आधुनिकता के इस दौड़ में लोगों के दिल से लोक संस्कृति मिटती जा रही है वैसे में एक संभ्रांत परिवार में जन्मे तथा एक प्रशासनिक अधिकारी की अर्धांगिनी बनी बिहार की बेटी डॉ नीतू कुमारी नवगीत अपने मधुर गीत एवं सुरीली आवाज से लोगों के दिल में फिर से बसाने  का कार्य कर रही हैं | वर्तमान समय में डा नीतू नवगीत Dr Neetu Navgeet भोजपुरी लोकगीतों की प्रखर स्वर बनी हुई है तथा  अपने गीत के माध्यम से समाज में व्याप्त कुरीतियों एवं बुराइयों के खिलाफ लोगों को जागरूक तो करती हीं हैं  इसके अलावा  अपने पारंपरिक तथा कर्णप्रिय गीतों के माध्यम से लोगों को सफाई अभियान एवं वोट देने के लिए भी लोगों को जागरूक कर रही हैं |

Dr Neetu Kumari Navgeet

जहानाबाद जिले की बहु हैं डॉ नीतू कुमारी नवगीत

वैसे तो डा नीतू नवगीत की जन्म भूमि रांची झारखण्ड है पर बिहार की बहु होने के बाद उनकी कर्मभूमि बिहार बन गई | डा नीतू नवगीत Dr Neetu Navgeet के गीत ज्यादातर सामाजिक जागरूकता पर आधारित होते हैं जिनमे  कन्या भूर्ण हत्या के खिलाफ, दहेज़ प्रथा के खिलाफ, बेटियों के पढ़ाई एवं सुरक्षा के लिए, एवं सफाई अभियान के लिए होते हैं | डा नीतू नवगीत का मानना है की आप अगर किसी को कुछ सन्देश देना चाहते हैं तो उसका सबसे अच्छा माध्यम है गीत | गीत लोगों के सीधे दिल में उतर कर आपकी बात को मानने पर मजबूर कर देता हैं दूरदर्शन और आकाशवाणी के कई कार्यक्रमों में शिरकत कर चुकी डॉ नीतू कुमारी नवगीत Dr Neetu Navgeet  पूरी तरह से बिहार के लोकगीतों के प्रति समर्पित हैं | लोकगीतों के कई एल्बम में उनकी भागीदारी रही है जिनमें बिटिया है अनमोल रतन, गांधी गान, स्वच्छता संदेश, पावन लागे लाली चुनरिया और मोरी बाली उमरिया शामिल हैं  |

Dr Neetu Kumari Navgeet

विरासत को बचाने की मुहीम में जुटी हैं  डॉ नीतू कुमारी नवगीत

आज भोजपुरी जैसी मीठी एवं कर्णप्रिय भाषा कुछ गायकों के कारण अश्लीलता का पर्याय बन बैठा है और यह आज फूहड़ता इस कदर हावी हो गया है की किसी भी परिवार में  एकसाथ बैठ कर लोग न तो सुन सकते हैं और न हीं देख सकते हैं | ऐसे में  डॉ नीतू कुमारी नवगीत Dr Neetu Navgeet लोगों से अपील करती हैं की इस तरह के फूहड़ गीत जो हमारी माटी की खुशबु को कलंकित कर रही हैं मत सुनिए, जब सब लोग ऐसे गाने को देखना और सुनना बंद कर देंगे तो फूहड़ता वाले गीत भी बनने बंद हो जायेंगे | हम लोगों को विरासत में हर कुछ मिला है जिसकी हमें जरुरत है | जिन गीतों को हमारी दादी- नानी और उनकी दादी-नानी ने गाया, बड़े प्यार से सहेजा, उन गीतों की परंपरा जारी रहना चाहिए  |  हर पर्व, हर त्यौहार और जन्म, छठी, सतईसा, मुंडन,उपनयन, शादी-विवाह सहित जीवन के हर अवसर के लिए गीत हमारे गांव में मौजूद हैं, हमारी जड़ों में हैं । कोई लाख कोशिश कर ले, आधुनिकता की चाहे कितनी भी लंबी चादर ओढ़ ले; अपनी जड़ों से कटकर ज्यादा दिन तक जी नहीं सकता । दुनिया का कोई भी बिस्तर मां की गोद की जगह नहीं ले सकता  |

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
niraj kumar