जैसे ही चंद्रयान – 2 आसमान में चढ़ा, लखनऊ के हर घर की छत से जयकार का एक किस्सा गूंज उठा  । लखनऊ के राजाजीपुरम में रहने वाली रितु करिदल श्रीवास्तव जो  चंद्रयान -2 के मिशन निदेशक थी | 

अपनी कहानी को चाँद तक पहुँचाने वाली रितू करिधल श्रीवास्तव

अचानक आज आकर्षण का केंद्र बन गई है और लगभग रातोंरात एक सेलिब्रिटी का दर्जा हासिल कर लिया है।सपने अगर बड़े हों और उसको पूरा करने के लिए आपको अपने इच्छाशक्ति को जगाना पड़ता है जिसके लिए आपको कड़ी मेहनत करनी पड़ती है |  ये जरुरी नहीं की आपके  सफलता की कहानी इस धरती तक ही सीमित होगी बल्कि चाँद पे लिखी जा सकती है | इन्  बातों को सच कर दिखाया है लखनऊ की बेटी रितू करिधल श्रीवास्तव ने | जिन्होंने इस बात को इतनी गहराई से समझ उसको अपने जीवन में ऐसे उतारा की आज उनकी सफलता की उड़ान वास्तव में चाँद तक पहुँच गयी |

इसरो की वरिष्ठ वैज्ञानिक और  चंद्रयान – 2 की मिशन डायरेक्टर है रितू

रितू श्रीवास्तव जो की इसरो की एक वरिष्ठ वैज्ञानिक है और  चंद्रयान – २ की मिशन डायरेक्टर भी | आज अपनी इस सफल लॉन्चिंग के बाद इनके गृह नगर में जश्न का माहौल बन गया है | रितू श्रीवास्तव जिन्होंने अपनी प्राथमिक पढाई सेंट एगनिस स्कूल तथा नवयुग कन्या विद्यालय से की थी | इसके बाद इन्होने आगे की पढाई के लिए लखनऊ विश्विद्यालय में दाखिला लिया जहाँ पे इन्होने अपने एमएसी की पढाई पूरी की फिर उन्होंने प्रो मनीषा गुप्ता के अंडर पीएचडी की डिग्री हासिल की | मनीषा गुप्ता के अनुसार रितू बहुत ही मेधावी छात्रा थी | इसका काम बड़े बड़े सपने देखना नहीं था बल्कि उसको पूरा करने का एक अलग ही जुनून था जिसके लिए वो जीतोड़ मेहनत भी करती थी |

बचपन से थी सितारों की शौक़ीन

इनके भाई – बहन  के अनुसार ,  माता-पिता के निधन के बाद, वह परिवार में सबसे बड़ी है और  एक माँ जैसी देख भाल भी करती है |  रितु हमेशा सितारों की शौकीन थी। “उनकी  माँ पूरी रात जागकर रितु के साथ रहती थी जब वह पढ़ाई करती थी | और  हमेशा सितारों की शौकीन थीं और आकाश को घूरते हुए जागती थीं। बचपन से ही इनको  यह जानने की उत्सुकता थी कि आकाश से परे क्या है।

इसरो में प्रथम युवा वैज्ञानिक के रूप में चुने जाने के बाद कभी नहीं देखी पीछे मुड़ कर

रितू श्रीवास्तव को बचपन से ही अंतरिक्ष विज्ञान में काफी रूचि थी | इसलिए रितू ने पीएचडी की डिग्री पूरी कर इसरो ज्वाइन कर लिया और उसके बाद वो कभी पीछे मुड कर नहीं देखा मानो जैसे उनके सपनो की उड़ान को एक नई दिशा मिल गयी हो |फिर उन्हें इसरो में प्रथम युवा वैज्ञानिक के रूप में चुना गया |

चंद्रयान – 2  की सफल लॉन्चिंग के बाद उनके घर में जश्न का माहौल बन गए |

रितू न केवल परिवार बल्कि देश का नाम भी विश्व स्तर पे ऊँचा किया है | परिवार के साथ साथ आज पुरे देश को इन पे  गर्व है और खुशियां मना रहे हैं | कुछ ऐसा ही खुशनुमा माहौल लखनऊ के विश्विद्यालय का है जहाँ से उन्होंने भौतिकी से अपनी पढाई पूरी की थी | यहाँ के अध्यापक अपनी पूर्व छात्रा पे गर्व महसूस कर रहे है और वहां के सभी विद्यार्थी भी उत्साहित है |

अपने सपनों को पूरा समय और ऊर्जा समर्पित करने में रही सक्षम

रितु के पति, अविनाश और उनके दो बच्चे आदित्य और अनीशा, उनके स्टार मिशन में सबसे बड़े समर्थक हैं। रितू की बहन वर्षा के अनुसार उनके परिवार का समर्थन इतना मजबूत है कि वह अपने सपनों को पूरा समय और ऊर्जा समर्पित करने में सक्षम रही | सितारों को घूरने वाली लड़की ने आखिरकार चाँद को छू लिया है |