मदद के बाद लोगों के चेहरे पर खुशी देखकर जो संतुष्टि गुरमीत सिंह को होती है वो उनके लिए जीवन की सबसे बड़ी खुशी है

नेकदिली वो दरिया है, जहां नहाने से सिर्फ खुशियां मिलती है | मानव जीवन का उद्देश्य हीं होता है अपने मन, वचन और काया से दूसरों की मदद करना | किसी की मदद करने में जो ख़ुशी मिलती है उसके आगे दुनिया की सारी खुशियां फीकी पर जाती है,पर आज समाज में बिरले लोग हीं इस ख़ुशी को हासिल कर पाते हैं | आज हम जिनकी बात करने वाले हैं वो इन्ही बिरले लोगों में शामिल हैं जो नेकदिली की दरिया में हर वक्त गोता लगाए रहते हैं | जी हाँ हम बात कर रहे हैं पटना के गुरमीत सिंह जी का जिनके मन-मस्तिष्क में हर वक्त एक हीं आवाज़ गूंजती रहती है की कैसे ज्यादा-से ज्यादा लोगों की मदद की जाए |

Sardar Gurmit Singh

खुद कपड़े की दुकान चलाते हैं

मूल रूप से पाकिस्तानी परिवार की तीसरी पीढ़ी सरदार गुरमीत सिंह (Sardar Gurmit Singh) पटना (Patna, Bihar) शहर के भीड़भाड़ वाले इलाके चिरैयाटांड इलाके में कपडे की दुकान चलाते है | पिछले 25 साल से गुरमीत सिंह (Sardar Gurmit Singh) निरंतर शहर के विभिन्न इलाको में बेसहारा छोड़ दिए गए लोगो को खाना खिलाते और उनकी निस्वार्थ भाव सेवा करते चले आ रहे हैं | सरदार गुरमीत सिंह (Sardar Gurmit Singh) हर उस शख्स की मदद करते है जो अपनों के सताये, बीमार, लाचार और आसक्त, खाने के लिए दाने दाने को मोहताज है और तो और गुरमीत सिंह (Sardar Gurmit Singh) पटना (Patna, Bihar) मेडिकल कॉलेज अस्पताल के उस कुख्यात ‘लावारिस वार्ड’ में मरने को छोड़ दिए गए इंसान के लिए रोटी के निवाले के साथ मौजूद दिखाई देते हैं जहां आम आदमी एक मिनट ठहर नहीं सकता | गुरमीत सिंह (Sardar Gurmit Singh) इस वार्ड में न सिर्फ मरीजों को रोटी खिलाते हैं बल्कि उन्हें इंसान होने का अहसास भी दिलाते हैं |

Sardar Gurmit Singh

एक व्यक्ति के मदद ने उनकी जिंदगी बदल दी

सरदार गुरमीत सिंह (Sardar Gurmit Singh) की जिंदगी में भी एक अनजान मददगार ने उनकी जीवन की दिशा ही बदल डाली | उस अनजान फ़रिश्ते ने सरदार गुरमीत सिंह (Sardar Gurmit Singh) के परिजनों की उस वक्त मदद की जब गंभीर रूप से बीमार अपनी बहन के इलाज के लिए सरदार गुरमीत सिंह (Sardar Gurmit Singh) दर दर की ठोकरें खा रहे थे | सरदार गुरमीत सिंह को तब अहसास हुआ की पैसा न हो तो इंसान कितना लाचार और मजबूर हो जाता है | ऐसे में उस अनजान फ़रिश्ते ने न केवल मदद की बल्कि यू कहें कि हमारी बहन को जीवनदान दिया | और  फिर दुनिया की इस भीड़ में सदा के लिए गुम हो गए | तभी से सरदार गुरमीत सिंह (Sardar Gurmit Singh) जी ने अपने पुरे जीवन को मानव सेवा (Social Work) को समर्पित कर दिया | आँधी आये या तूफ़ान, आग बरसे या पानी तमाम विपरीत स्थितियों में भी गुरमीत सिंह पीएमसीएच  PMCH के लावारिस वार्ड के मरीजों को तो खाना खिलाना नहीं भूलते |

Sardar Gurmit Singh

खुद के कमाए पैसे से करते हैं मदद

सरदार गुरमीत सिंह (Sardar Gurmit Singh) जी बिना किसी से आर्थिक योगदान लिए खुद के कमाए पैसे से 25 वर्षो से लगे हैं मानव सेवा (Social Work) में | अब तक 25 वर्षो में सरदार गुरमीत सिंह अनगिनित लोगों को पूर्ण रूप से सकुशल कर उन्हें उनके परिजनों से मिला चुके है | शुरूआती दौर में जब सरदार गुरजीत सिंह ने अपनी सीमित कमाई से अनाथों और लावारिस लोगों को खाना खिलाना शुरू किया तो आर्थिक तंगी की वजह से कई बार इस काम में मुश्किलें आईं |

इसे भी पढ़े :-समाजसेवकों के प्रेरणदूत धर्मवीर सिंह बग्गा

उस दौरान परिजनों ने भी विरोध किया पर लगन और अपनी धुन के पक्के इस व्यक्ति ने सारी मजबूरियों और विरोध को परे रख इस काम को अपनी दिनचर्या में शामिल रखा | कभी ऐसे भी हालात आये की घर में खाने को कुछ भी नहीं था फिर भी पैसों का यहाँ वहा से इंतज़ाम कर साग सब्जी खरीद कर लाये | घर में ही खाना बनवाया और लेकर अस्पताल के वार्ड में पहुंच कर सब को खाना खिलाया |

Sardar Gurmit Singh

कैसी भी परिस्थिति हो नहीं भूलते मरीजों को खाना खिलाना

गुरमीत सिंह का भरा पूरा परिवार है। परिवार में पांच बेटे हैं, जिस दिन बड़े लड़के की शादी थी | आनंद काज में सभी नाते रिश्तेदार दोस्त साथी खुशियाँ मना रहे थे और सरदारजी अस्पताल में अपने रोज के नित्य के फ़र्ज़ को अंजाम देने पहुंच गए | वार्ड में मौजूद मरीजों को खाना खिलाया, सब के साथ अपनी खुशिया बांटी, सब को मिठाई खिलाई | फिर शादी में शामिल होने के लिए घर वापस लौटे |

इसे भी पढ़े :- फ़रहत नकवी फ्री में करती हैं लोगों की कानूनी मदद

अपने हाथों से खिलाते हैं मरीजों को खाना

इस वार्ड में अकसर ऐसे ही मरीज आते है जो खुद से खाना भी नहीं खा सकते | खाना खिलाने के बाद सरदार गुरमीत सिंह (Sardar Gurmit Singh) मरीजों के बिस्तर और कपडे भी साफ़ करते है | आम आदमी के गुमनाम मसीहा गुरमीत सिंह किसी लावारिस की जानकारी मिलने पर वहां पहुंच जाते हैं और उसका इलाज करवाते हैं, उसकी सेवा करते हैं और स्वस्थ होने पर उसके घर तक पहुंचाते हैं  |

सरदार गुरमीत सिंह उन तमाम लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं जो समाज (Social Work)  के लिए कुछ करना चाहते हैं | समाज सेवा (Social Work) के लिए सबसे ज़रूरी है दृढ इच्छा और नि:स्वार्थ भाव | लोगों के चेहरे पर खुशी देखकर जो संतुष्टि गुरमीत सिंह को होती है वो वाकई जीवन की सबसे बड़ी खुशी है |

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
niraj kumar