भोजपुरी” इस शब्द में एक ऐसा वजन है जिसे सामने वाला सुनकर एकदम से सख़्त हो जाता है और मुस्कुरा कर पूछता है कि “क्या आप बिहार से है” ।
यू तो बिहार का एक अपना अलग ऐतिहासिक कहानियां किताबों में शूमार है ; उस इतिहास के पन्नों के बीच मे भाषा की पंक्ति में भोजपुरी भाषा का नाम सबसे अव्वल है ; पौराणिक लोग तो संस्कृत – हिंदी के बाद भोजपुरी भाषा को ही शुद्धतापूर्ण भाषा की मिसाल दिया करते थे ।
क्षेत्रीय भाषा होने का सौभाग्य हालांकि भोजपुरी को मिला तो सही पर अपनापन कहीं अधूरा सा रह गया ।।
किसी भाषा की स्तुति उसकी प्रयोजित गीत के अनुसार होती है परंतु जब गीत से समयानुसार अश्लीलता एवं फूहड़ता की बू आने लगती है तो छवि राज्य की एवं उसकी भाषा की होती है और वही हाल है बिहार एवं भोजपुरी भाषा का ।।

पर सच्चाई इसके विपरीत है ; भोजपुरी में प्यार, विरह, निर्गुण और सोहर को जितनी खूबसूरती के साथ परोसा गया है, शायद ही आपको वो बॉलीवुड के गानों में सुनने को मिले । आज आप जिस बॉलीवुड के गानों के सामने भोजपुरी को गंदा मान रहे हैं, हो सकता है यही बॉलीवुड विदेशी भाषाओं के गानों के सामने फीका पड़ता हो । खैर, आज का ज़माना कुछ ऐसा है कि गंदी और बुरी चीज़ों को लोग ज़्यादा वायरल करते हैं, भोजपुरी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है ।

फूहड़ता और अश्लीलता की भाषा नहीं है भोजपुरी

भोजपुरी गानों का नाम जेहन में आते ही हमारे अंदर कई तरह के भाव पैदा होने लगते हैं। मसलन, भोजपुरी गाने अश्लील होते हैं, कामुक होते हैं और काफ़ी फूहड़ होते हैं। लोग ऐसा कहते हैं कि भोजपुरी गाने अश्लीलता की सारी हदें पार कर देते हैं। कुछ हद तक ये सही भी है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि पूरी भोजपुरी इंडस्ट्री में ऐसे ही गाने बनते हैं या फिर बनते आए हैं। भोजपुरी में प्यार, विरह, निर्गुण और सोहर को जितनी खूबसूरती के साथ परोसा गया है, शायद ही वो बॉलीवुड के गानों में सुनने को मिले। भोजपुरी गानों ने जीवन के हर रंग को अपनी भाषा में खूबसूरती से उतारा है। लेकिन, आज का ज़माना कुछ ऐसा है कि गंदी और बुरी चीज़ों को लोग अधिक पसंद और वायरल करते हैं। भोजपुरी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है।

पैसों के लिए अपने ही समाज को बदनाम कर रहे है भोजपुरी कलाकार :-

भोजपुरी जिसे आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए लंबे समय से भोजपुरी भाषी क्षेत्र के लोग प्रयासरत हैं। बुद्धिजीवियों का भी यही मत है कि भोजपुरी समृद्ध भाषा बने, ¨कतु इसी भोजपुरी को कुछ ओछी मानसिकता के लोग बदनाम करने पर तुले हैं।जी हां हम बात कर रहे हैं भोजपुरी के नाम पर समाज में परोस जा रहे अश्लील गाने की।

भोजपुरी गायक जो भी मन में आए, नारी समाज पर छींटाकशी करते हुए, बेशर्मी की सारी सीमाएं लांघते हुए कोई भी गीत लांच कर दे रहे हैं। अभी के समय में सब जगह से लेकर भीड़-भाड़ वाले स्थानो पर इसी तरह के गीतों का बोलबाला है। काफी तेज अवाज में जब ये गीत बजने शुरू होते हैं, तो नारी समाज की आंखे शर्म से झुक जाती है। बावजूद इसके इस पर रोक लगाने या इस पर बहस के लिए प्रशासन या कोई राजनीतिक दल आगे नहीं आना चाहता। ऐसे में बुद्धिजीवियों ने केंद्र व प्रदेश सरकार से भोजपुरी के नाम पर परोसे जाने वाले फुहड़पन युक्त अश्लील गानों के लिए सेंसर स्थापित करने की मांग की है।

