एक पुरानी कहावत है ! पढोगे-लिखोगे तो बनोगे ख़राब, खेलोगे-कूदोगे तो बनोगे ख़राब | कुछ इसी तरह हमारे देश के युवा  युवा पढ़ाई में अपने करियर को लेकर काफी सजग है, लेकिन ये सजगता खेलकूद जैसी चीजों में कम ही दिखती है। यही वजह है कि सवा करोड़ की आबादी वाला देश होने के बावजूद हम ओलंपिक जैसे खेलों में काफी कम पदक हासिल कर पाते हैं। केरल के कोझिकोड में रहने वाले व्यसाख एस आर उन तमाम युवाओं के लिए मिसाल हैं जो सब कुछ होते हुए भी स्पोर्ट्स में रुचि नहीं दिखाते हैं। आपको बता दें कि व्यसाख ने अपना एक पैर एक हादसे में खो दिया था, लेकिन फुटबॉल के प्रति उनका जुनून आज भी जारी है |

दुर्घटना की वजह से कट गया था पैर

एक बार व्यसाख अपने चचेरे भाई के साथ बाइक से जा रहे थे, तभी एक बस ने टक्कर मारी और व्यसाख बाइक से गिर गए | इस हादसे में उनका बायां पैर चला गया और दूसरे पैर का भी ऑपरेशन करना पड़ा। उस हादसे को याद करते हुए व्यसाख कहते हैं कि वो दर्द असहनीय था और आज भी याद करना किसी भयानक पीड़ा से गुजरने जैसा होता है। ऑपरेशन के बाद कई दिनों तक उनकी थेरेपी चलती रही तब जाकर वापस सामान्य जिंदगी में लौट पाए।

24 वर्षीय व्यसाख का एक पैर दुर्घटना में कट गया था, लेकिन आज भी वे केरल की दिव्यांग वॉलीबॉल टीम का हिस्सा हैं और फुटबॉल भी खेलते हैं। हाल ही में ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट किया गया थथा जिसमें वे अपनी टीम के लिए गोल कर रहे थे। इस वीडियो को 20 हजार से ज्यादा लोगों ने देखा और नॉर्थ ईस्ट की फुटबॉल टीम यूनाइटेड एफसी के कोच ईल्को स्कैटोरी ने उन्हें आमंत्रित किया।

व्यसाख के स्किल्स से प्रभावित होकर उन्हें गुवाहाटी जाने का निमंत्रण मिला। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक व्यसाख को नॉर्थईस्ट यूनाइटेड टीम के ट्रेनिंग सत्र में हिस्सा लेने के लिए भी कहा गया। इसके पहले उन्हें बहरीन के मनामा में युवा केरला क्लब की तरफ से गेस्ट प्लेयर के तौर पर खेलने का मौका दिया गया था। आपको बता दें कि व्यसाख जब सिर्फ 13 साल के थे तो उनका एक्सिडेंट हो गया था।

पैर गवाँए पर हौसला नहीं

दुर्घटना के बाद व्यसाख थोड़े प्रयासों की बदौलत व्यसाक ने तैरना, कार चलाना और साइकिल चलाना सीख गए। इसके बाद वे फुटबॉल खेलने के लिए प्रेरित हुए। वे अपने कॉलेज की तरफ से खेलते थे। एक दिन उनके कोच ने कहा कि अगर वे अपनी ही तरह कुछ और खिलाड़ियों को इकट्ठा कर सकें तो एक टूर्नामेंट का आयोजन किया जा सकता है। लेकिन दुर्भाग्य से उन्हें वॉलीबॉल खेलने के लिए खिलाड़ी नहीं मिले। हालांकि बाद में व्यसाख को केरल की दिव्यांग वॉलीबॉल टीम के साथ खेलने का मौका मिला। बाद में उन्होंने फुटबॉल भी खेलना जारी रखा और अच्छी बात ये रही कि उन्हें दिव्यांगों के लिए आयोजित होने वाले एशियन कप फुटबॉल में खेलने का मौका मिला। बाद में उन्होंने राष्ट्रीय टीम में भी जगह बनाई।

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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