कामयाबी के लिए उम्र नहीं लगन मायने  रखती है, ये कथन है उत्तर प्रदेश Uttarpradesh के बागपत जिले की जोहरी गांव की रहने वाली इस दादी को ‘शूटर दादी’  प्रकाशो और चंद्रो तोमर की  चंद्रों तोमर भले ही उम्र के 80वें दशक में हों, लेकिन इनके कारनामें जानकर आप भी कहेंगे सच में हैं ये रिवाल्वर दादी |  6 बच्चों और 15 पोते-पोती वाली ये दादी रिवाल्वर ( Revolver Dadi ) चलाने में माहिर हैं, इतना हीं नहीं  इन्होंने शूटिंग में 25 नेशनल चैंपयिनशिप जीत चुकी हैं

Revolver Dadi

लोग देते थे ताना Revolver Dadi बुढ़िया कारगिल जाएगी

पहली बार चंद्रों ने निशानेबाजी की प्रेक्टिस 65 साल की उम्र में शुरू की थी। इसी बीच शूटर दादी को समाज के कई तानें भी सुनने पड़े। गांव वाले उनका मजाक उड़ाते थे और कहते थे कि बुढ़िया इस उम्र मे कारगिल जाएगी क्या? लेकिन उन्होंने किसी की बातों पर ध्यान नहीं दिया। आज सारी दुनिया उनके इस फैसले की नतीजा देख रही है। उनका लक्ष्य हमेशा शूटिंग ही रहा है। वह 25 मी. तक का निशाना लगा चुकी हैं। इन्होंने ये साबित किया कि कुछ नया करने के लिए उम्र नहीं देखी जाती। उम्र और निशानेबाजी के इस तालमेल को लेकर चंद्रों का कहना है कि निशानेबाजी से उनकी उम्र को कोई ताल्लूक नहीं है। वो कहती हैं कि अगर आप में हिम्मत है तो आप किसी भी उम्र में कुछ भी कर सकते हैं

दिलचस्प है Revolver Dadi बनने की कहानी

इनके निशानेबाज बनने की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। दरअसल, साल 2001 में चंद्रों अपनी पोती शैफाली गांव की डॉ. राजपाल की शूटिंग रेंज में शूटिंग सीखने जाती थीं। इस दौरान ये दोनों दादी भी अपनी पोतियों के साथ रहती थी। एक दिन पोती ने कहा- दादी आप भी निशाना लगा कर देखो।

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इसके बाद चंद्रो ने दो-तीन निशाने एक दम सही लगाए। जब राइफल क्लब के कोच ने दादी को यू शूटिंग करते देखा तो वह दंग रह गए। इसके बाद से ही दोनों का शूटिंग का सफर शुरू हुआ। 1999 से लेकर 2016 के बीच Revolver Dadi ने 25 नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में जीती है।मेडल जीते हैं। इतना ही नहीं, एक शूटिंग प्रतियोगिता में प्रकाशो ने दिल्ली के डीआईजी को हराकर गोल्ड मेडल जीता था।

Revolver Dadi

फिल्म सांड की आँख में दिखेगी Revolver Dadi की कहानी

तापसी पन्नू और भूमि पेडनेकर जल्द ही फिल्म सांड की आंख में नजर आने वाले हैं |  ये फिल्म Revolver Dadi के नाम से मशहूर  प्रकाशो और चंद्रो तोमर पर आधारित है। आपको बता दें कि चंद्रो और प्रकाशो दोनों देवरानी और जेठानी हैं।  86 साल की दादी प्रकाशो और चंद्रो तोमर ने लंबे उम्र में निशानेबाजी में नाम रोशन किया है |

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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