बिहार के दरभंगा जिले का रघुनाथपुर गांव सामाजिक समरसता का नया इतिहास लिख रहा है |  इस गांव का त्रिवेणी मध्य विद्यालय कई मायनों में बहुत खास है |  इस स्कूल के मुस्लिम छात्र जब संस्कृत के श्लोक का पाठ करते हैं तो सुनने वाले हैरान रह जाते हैं |  दरभंगा जिले के हायाघाट प्रखंड के रघुनाथपुर में स्थित है यह अनोखा विद्यालय और  इस स्कूल की स्थापना 1950 में हुई थी |  इस स्कूल में कुल 120 छात्र- छात्राएं हैं जिनमें 38 बच्चे मुस्लिम समुदाय के हैं | आमतौर पर यह माना जाता है कि संस्कृत हिन्दुओं के पढ़ने के लिए है और उर्दू मुसलमानों के पढ़ने के लिए, लेकिन यह एक संकुचित सोच है |

गांव का समाजिक तानाबाना सहयोग और सद्भाव वाला है

नुजहत परवीन, आरिस खातून और सादिया परवीन त्रिवेणी संस्कृत मध्य विद्यालय में क्लास आठ की छात्राएं हैं |  उन्हें संस्कृत पढ़ना इस लिए अच्छा लगता है क्योंकि इसमें जीवन को अनुशासित और सुखमय बनाने वाले पाठ होते हैं |  इतना ही नहीं वे संस्कृत पढ़ कर संस्कृत का शिक्षक बनना चाहती हैं |

जब सुबह में आरिफा श्लोक रट रही होती है तो उसके पिता निजामुद्दीन उससे इसका अर्थ समझते हैं, उनको भी महसूस होता है कि बच्चे जीवन को बेहतर बनाने वाली पढ़ाई पढ़ रहे हैं |  इस गांव का समाजिक तानाबाना सहयोग और सद्भाव वाला है |  यहां हिन्दू और मुसलमान मिलजुल कर रहते हैं |

अनुशासन किसी बड़े स्कुल की तरह

यह स्कूल और भी कई मायनों में खास है, यहां अनुशासन किसी बड़े स्कूल से कम नहीं है |  छात्र- छात्राएं तो स्कूल ड्रेस में होती ही हैं मिड डे मील बनाने वाली रसोइया भी यूनिफॉर्म में रहतीं है |  यहां की साफ-सफाई की व्यवस्था बाल संसद है जो इसकी देख रेख करती है | यहां बच्चों के हाथ धोने के लिए हैंडवास स्कूल के दोनों चापाकल पास रखा रहता है | अलावा छात्रों को आत्मनिर्भर बनानके के लिए विद्यालय विकास समिति की ओर से सिलाई की भी पढ़ाई होती है  यह स्कूल बिहार संस्कृत बोर्ड से जुड़ा है, यहां के शिक्षकों को सरकार ही वेतन देती है |

समाज  तोड़ना नहीं जोड़ना सिखाता है  स्कुल

धर्म और भाषा के नाम पर समाज को बांटने वाले लोगों के लिए यह स्कूल एक सबक की तरह  है |  यहां सामाजिक समरसता की जड़े इतनी गहरी हैंकी  देश की विघटनकारी ताकतों की यहां दाल नहीं गलती |  कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए समाज में मजहब की दीवार खड़ी करते हैं, लेकिन दोनों समुदायों में जब आपसी समझबूझ हो तो रघुनाथपुर जैसा गांव वजूद में आता है |