दिनांक – 14-09-19 को हमारी मातृभाषा हिंदी का दिवस है ; हिंदी संस्कृत भाषा का एक प्रयोजित रूप है ; हिंदुस्तान में भाषा का आदान-प्रदान मूलरूप से इसी भाषा के रूप में होता है ।।
हिंदी के प्रति योगदान की छवि भारत के प्रत्येक छेत्र से देखने को मिल जाएगी परन्तु जब बात बिहार की आएगी तो इसका योगदान थोड़ा अधिक होगा ; अपनी स्वर्णिम इतिहास एवं पूर्वजो की स्थली से जानी-जाने वाली बिहार हिंदी में अपना विशेष अदाकार निभाती है ।

बिहार ज्ञान , कला एवं वीरो की धरती रहा है तो साहित्यकारों , आध्यात्मिक गुरुओं एवं ऋषियों का गढ़ भी बिहार ही है । पौराणिक काल मे महर्षि वाल्मीकि जी ने ही बिहार की धरती पर रामायण रची थी तो मध्यकाल में कालिदास ने ही बिहार की धरती से सम्पूर्ण विश्व मे नाम कमाया था ; ऐसे कई नाम है जिनके साहित्य के कार्यो के बदौलत बिहार के नाम पूरी दुनिया भर में प्रसिद्ध है ; उन्ही में से कुछ के बारे में http://www.biharstory.in आपको बताएगा जिन्होंने हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया है :-

Ramdhari Singh Dinkar

1. रामधारी सिंह दिनकर :-

हिंदी के प्रसिद्ध कवियों में से एक , राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी का जन्म 23 सितम्बर 1908ई० में बिहार ले बेगूसराय के सिमरिया में एक सामान्य किसान परिवार में हुआ था । रामधारी सिंह दिनकर एक तेजस्वी राष्ट्रभक्ति से ओत-पोत समृद्ध कवि के रूप में जाने जाते है , उनके कविताओं में क्रांतिकारी श्रृंगार के भी प्रमाण देखने को मिलते है ।

    Ramdhari Singh Dinkar

दिनकर जी की पहली 3 काव्य संग्रह प्रमुख मानी जाती है जिसमे रेणुका 1935 में , हुंकार 1938 में , रश्मिरथी 1939 में । उनकी आरंभिक आत्ममंथन से यह काव्ययुग की संरचना है ; राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने हिंदी साहित्य में ना सिर्फ वीररस से काव्य प्रयोगशाला को एक ऊँचाई दी बल्कि अपनी रचनाओं के माध्यम से राष्ट्र-चेतना का भी मंथन किया ।

2. फणीश्वरनाथ रेणु :-

फणीश्वरनाथ रेणु जी का जन्म बिहार के पूर्णिया में 4 मार्च 1921 में हुआ , वे हमेशा ही समाज मे फैले शोषण एवं दमन के खिलाफ़ संघर्षरत रहे इसी को लेकर वे सोशलिस्ट पार्टी (Socialist Party) से जा जुड़े और राजनीति में अपनी सक्रिय भागीदारी दिखाई ; 1942 के “भारत छोड़ो आंदोलन” में सक्रिय रूप से भाग लिया एवं 1950 में नेपाली दमन सत्ताकारी में सस्सत क्रांति के सूत्रधार रहे ; 1954 में “मैला आँचल” उपन्यास प्रकाशित हुआ जिसके बाद हिंदी के कथाकार के रूप में उन्हें अभूतपूर्व प्रतिष्ठा मिली ; रेणु जी ने “जेपी आंदोलन” में भी सक्रिय भागीदारी निभाई और सत्ता द्वारा दमन के विरोध में पद्मश्री जैसे सम्मान का त्याग तक कर दिया था ; लिखने में माहिर फणीश्वरनाथ रेणु हिंदी आँचलिक लेखक में सर्वश्रेष्ट माने जाते है ।

रेणु जी की उपन्यास
लेख़क नागार्जुन

3. नागार्जुन :-

नागार्जुन हिंदी एवं मैथली के अग्रिम कवि में से एक माने जाते है ; कई भाषाओं के जानकार , प्रगतिशील विचारधारा के साहित्यकार ने हिंदी के अतिरिक्त मैथली , संस्कृत और बांग्ला में भी रचनाएँ की । “साहित्य अकादमी पुरस्कार” से सम्मानित नागार्जुन का असली नाम बैधनाथ मिश्र था और मैथली में उन्होंने जितनी भी रचनाएँ लिखी सभी यात्रिउपनाम से लिखी । नागार्जुन लगभग 68 साल से सन 1929 से 1997 तक रचन्तात्मिक कार्यो से जुड़े रहे । कविता – उपन्यास – कहानी – संस्मरण – यात्रावृत्तांत – निबंध – बाल साहित्य जैसे सभी तरह की विधाओं में उन्होंने अपनी क़लम चलाई है ; उनकी द्वारा लिखी गयी रचनाओं में से कुछ के नाम है युगधारा 1953 में , सतरंगी पंखों वाली 1959 में , प्यासी पथराई आँखे 1962 , रतिनाथ की चाची 1949 और बलचमना 1952 में ।

4. आरसी प्रसाद सिंह :-

मैथली और हिंदी के महाकवि आरसी प्रसाद सिंह यूप , रुवन एवं प्रेम की काव्य प्रयोगशाला में विख्यात है ; बिहार के चार नक्षत्रों में वियोगी के साथ प्रभात , दिनकर के साथ आरसी हमेशा ही याद किये जायेंगे । बिहार के समस्तीपुर ज़िले के एरोत गाँव मे 19 अगस्त 1911 में जन्में आरसी प्रसाद ने कई प्रकार की रचनाएँ की उनमें से “जीवन का झरना” सबसे लोकप्रिय रचना में से एक है ।

आरसी प्रसाद सिंह

इसके अलावा उनके द्वारा लिखी रचना में से कुछ है कागज की नाव , अनमोल वचन , माटिक दिप (मैथली काव्य) , पूजाक फूल (मैथली काव्य) , सूर्यमुखी (मैथली काव्य) जिसके लिए उन्हें 1949 में “साहित्य अकादमी पुरस्कार” भी मिला था ।

गोपाल सिंह नेपाली

5. गोपाल सिंह नेपाली :-

गोपाल सिंह नेपाली का जन्म 11 अगस्त 1911 को बिहार के बेतिया (पश्चिम चंपारण) में हुआ । गोपाल सिंह नेपाली कि काव्य प्रयोगशाला बचपन से ही दिखाई देने लगी थी ; गोपाल सिंह नेपाली को हिंदी गीतकारों में भी एक विशेष योगदान प्राप्त है इसीलिए उन्हें गीतों का राजकुमार भी कहा गया है उन्होंने हिंदी फ़िल्मो में लगभग 400 गीत लिखे है ।।

हिंदी 64 करोड़ लोगों की मातृभाषा, 24करोड़ लोगों की दूसरी भाषा और 42करोड़ लोगों की तीसरी,चौथी अथवा विदेशी भाषा है!
‘हिंदी दिवस’ की हार्दिक बधाई।

subham Gupta
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