गरीबी तो अपनेआप में एक बहुत बड़ी बीमारी है, और स्थिति तब और भी भयावह हो जाती है जब कोई निर्धन किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त हो जाता है और इस इस बेरहम दुनिया में खाली  जेब ले कर किसी अपनों की जिंदगी बचने की जद्दोज़हद करता हो | जब डाक्टर के पुर्जे में लिखी दवा की कीमत 1200  और जेब में 12 रूपए भी न हो तो  वो गरीब सिर्फ नीली छतरी वाले की तरफ हीं देख कर आस लगाता है की वो शायद किसी को भेज कर देगा, शायद इसी लिए बिहार के एक युवा समाजसेवक ने गरीबों के इस विकट  समस्या  के समाधान के लिए निःशुल्क दवाई बैंक की स्थापना की जहां गरीब व् निर्धन निःशुल्क दवा प्राप्त कर सकते हैं

एक बीमार बुजुर्ग को देख मिली थी प्रेरणा

भरत कौशीक वैसे तो मूल रूप से बिहार के अरवल जिले के रहने वाले हैं लेकिन पटना में रह कर फूल टाइम समाज सेवा का कार्य करते हैं | भारत कौशिक का ज्यादातर समय दिव्यांग एवं किन्नरों के सामाजिक उत्थान एवं अधिकारों में हीं बीतता था साथ हीं गरीबों के लिए कपड़ा बैंक भी चलाते थे, जिसके अंतर्गत गरीबों व् असहायों के बीच निःशुल्क गर्म कपड़े व् कम्बल का वितरण करते थे | कपड़ें बाँटने  उन्हें  और उनकी टीम को स्लम एरिया में जाना होता था इसी  क्रम में  एक निर्धन बीमार बुजुर्ग से मुलाकात हुई जो अपना इलाज P.M.C.H. से करा तो रहे थे पर उनके पास दवा खरीदने के पैसे नहीं थे | भरत कौशिक और उनकी टीम को लगा की यहां तो सिर्फ एक बुजुर्ग हैं पर पुरे बिहार में न जाने कितने लोग होंगे जो दवा के आभाव में या तो अपनी बीमारी को और बढ़ा रहे हैं या फिर मृत्यु को प्राप्त हो रहे होंगे | इस घटना के अगले दिन हीं भरत कौशिक ने अपने टीम की बैठक बुलाई और दवाई बैंक की नींव रखी |

निःशुल्क दवा लेते हैं और निःशुल्क देते हैं

इस क्रन्तिकारी कदम को हर किसी ने सराहा और बहुत जगह से मदद भी मिली | कुछ लोग तो बिहार के बाहर से भी दवा को कुरियर द्वारा बिहार के इस अनोखे दवा बैंक में भेज रहे हैं | यही कारण है की आज दवाई बैंक बिहार के हर जिले में कार्य कर रही हैं |

दवाई बैंक के टीम में ज्यादातर दिव्यांग हीं हैं

सबसे खास बात इस दवाई बैंक की यह है की इस क्रन्तिकारी मुहीम में भरत कौशिक का साथ देने वाले सिपाही ज्यादातर दिव्यांग बंधु  हैं, जो अपने तीनपहिये साईकिल से दवा को संग्रह करते हैं और वितरित करते हैं | जहां कोई भी दवा दुकानदार फ्री और डिस्काउंट को भूल जाइये, एक रुपया भी नहीं छोड़ता वहीँ भरत कौशिक और उनकी टीम निर्धन और असहाय लोगों को निःशुल्क दवा उपलब्ध कराना अपनी जिम्मेवारी समझते हैं तो हमारा भी फर्ज बनता है की भरत कौशिक के इस मुहीम को ज्यादा से ज्यादा लोगों के बीच लाए जिससे ज्यादा लोग दवा दान कर सके और ज्यादा से ज्यादा लोग दवाई बैंक से लाभ ले सके |

एक सन्देश समाज के लिए

आज के युवाओं को सन्देश देते हुए कहते हैं की आप के मदद  से अगर किसी के चेहरे पर मुश्कान आये तो समझिये आप सही दिशा में जा रहे हैं | इसके अलावा भरत कौशिक कहते हैं की आज का युवा अगर ठान ले तो हर बुलंदी को छू सकता है, सिर्फ दिग्भर्मित हो अपने लक्ष्य से न भटके कामयाबी कदम चूमेगी |

भरत कौशिक

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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