एक वीरांगना जिसने युद्ध में मुहम्मद गोरी की गुदा फाड़ कर रख दिया था अपनी तलवार की एक ही वार से | ऐसे वीरांगना को तथाकथित इतिहासकारों ने भारत के इतिहास के पन्नो से हमेशा के लिए मिटा दिया था ! तो आइये पढ़ते हैं उस महान वीरांगना की कहानी 

Rani Nayiki Devi

नशा और हवस का दीवाना था मुहम्मद गोरी

ज़्यादातर लोगों को  पता होगा मुहम्मद गोरी को दो चीज़ की नशा थी एक खून की दूसरा हवस की | चुकी  मुहम्मद गोरी  एक हवसी दरिन्दा था और उसकी इसी  हवस की लत ने उसे नपुंसक बना दिया था | मुहम्मद गोरी ने गुजरात की रानी नायिकी देवी Rani Nayiki Devi की खूबसूरती के बारे में काफी कुछ सुन रखा था ।

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रानी नायिकी देवी Rani Nayiki Devi अपने नवजात शिशु भीमदेव सोलंकी को साथ लेकर गुजरात का राज चलाती थी। गुजरात राज्य के धन समृद्धि से परिपूर्ण एक वैभवशाली राज्य था। इतना सब सुनने के बाद नरपिशाच मुहम्मद गोरी खुद को रोक नहीं पाया और 65000  से73000 की बड़े पैमाने में जिहादी लूटेरो की सेना के साथ अन्हील्वारा गुजरात की राजधानी की और निकल पड़ा ।

कमाल की सूझ-बुझ का परिचय दिया रानी ने

रानी नायिकी देवी Rani Nayiki Devi को ज्ञात था की उनका मुकाबला किस दरिन्दे से होनेवाला हैं रानी नायिकी देवी ने रणनीति के तहत अपनी सेनाओ को तैयार किया | महारानी को मुहम्मद गोरी  ने सन्देश भेजा –“ रानी और उसके बच्चे को मुझे सौंप दो और तुम सभी अपनी अपनी महिलाओं एवं कन्याओं के साथ अपनी धन दौलत सब मुझे दे दो तो मैं तुम्हे बख्श दूंगा” ! सन्देश पाकर रानी घबरायी नहीं वह इसे सुन कर हंसी उसने अपने नवजात शिशु भीमदेव को अपने साथ बांध लिया और घोड़े पर सवार होकर निकल पड़ी । मुहम्मद गोरी के दूत को महारानी ने आदेश दिया बोली “जाओ जाकर गोरी से कह दो उनकी शर्तें मान लिया हैं हमने । गोरी का दूत गोरी के पास आकर जैसे ही खुशखबरी सुनाता है की उनकी सारी  शर्ते मान ली गयी हैं गोरी ख़ुशी से पागल हो गया वह आसान जीत की जश्न मानाने लगा ।

Rani Nayiki Devi

साक्षात दुर्गा लग रही थी रानी

नरपिशाच गोरी ने अपने शिविर से बहार निकलकर सोलंकी के सैन्य शिविर की और देखने लगा तभी उसे नज़र आया कोई घोड़े पर सवार होकर उसके सैन्य शिविर की और आ रहा है। धुल उड़ना जैसे ही बंद हुआ और घुड़सवार हुए इंसान जैसे जैसे नज़दीक आते गए वह देखा की एक खुबसूरत महिला अपने बच्चे को अपने साथ बांधकर उसकी और आ रही हैं । अचानक से रानी नायिकी देवी की घोड़े की कदम रुक गई मुहम्मद गोरी असमंजस में रह गया अचानक रानी की घोड़े की कदम रुकते देख इससे पहले की वह कुछ समझ पाता उसने देखा उसके शिविरों की और हाथी एवं घोड़े के साथ रानी नायिकी देवी की सेनाओं का सैलाब आ रहा हैं रानी की सैन्य का सैलाब रेगिस्तानी इलाके को घेर लिया था इससे पहले की गोरी वासना के स्वप्न से बहार निकलकर युद्ध के लिए तैयार होता तीन तरफ़ से वह और उसकी शिविर को घेर लिया गया था ।

