किसी की मुस्कुराहटों पे हों निसार, किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार, किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार- जीना इसी का नाम है…… गीत की ये पक्तियां बिहार के विजय प्रताप सनातन और मनीष सिंह पर एक दम सटीक बैठती है जिनके पहल से रोजाना सौ से भी अधिक असहायों की भूख मिटती है | हर रोज सैकड़ों गरीबों का पेट भर रहे रोटी बैंक की बीज गुरु विजय प्रताप सनातन और शिष्य मनीष सिंह ने डाली थी आज देखते-देखते एक बड़े दरख्त का रूप ले चूका है |  गुरु विजय सनातन और उनकी टीम  रोज जसीडीह स्टेशन पर सैकड़ों गरीबों व् असहायों की भूख मिटा चेहरे पर मुस्कान लेन का नेक कार्य करते हैं |

रोज घर घर से जुटाते हैं भोजन

गुरु विजय सनातन का ज्ञान और शिष्य मनीष सिंह की पहल आज सैकड़ों गरीबों का पेट भर रही है। इस मुहीम शुरुवात करने वाले तो दो हीं लोग थे, पर समय के साथ संख्या बढ़ती गई आज इनसे प्रेरित होकर  दर्जनों युवक इस ग्रुप में शामिल हो गए हैं | अब  सदस्यों के परिवार में भी रोज का बजट बढ़ गया, जहां कल तक 20 रोटियां बनता था अब उसकी संख्या बढ़ गई है। थोड़ा थोड़ा सभी अपने घर से भोजन लेकर रोज जसीडीह स्टेशन पर जुटते हैं। और एकत्रित किये गए भोजन को गरीबों में बांट देते हैं। अगर भोजन घट जाता है तो सभी सदस्य थोड़ा थोड़ा रुपया जमा करते हैं और तुरन्त भोजन खरीद कर ले आते हैं

गरीबों को भोजन कराना रोज का  दिनचर्या बन गया

रोटी बैंक के जरिये रोज गरीबों को भोजन कराना अब इन युवाओं की दिनचर्या में शामिल हो गया है |  शाम होते ही सभी युवाओं का जसीडीह स्टेशन पर जुटना शुरू हो जाता है |  और लग जाते हैं गरीबों का पेट भरने में | हालांकि सरकार ने भी जरूरतमंदों का पेट भरने के लिए दाल भात योजना चलाई थी। इस योजना में सरकार 5 रुपये शुल्क में एक थाली भोजन कराती थी। आज वो योजना पूरी तरह बंद है। लेकिन इन युवाओं  ने जो  ठाना है वह सरकार को संदेश देती है कि, काम को ईमानदारी और तन्मयता से किया जाय तो काम का लाभ जरूरतमंद को जरूर मिलता है |

भोजन ना करें बरबाद

इस रोटी बैंक के पहलकर्ता सनातन फाउंडेशन के चेयरमेन विजय प्रताप सनातन का कहना है कि लोग अपने भोजनों को बर्बाद ना करें। यदि भोजन ज्यादा हो तो उसे रोटी बैंक में जमा कर दें। यदि जमा नही कर पाते हैं तो बैंक के सदस्यों को फोन करें सदस्यय जाएंगे और भोजन ले आएंगे।

कहते हैं गुरु विजय सनातन

विजय सनातन स्वयं शंकरा मिशन स्कूल के निदेशक हैं। वे कहते हैं अमीरों को सब देखते हैं, गरीबों को देखने वाला कोई नही। गरीब को दो जून की रोटी जुटाने में जो परेशानी होती है उससे वे वाकिफ हैं। एक दिन मन मे आया वैसे लोगों को भोजन कराया जाय जिन्हें मुश्किल के बाबजूद दो जून की रोटी नही मिल पाती है। उनके छात्र मनीष सिंह की भी यही इच्क्षा जागृत हुई और दोनों अपने अपने घर से रोटी लेकर जसीडीह स्टेशन पर निकल पड़े। इसकी खबर अन्य युवाओं को मिली कि वे भी घर से रोटियां लेकर पहुंच गए। इस पुण्य कार्य से उन्हें बड़ी संतुष्टि मिलती है। मनीष सिंह का कहना है विजय सनातन सर से उन्हें प्रेरणा मिली और महीनों से गरीबो को भोजन करा रहा हूँ। इन्हें जब तक नही खिलाता भूख नही लगती। अब तो जय महादेव रोटी बैंक का कारवां बढ़ गया है। सभी साथियों का पूरा सहयोग मिलता है।

niraj kumar

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