कई लोगों का कहना है नौकरी करने वाले युवा नहीं दे पाते है ज्यादा समय अपने परिवार और समाज के लिए |कौन कहता है कि सरकारी नौकरी को तय समय देने के बाद परिवार-समाज के लिए वक्त नहीं निकाला जा सकता।

 रविशंकर महज 31 साल की उम्र में कर रहे है समाजसेवा ( Social activist Ravishankar )|

इस बात को गलत साबित कर दिखाया है बिहार के ( Bihar ) विष्णुपुरी निवासी रविशंकर जिनकी उम्र 31 साल है | जो 2007 से सचिवालय में सहायक पद पर अपनी सेवा दे रहे है | इनके परिवार में माँ और पत्नी के अलावा ३ बच्चे भी है |सामाजिक कार्यकरता रविशंकर ( Social Activist Ravishankar ) जो 31 साल की उम्र में साबित कर चुके हैं कि नौकरी-परिवार के साथ समाज के लिए भी बहुत कुछ कर सकते हैं हम-आप।

इनके अनुसार आजकल के यंग जेनरेशन में मानवता की कमी दिखाई  देती है वो मुझे कितना कुछ बोलते हैं, लेकिन मैं मानता हूं कि हर कोई थोड़ा-थोड़ा समय देकर भी समाज के लिए बहुत कुछ कर सकता है।

Social activist RaviShankar

क्या है इस युवा का दिनचर्या जो सरकारी नौकरी के बाद भी कर रहा है लोगों की मदद |

सामाजिक कार्यकरता रविशंकर ( Social Activist Ravishankar )के एक हफ्ते की दिनचर्या बता देती है कि एक युवक घर की जिम्मेदारी और ऑफिस की जरूरतों को पूरा करने के साथ ही कैसे समाज को समय दे पाता है | रविशंकर सप्ताह की शुरुआत में सोमवार से शुक्रवार तक रविशंकर सुबह सवेरे जागकर घर के जरूरी काम निबटाते हुए नौ से सवा नौ बजे तक घर से दफ्तर के लिए निकल जाते हैं। शाम में ऑफिस से लगभग  छह बजे निकलते हैं और इसके बाद शिड्यूल के तहत जहां भी समाज सेवा के लिए निकलना हो, चल पड़ते हैं।

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कभी अनाथाश्रम में अनाथ बच्चों को खाना खिलाने के लिए निकल जाते हैं तो कभी वृद्धाश्रम में वृद्धजनों के साथ समय बिताने के लिए। कई बार अस्पतालों में गरीबों को रोटी खिलाते हैं तो कभी जरूरतमंदों को पुराने कपड़े बांटने चले जाते है  ।

शनिवार और रविवार को भी नहीं लेते है चैन की सांस |

जिस दिन जिधर का मौका मिला, उस दिन उधर ओर रुख कर लेते है । और, इस तरह कभी वो  रात को 10 बजे घर वापिस होते है तो कभी और भी देर से घर लौटना होता है। शनिवार-रविवार को दिन का समय भी निकालते हैं इसी तरह समाज के लिए।अब आपलोग सोंच रहे होंगे की  ऐसी सेवा के लिए पैसा कहां से आता है, इस सवाल का जवाब  है उनकी पत्नी भी देती है अपने वेतन का 10 फीसदी हिस्सा इसके लिए अलग रखते हैं पहले ही।

Social activist RaviShankar

स्लम के पांच बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा भी उठा रहे हैं रविशंकर |

स्लम के पांच बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा भी उठा रहे हैं। फेसबुक-व्हाट्सएप पर कई ग्रुप से जुड़े हैं जिससे उन्हें अन्य सामाजिक कार्यों की जरूरतों का पता चलते ही एक्टिव हो जाते हैं। कई बार तो ऑफिस से छुट्टी लेकर ब्लड डोनेट करने भी निकल पड़ते हैं। रविशंकर ने फेसबुक पर ‘सहयोग’ नाम से एक पेज बना रखा है, जिसपर यूज़र जरूरतमंद लोगों की जानकारी साझा करते हैं।

Social activist RaviShankar

जान बचाने वाले के रूप में भी पहचाने जाते हैं रविशंकर

समाज सेवा के इस जुनून ने ना जाने कितने लोगों की जान बचा चुके है । रक्तदान के साथ साथ सामाजिक कार्यकरता रविशंकर  ( Social Activist Ravishankar ) इमरजेंसी में फंसे व्यक्तियों को चिकित्सकीय मदद दिलाने के लिए भी  तत्पर रहते हैं। अभी हाल ही में कुछ दिन पहले उन्हें  वाट्सएप के किसी ग्रुप से इन्हें पता चला कि जीपीओ में कार्यरत 45 वर्षीय महिला ऊजरा इमाम रात में गिर गईं। जो अनीसाबाद के अलीनगर में अकेली रहती हैं और उसे  तुरंत हड्डी के डॉक्टर से इलाज की जरूरत है, यह जानकारी मिलते ही लगातार बारिश के बावजूद सामाजिक कार्यकरता रविशंकर ने पहुंच कर इलाज कराया।

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उस दिन से ऊजरा इनका शुक्रिया अदा करती नहीं थकती हैं। ऐसे कई उदाहरण हैं जो रविशंकर  के युवा से बिल्कुल अलग बनता है , मगर रवि शंकर इसपर बहुत बात करने में असहज महसूस करते हैं।उनकी  समाज के प्रति ऐसी निष्ठा, समर्पण और निःस्वार्थ भाव से की गई सेवा को देखते हुए  रवि शंकर को माँ वैष्णो देवी सेवा समिति दुवारा सम्मानित हो चुके  है।