कामकाज के ब्यौरा आ निजी दस्तावेज लिखल जायँ। भोजपुरी मुख्य रूप से एही लिपि में लिखल जाय। धीरे-धीरे एह लिपि के चलन बंद हो गइल आ अब ई लगभग समाप्तप्राय बाटे।

बिहारी वासी कभी अपनी लेखनी के रूप में किया करते थे कैथिली  लिपि का प्रयोग 

यूँ तो बिहार का इतिहास बहुत पौराणिक है ; बड़े – बड़े महारथी की जन्मभूमि रही  है बिहार ।। बिहार के पास पौराणिक समय मे एक ऐसा संसाधन था (जिसमे धन , बल ,ज्ञान , संस्कृति सब शामिल था) जोकि अन्य राज्य क्या अन्य देश से भी कई ज्यादा था ; जिसका उदाहरण इतिहासकारों ने इतिहास के पन्नों पर सुनहरे अक्षरों में लिख रखा है ।
परन्तु यह हमारा दुर्भग्य रहा है कि हम उन सारी संसाधनों को संजो कर रख नही पाए चाहे वो विश्व का पहला विश्वविद्यालय नालंदा विश्वविद्यालय हो या फिर हमारी संस्कृति हो ।। आज इस प्रस्तुत लेख में एक ऐसी लिपि का वर्णन है जोकि किसी समय मे बिहार की पहचान हुआ करती थी | लोग अपनी लेखनी  के रूप में भी इस लिपि का प्रयोग करते थे , परन्तु आज के समय मे यह लिपि महज नाम का रह गया है एवं यह खत्म होने के कगार पर है।

व्यापार संबधी ब्यौरा सुरक्षित रखने के लिए किया जाता था कैथिली लिपी का प्रयोग

कैथी” (Kaithi) शब्द की उत्पत्ति “कायस्थ” (Kaysath) शब्द से हुई है जोकि उत्तर भारत का एक सामाजिक समूह (हिन्दू जाती) है ।इन्हीं के द्वारा मुख्य रूप से व्यापार संबधी ब्यौरा सुरक्षित रखने के लिए सबसे पहले इस लिपी का प्रयोग किया गया था। कायस्थ समुदाय का पुराने रजवाड़ों एवं ब्रिटिश औपनिवेशिक शासकों से काफी नजदीक का रिश्ता रहा है। ये उनके यहाँ विभिन्न प्रकार के आँकड़ों का प्रबंधन एवं भंडारण करने के लिये नियुक्त किये जाते थे। कायस्थों द्वारा प्रयुक्त इस लिपि को बाद में कैथी के नाम से जाना जाने लगा। ।।

मुगल सम्राज्य के समय काफी प्रचलित थी कैथी लिपि

कैथी एक पुरानी लिपि है जिसका प्रयोग कम से कम 16 वी सदी मे धड़ल्ले से होता था ; मुगल सल्तनत के दौरान इसका प्रयोग काफी व्यापक था। 1880 के दशक में ब्रिटिश राज के दौरान इसे प्राचीन बिहार के न्यायलयों में आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया गया था। इसे खगड़िया जिले के न्यायालय में वैधानिक लिपि का दर्ज़ा दिया गया था।

सम्पति के युग मे कैथी लिपि 

कैथी लिपि को कभी कभी ‘बिहार लिपि’ भी कहा जाता है। अभी भी बिहार समेत देश के उत्‍तर पूर्वी राज्‍यों में इस लिपि में लिखे हजारों अभिलेख हैं। समस्‍या तब होती है जब इन अभिलेखों से संबंधित कानूनी अडचनें आती हैं। एक मैगज़ीन की एक खबर का संदर्भ लें तो इस लिपि के जानकार अब उस जिले में केवल दो लोग बचे हैं। दोनों काफी उम्र वाले हैं। ऐसे में निकट भविष्‍य में इस लिपि को जानने वाला शायद कोई न बचेगा और तक इस लिपि में लिखे भू-अभिलेखों का अनुवाद आज की प्रचलित लिपियों में करना कितना कठिन होगा इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। भाषा के जानकारों के अनुसार यही स्थिति सभी जगह है। ऐसे में जरूरत है इस लिपि के संरक्षण की।

subham Gupta

Associate Author at BiharStory.in
एक स्टोरी राइटर, जिसका मकसद सामाजिक गतिविधियों एवं अपनी लेखनी के माध्यम से सामाजिक परिदृश्य को दिखाना ही नहीं बल्कि बदलाव के लिए सदैव प्रयासरत भी रहनाहै |
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