बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र (Ex Bihar CM Jagannath Mishra) का दिल्ली में निधन हो गया | 82 वर्षीय जगन्नाथ मिश्र (Jagannath Mishra) लंबे समय से बीमार थे | उन्हें ब्लड कैंसर था | मिश्र  के निधन पर बिहार में 3 दिन के राजकीय शोक का ऐलान किया गया है. 1975 में पहली बार, 1980 में दूसरी बार और फिर 1989 में तीसरी बार उन्हें बिहार राज्य के मुख्यमंत्री की कमान सौंपी गई थी |

jagannath-mishra-bihar-former-CM
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा का सोमवार सुबह निधन हो गया है। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे।

बिहार का सबसे युवा मुख्यमंत्री

प्रोफेसर के रूप में अपना करियर शुरू करने वाले जगन्नाथ मिश्र बिहार विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र पढ़ाते थे | राजनीति में उनकी खास रुचि थी क्योंकि उनके बड़े भाई, ललित नारायण मिश्र राजनीति में थे |कांग्रेस के टिकट पर 1971 में सीपीआई के गढ़ मधुबनी से सांसद चुने गए थे |

jagannath-mishra-bihar

अब्दुल ग़फ़ूर के बाद जब वो पहली बार मुख्यमंत्री बने थे, तब उनकी उम्र महज़ 38 साल थी |उन्हें तब देश का सबसे युवा मुख्यमंत्री बनने का दर्जा मिला था | उनके मुख्यमंत्री बनने से ठीक एक साल पहले मार्च 1974 में बिहार में छात्र आंदोलन की शुरुआत हुई थी, जिसे बाद में जेपी आंदोलन के नाम से जाना गया |

शक्तिशाली नेतृत्व का लम्बा सफर

11 अप्रैल 1975 को जगन्नाथ मिश्रा पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने थे । यह उनके लिए बहुत कठिन वक़्त था क्योंकि इसी साल 3 जनवरी को उनके बड़े भाई और तत्कालीन रेल मंत्री ललित नारायण मिश्रा की हत्या समस्तीपुर ज़िले में कर दी गई थी ।

वो इस पद पर 30 अप्रैल, 1977 तक बने रहे । उस वक़्त केंद्र में जनता पार्टी की सरकार थी और उसने राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया था । इसके बाद देश के नौ राज्यों में चुनाव कराए गए थे । 21 महीने के आपातकाल के बाद जनता पार्टी की सरकार सत्ता में आई थी ।

1970 के दशक के मध्य में बिहार सभी कांग्रेस विरोधी आंदोलनों का केंद्र रहा था । उस वक़्त राजनीति में नौसिखिए माने जा रहे जगन्नाथ मिश्रा को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बड़ी ज़िम्मेदारियां दी थीं ।

1980 के चुनावों में इंदिरा गांधी की जीत के बाद उत्तर भारत के कई राज्यों में दोबारा चुनाव हुए । बिहार में कांग्रेस की जीत के बाद जगन्नाथ मिश्रा को फिर से मुख्यमंत्री बनने का मौक़ा मिला । उन्होंने दूसरी बार 8 जून 1980 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और 1983 में स्वतंत्रता दिवस के एक दिन पहले यानी 14 अगस्त को उन्हें यह पद छोड़ना पड़ा।

गांधी परिवार के विश्वस्त होने के बावजूद उन्होंने बिहार में कांग्रेस के भीतर कई प्रतिद्वंद्वी पैदा कर लिए थे ।

अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान उन्होंने राज्य के कई ज़िलों में उर्दू को दूसरी आधिकारिक भाषा की मान्यता दी थी । इस फ़ैसले के बाद राज्य में सैंकड़ों उर्दू ट्रांसलेटरों की नियुक्तियां हुईं थीं ।

घोटालों में नाम

फ़रवरी 1990 में विधासनभा चुनाव कराए गए, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल के लालू प्रसाद यादव कांग्रेस को बिहार की सत्ता से बेदख़ल करने में कामयाब रहे । 10 मार्च 1990 को लालू प्रसाद यादव ने बिहार के नए मुख्यमंत्री पद की शपथ ली ।

और इस तरह जगन्नाथ मिश्रा बिहार के अंतिम कांग्रेसी मुख्यमंत्री साबित हुए । कांग्रेस इसके बाद कभी भी ख़ुद के दम पर बिहार की सत्ता पर काबिज नहीं हो पाई ।

लालू प्रसाद यादव और जगन्नाथ मिश्रा राजनीतिक प्रतिद्वंदी थे, बावजूद इसके दोनों में कई समानता थी । जनवरी 1996 के चारा घोटाले में दोनों के नाम सामने आए । घोटाले से जुड़े एक मामले में वे दोनों दोषी पाए गए । मिश्रा की तरह ही लालू भी कई बीमारियों से ग्रस्त हैं ।

दोनों कभी राज्य की अल्पसंख्यक राजनीति के चैंपियन माने जाते थे और हमेशा बिहार की उपेक्षा का मुद्दा उठाते रहे , हालांकि एक वक़्त ऐसा भी आया जब उन्हें राजनीतिक मजबूरी के कारण अपनी पार्टी छोड़नी पड़ी ।

उन्होंने उस पार्टी को छोड़ा जिसने उन्हें राज्य का तीन बार मुख्यमंत्री बनाया था और उन लोगों से हाथ मिला लिया, जिनका वो कभी ज़ोरदार विरोध किया करते थे ; यानी जनता दल का यह सफ़र यूँही चलता गया बिहार में सरकारे आती रही जाती रही पर जिस जज़्बे से राजनीतिक किरायदार को जगन्नाथ मिश्र जी ने निभाया वो शायद ही बिहार के किसी नेताओं में वह छवि दिखती होगी ।

जगन्नाथ मिश्रा का नाम ऐसे नेता के तौर पर अब भी दर्ज है, जो बिहार में कांग्रेस का आखिरी मुख्यमंत्री था.

कल दिनांक – 19/08/19 को जगन्नाथ मिश्र हमारे बीच नही रहे ; इस पल में ­www.biharstory.in की पूरी टीम  पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र जी को श्रद्धांजलि अर्पित करती है ।।

subham Gupta

Associate Author at BiharStory.in
एक स्टोरी राइटर, जिसका मकसद सामाजिक गतिविधियों एवं अपनी लेखनी के माध्यम से सामाजिक परिदृश्य को दिखाना ही नहीं बल्कि बदलाव के लिए सदैव प्रयासरत भी रहनाहै |
subham Gupta

Latest posts by subham Gupta (see all)