प्राचीन समय में पाटलिपुत्र के नाम से विख्यात राज्य आज पटना के रूप में जाना जाता है। इतिहास का गौरव और संस्कृति की भव्यता समेटे पटना हर किसी  को आकर्षित करता है। इसका इतिहास लगभग 3000 साल पुराना है। कई राजवंशों द्वारा शासित पटना की भूमि विभिन्न संस्कृतियों और जीवन शैली के प्रभावों को दर्शाती है। तो आइए, आज बात करते हैं उन खूबसूरत और ऐतिहासिक स्थानों में से एक पटना के ऐतिहासिक धरोहर गोलघर की |

इसकी वास्तुकला स्तूप शैली से मिलती जुलती है

गोलघर पटना की स्थापत्य कला का एक उदाहरण है | इसका आकार 125 मीटर और ऊँचाई 29 मीटर है |  इसमें कोई स्तंभ नहीं है और इसकी दीवारें आधार में 3.6 मीटर मोटी हैं। गोलघर के शिखर पर लगभग तीन मीटर तक ईंट की जगह पत्थरों का प्रयोग किया गया है | गोलघर के शीर्ष पर दो फीट 7 इंच व्यास का छिद्र अनाज डालने के लिये छोड़ा गया था, जिसे बाद में भर दिया गया |  145 सीढियों के सहारे आप इसके उपरी सिरे पर जा सकते हैं जहाँ से शहर का एक बड़ा हिस्सा देखा जा सकता है और गंगा के मनोहारी दृश्य को यहाँ से निहारा जा सकता है |  पटना शहर की सबसे अच्छी और मनमोहन दृश्य गोलघर हैं  | इसकी वास्तुकला स्तूप शैली से मिलती जुलती है। गोलघर देखने में बहुत ही मोहक लगता है और अलग से रहस्य का अहसास कराता है |  आप यहां गंगा के दो अलग-अलग रूपों को देख सकते हैं |

एक समय में गोलघर पटना की सबसे ऊंची इमारत हुआ करता था

गोलघर पटना का ऐतिहासिक इमारत है | कभी इसपर चढ़कर लोग पूरे शहर को देख पाते थे |  गोलघर के उत्तर में गंगा बहती है तो दक्षिण में पटना शहर है |  1786 में बना गोलघर काफी समय तक पटना का सबसे ऊंचा इमारत रहा |  पिछले 2-3 दशक में पटना में गोलघर से भी ऊंची इमारत बनी | अब भले ही गोलघर से पूरा पटना न दिखता हो, लेकिन इसे देखने के लिए रोज लोग आते हैं |

बिना चढ़े लौटना मजबूरी

गोलघर के गुंबद पर चढ़ने के लिए सीढ़ी बनी है |  पहले लोग इसपर चढ़ते थे, लेकिन पिछले सात साल से ऐसा नहीं हो रहा | जिस इमारत को अंग्रेज हुकूमत ने ढाई साल में बना दिया था पिछले सात साल से उसकी मरम्मत की जा रही है | अंग्रेज सरकार ने इसका निर्माण गोदाम के रूप में इस्तेमाल करने के लिए किया था |

140000 टन अनाज़ संग्रह करने की क्षमता

गोलघर, बिहार प्रांत की राजधानी पटना में गाँधी मैदान के पश्चिम में स्थित है |  1770 में आई भयंकर सूखे के दौरान लगभग एक करोड़ लोग भुखमरी के शिकार हुए थे |  तब के गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग ने गोलघर के निर्माण की योजना बनाई थी, ब्रिटिश इंजिनियर कैप्टन जान गार्स्टिन ने अनाज़ के (ब्रिटिश फौज के लिए) भंडारण के लिए इस गोल ढाँचे का निर्माण 20 जनवरी 1784 को शुरु करवाया था |  इसका निर्माण कार्य ब्रिटिश राज में 20 जुलाई 1786 को संपन्न हुआ था | इसमें एक साथ 140000 टन अनाज़ रखा जा सकता था |

गोलघर को 1979 में राज्य संरक्षित स्मारक घोषित किया गया | गुम्बदाकार आकृति के कारण इसकी तुलना 1627-55 में बने मोहम्मद आदिल शाह के मकबरे से की जाती है |  गोलघर के अंदर एक आवाज 27-32 बार प्रतिध्वनित होती है जो अपने आप में अद्वितीय है |

niraj kumar

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