इस मतलबी भीड़ भरे दुनियां में कई ऐसे व्यक्ति भी होते हैं जो अपने अनूठे कार्यों के कारण  समाज के आँखों का तारा बन जाते हैं | कुछ ऐसी हीं शख्सियत के मालिक हैं बिहार के सिवान जिले के गोरिया कोठी गांव के रहने वाले विकास चंद्र उर्फ़ गुड्डू बाबा ( Guddu Baba ) जिन्होंने | देश और समाज हित  के लिए विकास चंद्र उर्फ़ गुड्डू बाबा ( Guddu Baba ) ने जो कार्य किये हैं अगर उसे अक्षरसह लिखा जाये ये संभव नहीं है | अपना  सारा जीवन देश और समाज के नाम कर देने वाले सच्चे सामाजिक योद्धा विकास चंद्र उर्फ़ गुड्डू बाबा ( Guddu Baba ) आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं | 

 Guddu Baba

पिता जी इलाहाबाद ( प्रयाग राज ) के एक चर्चित अख़बार के कर्मचारी थे

विकासचन्द्र उर्फ़ गुड्डू बाबा ( Guddu Baba ) के पिता जी इलाहबाद (प्रयागराज) में बिरला ग्रुप की एक अख़बार थी लीडर, उसी के कर्मचारी थे और अपने परिवार के साथ इलाहबाद (प्रयागराज) में हीं रहते थे विकासचन्द्र का जन्म और बचपन भी  इलाहबाद (प्रयागराज) में हीं बिता | जब लीडर अख़बार बंद हो गई तब वर्ष 19 71  में विकासचन्द्र के पिताजी सपरिवार पटना आ गये |

 Guddu Baba

गंगा बचाओ अभियान से शुरू किये थे अपनी सामाजिक लड़ाई की  यात्रा

गुड्डू बाब (GudduBaba ) कि तंत्र साधना को करीब से जानने कि प्रबल जिज्ञासा थी, इसी क्रम में उनका पटना के बांस घाट पर आना जाना लगा रहता था | पर 22 december 1998 की रातउनके साथ एक ऐसी घटना घटी जिसने गुड्डू बाबा को अंदर तक झकझोर दिया | रात्रि तंत्र साधना के बाद वे उठे तो उनकी नजर वहां बैठे एक व्यक्ति पर पड़ी, वह व्यक्ति अपनीपत्नी का अंतिम संस्कार करने वहां आया था, और वहां नाले में तब्दील गंगा में स्नान कर रहा था | जब गुड्डू बाबा ने उस बृद्ध से पूछा कि आप यहाँ क्यों स्नान कर  रहे हैं बाहर हैण्ड पंप लगा हुआ है वहां स्नान कर लीजिये | इस बात पर वह बृद्ध बोला, बाबा जी यह मेरी धर्म पत्नी है और इनकी प्रबल इच्छा थी कि मेरा अंतिम संस्कार पटना के बांस घाट पर हो पर मेरे पास इतने पैसे नही है की मैं यहाँ से तीन तीन किलोमीटर आगे मुख्य धारा में जा कर इनका अंतिम संस्कार करूं |

 Guddu Baba

गंगा बचाओ अभियान के लिए किया 48  घंटे का उपवास

इस बात से गुड्डू बाबा ( Guddu Baba ) सोंचने लगे कि न जाने कितने लोग यहाँ शव का अंतिम संस्कार करने आते होंगे और उन्हें भी इन परेशानी का सामना करना पड़ता होगा, अगर हम  गंगा को प्रदूषित न करते तो शायद आज भी माँ गंगा पहले कि तरह पटना के किनारे से हीं बहती | फिर गुड्डू बाबा ( Guddu Baba ) ने पटना के जे पी  गोलंबर  गांघी मैदान में गंगा बचाओ अभियान के लिए 48  घंटे का उपवास किया, और उनका ये उपवास तात्कालिक डी एम गौतम गोस्वामी ने तुड़वाया था | इसी कड़ी में गुड्डू बाबा ने बच्चों को लेकर जिलाधिकारी आवास के सामने ह्यूमन चेन बनाया |

