जिसके भाले तलवारों से वो अकबर भी घबराता था वो शूरवीर वो अमर वीर वो महाराणा Maharana Pratap  कहलाता था | महाराणा प्रताप Maharana Pratap ऐसे योद्धा थे, जो कभी मुगलों के आगे नहीं झुके |  उनका संघर्ष इतिहास में अमर है। महाराणा प्रताप , उदय सिंह द्वितीय और महारानी जयवंता बाई के बेटे थे |9 मई 1540 को प्रताप का जन्म कुम्भलगढ़ किले में हुआ था |   इतिहासकारों के मुताबिक, महाराणा का परिवार भी काफी बड़ा था। प्रताप का जन्म हुआ और महाराणा उदयसिंह का भाग्योदय होने लगा…

Maharana Pratap

प्रताप को मिली थी कृष्ण के युद्ध कौशल जैसी ट्रेनिंग

प्रताप की मां जयवंता बाई खुद एक घुड़सवार थीं और उन्होंने अपने बेटे को भी दुनिया का बेहतरीन घुड़सवार और शूरवीर बनाया। वे कृष्ण भक्त थीं, इसलिए कृष्ण के युद्ध कौशल को भी प्रताप के जीवन में उतार दिया। उन्हें प्रशासनिक दक्षता सिखाई और रणनीतिकार बनाया।

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हल्दीघाटी के युद्ध को महासंग्राम कहा गया

अकबर और महाराणा प्रताप Maharana Pratap के बीच हुए हल्दीघाटी के युद्ध को महासंग्राम कहा गया | वजह ये कि महज 5 घंटे की लड़ाई में जो घटनाएं हुईं, अद्भुत थीं। इस युद्ध में महाराणा के एक वार से मुगल सैनिक और उसके घोड़े के दो टुकड़े हो गए थे।

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अबुल फजल ने कहा कि यहां जान सस्ती और इज्जत महंगी थी। इसी लड़ाई से मुगलों का अजेय होने का भ्रम टूटा था। मेवाड़ सेना में 3000 और मुगल सेना में 5000 सैनिक थे। फौजों से मरे 490 सैनिक। परिणाम भी ऐसा कि कोई हारा, जीता।

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खून इतना बहा कि जंग के मैदान को रक्त तलाई कहा

हल्दीघाटी में दोनों सेनाएं सामने हो गईं। घबराए मुगल सैनिक भागने लगे। मेवाड़ी सेना ने पीछा किया। खमनोर में दोनों फौजों की सभी टुकड़ियां आमने-सामने हो गईं। इतना खून बहा कि जंग के मैदान को रक्त तलाई कहा गया। देह जला देने वाली धूप और लू सैनिकों के मगज पिघला देने वाली थी।

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तलवार की वार ने मुहम्मद गोरी को नपुंसक बना दिया था

चारण रामा सांदू ने आंखों देखा हाल लिखा है कि प्रताप ने मानसिंह पर वार किया। वह झुककर बच गया, महावत मारा गया। बेकाबू हाथी को मानसिंह ने संभाल लिया। सबको भ्रम हुआ कि मानसिंह मर गया। दूसरे ही पल बहलोल खां पर प्रताप ने ऐसा वार किया कि सिर से घोड़े तक के दो टुकड़े कर दिए। युद्ध में प्रताप Maharana Pratap को बंदूक की गोली सहित आठ बड़े घाव लगे थे। तीर-तलवार की अनगिनत खरोंचें थीं। चेतक के घायल होने के बाद निकले प्रताप के घावों को कालोड़ा में मरहम मिला।

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208 किलो का वजन लेकर लड़ते थे प्रताप

महाराणा प्रताप का भाला 81 किलो वजन का था और उनके छाती का कवच 72 किलो का था। उनके भाला, कवच, ढाल और साथ में दो तलवारों का वजन मिलाकर 208 किलो था। महाराणा प्रताप का वजन 110 किलो… और लम्बाई 7 फीट 5 इंच थी | पर इस सबसे कई गुणा बड़ी इनकी हिम्मत थी जो किसी के भी सामने नहीं हारा | धन्य है वो धरती जिसने ऐसे महान सपूत को जन्म दिया। ….

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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