कृष्ण जन्माष्टमी के बाद देशभर में  तीज ( Teej festival Bihar ) का त्योहार मनाया जाता है | इस दिन महिलाएं 24 घंटे के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, और अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं | इस पावन  त्योहार को उत्तर प्रदेश (Uttarpradesh ), बिहार ( Bihar ),  झारखंड ( Jharkhand ), राजस्थान ( Rajsthan ) और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में बड़े जोरशोर से मनाया जाता है |

Teej festival in Bihar

16 श्रंगार करती हैं महिलाएं

तीज ( Teej festival Bihar ) के दिन महिलाएं मेहंदी लगाती है, नए कपड़े पहनती हैं |  इसके अलावा महिलाएं 16 श्रंगार करती हैं और पूजा में बैठती हैं | सोलह श्रंगार से ना सिर्फ महिलाए बेहद खूबसूरत दिखती हैं, बल्कि इस 16 श्रंगार का महत्व विज्ञान ने भी माना है |  विज्ञान का कहना है कि 16 श्रंगार करने से महिलाओं के मन, शरीर और सेहत पर सकारात्मक परिणामा देखने को मिले हैं |

Teej festival in Bihar

पौराणिक कथा

लिंग पुराण की एक कथा के अनुसार मां पार्वती ने अपने पूर्व जन्म में भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए हिमालय पर गंगा के तट पर अपनी बाल्यावस्था में अधोमुखी होकर घोर तप किया। इस दौरान उन्होंने अन्न का सेवन नहीं किया। काफी समय सूखे पत्ते चबाकर काटी और फिर कई वर्षों तक उन्होंने केवल हवा पीकर ही जीवन व्यतीत किया। माता पार्वती की यह स्थिति देखकर उनके पिता अत्यंत दुखी थे।

इसी दौरान एक दिन महर्षि नारद भगवान विष्णु की ओर से पार्वतीजी के विवाह का प्रस्ताव लेकर मां पार्वती के पिता के पास पहुंचे जिसे उन्होंने सहर्ष ही स्वीकार कर लिया। पिता ने जब मां पार्वती को उनके विवाह की बात बतलाई तो वे बहुत दु:खी हो गईं और जोर-जोर से विलाप करने लगीं।

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फिर एक सखी के पूछने पर माता ने उसे बताया कि वे यह कठोर व्रत भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कर रही हैं जबकि उनके पिता उनका विवाह विष्णु से कराना चाहते हैं। तब सहेली की सलाह पर माता पार्वती घने वन में चली गईं और वहां एक गुफा में जाकर भगवान शिव की आराधना में लीन हो गईं।

एक साधारण स्त्री की असाधारण बलिदान की कहानी

भाद्रपद तृतीया शुक्ल के दिन हस्त नक्षत्र को माता पार्वती ने रेत से शिवलिंग का निर्माण किया और भोलेनाथ की स्तुति में लीन होकर रात्रि जागरण किया। तब माता के इस कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और इच्छानुसार उनको अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया।

मान्यता है कि इस दिन जो महिलाएं विधि-विधानपूर्वक और पूर्ण निष्ठा से इस व्रत को करती हैं, वे अपने मन के अनुरूप पति को प्राप्त करती हैं। साथ ही यह पर्व दांपत्य जीवन में खुशी बरकरार रखने के उद्देश्य से भी मनाया जाता है।

Teej festival in Bihar

करवा चौथ से भी कठिन है तीज

उत्तर भारत ( Teej festival Bihar ) के कई राज्यों में इस दिन मेहंदी लगाने और झूला झूलने की प्रथा है। विशेषकर उत्तरप्रदेश के पूर्वांचल और बिहार में मनाया जाने वाला यह त्योहार करवा चौथ से भी कठिन माना जाता है, क्योंकि जहां करवा चौथ में चांद देखने के बाद व्रत तोड़ दिया जाता है, वहीं इस व्रत में पूरे दिन निर्जल व्रत किया जाता है और अगले दिन पूजन के पश्चात ही व्रत तोड़ा जाता है। इस व्रत से जुड़ी एक मान्यता यह है कि इस व्रत को करने वाली स्त्रियां पार्वतीजी के समान ही सुखपूर्वक पतिरमण करके शिवलोक को जाती हैं।

niraj kumar

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