अश्लील गानो पर भोजपुरीया समाज जता रहे है नाराजगी भोजपुरी गानो के छिछोरेपन एवं अश्लीलता के प्रति समाज के सभ्य लोग अब अपनी नाराजगी जता रहे है, और जताना भी चाहिए, क्योकि दिन ब दिन भोजपुरी गायक तथा लेखको को अपने ही समाज मे अश्लील गाने परोसकर अपने ही समाज की बदनामी एवं खिल्ली उड़ा रहे है दूसरे समाज के लोगो द्वारा यह माजरा अब समझ से परे है।
बता दे कि हाल ही मे उतरप्रदेश, बिहार एवं झारखंड मे भोजपुरी गायिका अंतरा सिंह प्रियंका का एक गाना धूम मचा रहा है जिसका मुखङा है, गांधी जी हमरा चोली में । ऐसे कलाकार गीत की स्तुति लिखते समय इनके हाथ भी नही कांपते की वे देश के राष्ट्रपिता के बारे में इतनी अभद्र टिप्णी कर रही है ।।

पाण्डेय जी, मिसिर जी आदि जिन गानो मे ऐसे सरनेम रहते है वैसे लोग ऐसे गाने सुन तनिक ज्यादा ही कुंठित हो जाते है। और किसी के विचारो एवं भावनाओ को ठेस ना लगे,ऐसा विचार भोजपुरी के गायको और लेखको को भी रखने चाहिए । चपक के चुम्मा लेता हूँ । ऐसे में सरकार को कड़ी से कड़ी कार्यवाही करें और समाज को स्वच्छ बनाये ।

भोजपुरी गानों का नाम जेहन में आते ही हमारे अंदर कई तरह के भाव पैदा होने लगते हैं. मसलन, भोजपुरी गाने अश्लील होते हैं, कामुक होते हैं और काफ़ी फूहड़ होते हैं. लोग ऐसा कहते हैं कि भोजपुरी गाने अश्लीलता की सारी हदें पार कर देते हैं. हालांकि, कुछ हद तक ये सही भी है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि पूरी भोजपुरी इंडस्ट्री में ऐसे ही गाने बनते हैं या फिर बनते आए हैं. बेशक आपने उस तरह के भोजपुरी गानों को सुनकर उसके प्रति एक मानसिकता बना ली हो, लेकिन सच कहूं, तो आपने भोजपुरी गानों की सुंदरता को अभी तक नहीं देखा है और न ही उसे महसूस किया है.

लोकगीतों को बचाने के लिए करना होगा अश्लीलता का पुरजोर विरोध

आज के दौर में जितनी भी भोजपुरी फिल्में बन रही हैं, उनमें पारंपरिक गीतों का ख़याल नहीं रखा जा रहा है। इन फिल्मों में अधिकतर आइटम सॉन्ग्स से काम चलाया जा रहा है। कुछ गीत बनते भी हैं तो सुगम संगीत होता है, न कि लोकगीत। भोजपुरी और मैथिली के क्लासिकल लेखकों को भूलाया जा रहा है। लोगों को भी अश्लीलता का पुरजोर विरोध करना होगा। इससे कलाकार भी अपनी जड़ों की ओर लौटेंगे। विगत दिनों बिहार के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली लड़कियों ने गीत-संगीतों में अश्लीलता को लेकर कई बार विरोध-प्रदर्शन भी किया है। लड़कियों ने विरोध के जरिये मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मांग की थी कि वे अश्लील गानों को बंद करा दें, या अपनी साइकिल वापस ले लें। वहीं, अश्लीलता मुक्त भोजपुर एसोसिएशन समेत कई सामजिक संगठनों ने  भी आगे बढ़कर लगातार विरोध किया था। बहरहाल, सरकार अबतक कड़े कदम नहीं उठा पा रही है।

subham Gupta

Associate Author at BiharStory.in
एक स्टोरी राइटर, जिसका मकसद सामाजिक गतिविधियों एवं अपनी लेखनी के माध्यम से सामाजिक परिदृश्य को दिखाना ही नहीं बल्कि बदलाव के लिए सदैव प्रयासरत भी रहनाहै |
subham Gupta

Latest posts by subham Gupta (see all)