 Guddu Baba

लावारिस लाशों के सम्मान के लिए भी लड़े गुड्डू बाबा

जब गुड्डू बाबा ( Guddu Baba ) अपने सहयोगियों के साथ गंगा नदी में नाव से विचरण कर रहे थे  तो उस दौरान वे पी. एम.सी.एच  के ठीक पीछे पहुंचे , तब वहां मौजूद एक कुत्ता जिसे गुड्डू बाबा अपनी भाषा में भैरव कहते हैं ने उन सब को देख कर जोर-जोर से भैंकने लगा मानो वह कुछ कहना चाह रहा हो |

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इस दृश्य को देख गुड्डू बाबा ने उस भैरव के समीप जाने का निर्णय लिया और वहां मौजूद लोगों के मना करने के बावजूद जब नाव से उतर कर उसके पास जाने लगे तो वो भैरव भी सीढ़ियों से होते हुए पी. एम.सी.एच के परिसर में भाग गया जब गुड्डू बाबा भी   सीढ़ियों से होते हुए पी. एम.सी.एच के परिसर में गए तो वहां का दृश्य देख कर द्रवित हो उठे | वहां सैकड़ो लावारिस लाशें फेंकी हुई थी गुड्डू बाबा ने उन लावारिस लाशों की तस्वीर ली जो  इंडियन नेशन  अख़बार के पहले पन्ने पर छपी | और अगले दिन दैनिक जागरण अख़बार में छपी थी |

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उन तस्वीरों को ले कर गुड्डू बाबा ( Guddu Baba ) बिहार के तात्कालिक राज्यपाल, मुख्य मंत्री सभी के पास गयें पर जब कहीं से कुछ सकारात्मक पहल न होते देख अपना पहला पी आई एल पटना हाई कोर्ट में 21 जुलाई 2000 को लावारिस लाशों के सम्मान के लिए और गंगा को प्रदुषण मुक्त करने के लिए दायर किये | 16 मार्च 2001  को जिसका परिणाम एक ऐतिहासिक फैसले के रूप में आया जिसने कहा  गया कि लावारिस लाशों के समुचित निष्पादन कि जवाबदेही राज्य सरकार  की है और देश में पहली बार लावारिस लाशों के सम्मान देने की शुरुवात हुई तो वो पटना से शुरू  हुई और इसका श्रेय जाता है गुड्डू बाबा को |

 Guddu Baba

गुड्डू बाबा का सफर यहीं पर नहीं थमा

जब देश में आर.टी.आई. ( RTI ) आया तब गुड्डू बाबा ( Guddu Baba ) देश के हर राज्य के डी.जी.पी. से सुचना माँगा कि आप के राज्य में कैलेंडर  वर्ष में कितनी लावारिस लाशें पाई गई है, और उन लाशों के निष्पादन के लिए सरकार के तरफ से कितने रूपए का एलॉटमेंट है |  जब गुड्डू बाबा के पास इसकी सुचना पत्र के माध्यम से आने लगा तो उसकी गिनती छोड़िये उन सब पत्रों का वजन तक़रीबन एक सौ किलो से अधिक होगा  प्राप्त हुआ |

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और सबसे चौकाने वाला सच यह सामने आया कि,  उन लाशों के निष्पादन के लिए किसी राज्य सरकार  द्वारा दो सौ का  एलॉटमेंट है  तो कहीं साथ सौ सिर्फ पंजाब एक मात्र ऐसा राज्य मिला जो पांच हजार का एलॉटमेंट देती है | इन सब के बाद गुड्डू बाबा ( Guddu Baba ) ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में पी आई एल दायर किया पर लावारिस लाशों के समुचित निष्पादन का कोई समाधान नहीं निकल पाया |  इस बात का गुड्डू बाबा ( Guddu Baba ) को तकलीफ भी है कि कहने को तो हमारा देश बहुत तरक्की कर रहा है समाज की सुविधा के लिए नए नए कानून भी पारित हो रहे हैं पर मानविये लावारिस लाशों का सम्मान जनक समुचित निष्पादन हो सके , ऐसा कानून आज तक क्यों नहीं बन पाया |

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
niraj kumar