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मुहम्मद गोरी ने कहा “हिन्दू कैसे इतना तेजी से हमला कर सकता हैं । गोरी के पास अब कुछ समझने का वक़्त नहीं था वह घोड़े पे चढ़कर अपने शिविर के अन्दर आया । गुजरात के वीर राजपूतो ने एक के बाद एक जिहादी सुवरो को काटते रहे रानी नायिकी देवी के सेनापति ने मुगलो को बताया की क्यों भारतवर्ष को शेरो की धरती कहा जाता हैं। गोरी के पास केवल एक रास्ता बचा था अपनी जान बचाकर भागने का ।

Rani Nayiki Devi

जान बचा कर भागने लगा मुहम्मद गोरी

रानी नायिकी देवी के दोनों हाथो में तलवार थी साक्षात् दुर्गा बन अवतारित हुयी रानी नायिकी देवी जी ने एक के बाद एक अनगिनत जिहादी आक्रमणकारियों की सर धर से अलग करती गई जो हाथ उसकी और बढ़ रहा था वह सारे हाथ एक के बाद एक काटते गये अब गोरी की और बढ़ी जिहादी गोरी का दमन करने के लिये । गोरी रानी नायिकी देवी एक झलक पाने के ही डर के भागने लगा । रानी नायिकी देवी उसके लिए साक्षात् मृत्यु की स्वरुप बन गई थी वह तेज़ी से घोड़े की पीठ में आगे की ओर झुक कर भागने लगा रानी ने एक तलवार फेंककर पीठ दिखा कर भागते हुए गोरी पर हमला किया

रानी नायिकी देवी की तलवार का वार  घोड़े की पीठ पर झुके गोरी की पीठ पर पडा, इस वार से गोरी की जान तो बच गई परन्तु तलवार की वार गुदा को चितरे हुए आगे तक निकल गई जिससे उसका पीछे का हिस्सा हड्डी के साथ बाहर निकल गया था इससे पहले की रानी नायिकी देवी दूसरा हमला करती, गोरी के ५०० जिहादीयों ने रानी नायिकी देवी को घेर लिया और गोरी बच कर भाग निकला ।

Rani Nayiki Devi

अगले तरह वर्षों तक भारत की तरफ पलट कर नहीं देखा

मुहम्मद गोरी महारानी का रौद्र रूप देख इतना डर गया कि  घाव से खून बहने के बाद भी वह घोड़े से नहीं उतरा वह मुल्तान लौट कर घोड़े से उतरा । गोरी ने अपने सैनिको को हुकुम दिया कि उसका घोड़ा किसी हाल पे नहीं रुकना चाहिए उसे नींद आजाये या कितनी भी इलाज की ज़रूरत पड़ जाए पर घोड़ा मुल्तान गंतव्य पहुँच के ही रुकना चाहिए । जब गोरी मुल्तान पहुंचा तो वह पूरी तरह से खून से लतपथ था उसे पता चला की वह अपने आगे का (गुप्तांग) और पीछे गुदा हमेशा के लिए खो चूका था वह हमेसा के लिए नपुंसक बन गया था वह रानी नायिकी देवी की तलवार की एक ही वार से । अगले तेरह वर्षो तक भारतवर्ष पर गोरी ने आक्रमण नहीं कर सका था।

रानी नायिकी देवी जैसी वीरता की मूर्ति यह साबित करती हैं की भारत में स्थायी रूप से इस्लामिक शासन कोई नहीं स्थापित कर पाया था ऐतिहासिक नक्शे कासिम से लेकर औरंगजेब तक के शासन  काल तक का सब धोखा हैं अप्रमाणित हैं ।

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
niraj kumar