भूख का कोई धर्म नहीं होता, और न हीं किसी भूखे को रोटी पर किसी धर्म का ठप्पा नजर आता है | उसे तो बस किसी तरह अपनी भूख मिटानी होती है |  किसी गरीब व् लाचार के भूख का दर्द वही समझ सकता है, जिसने भूख का एहसास किया हो | भले आज हमारा देश विकासशील देश से विकसित देश बनने का दम्भ भर रहा है, पूरी दुनिया में भारत अपनी साख बना रहा है, पर ये भी सच है की हमारे देश में लाखों लोग आज भी भोजन व् पैसे के आभाव में भूखे सोने के लिए मजबूर है | इस लाचारी के साथ जीने को अभ्यस्त इन गरीबों व् लाचारों के दर्द को समझने वाले तो बहुत हैं पर इनके लिए क्रन्तिकारी पहल करने वाले बिरले हीं हैं |

भूख के खिलाफ इन युवाओं की अनोखी पहल

तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का तमगा टांगे भारत में भूख बड़ी समस्या है |  विकास के तमाम दावों के बीच भूख से होने वाली मौतें रुकी नहीं है |  सुखद एहसास तब होता है जब देश के युवा अंतहीन भूख को मिटाने का दृढ़ निश्चय करते हैं | भारत की राजधानी नई दिल्ली से कुछ किलोमीटर दूर गुरुग्राम की एक निर्माणाधीन इमारत में 8 साल के विनय को अभी-अभी ताजा खाना मिला है |  विनय के माता-पिता इसी निर्माणाधीन इमारत में मजदूरी करते हैं, विनय का बचपन सीमेंट, रेत और लोहे की सरियों के बीच गुजर रहा है, विनय के माता-पिता इतना नहीं कमा पाते कि तीन वक्त भरपेट भोजन कर सके |  गर्म, स्वादिष्ट और पोषण से भरपूर भोजन देख विनय बेहद खुश हैं, उसकी खुशी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वो खाना देने वालों को देख-देख मुस्कुरा रहा है |

फीडऑन के जरिये मुहैया कराते हैं भोजन

फीडऑन ऐसे लोगों तक खाना पहुंचाता है जिनके पास पौष्टिक खाने का विकल्प नहीं होता |  स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के स्वाद को देखते हुए उन्हें पिज्जा और बर्गर भी दिया जाता है जिससे वो काफी खुश होते हैं |  गुरुग्राम से शुरू हुई दो स्कूली छात्रों की ये मुहिम अब दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद तक पहुंच गई है |  खास बात ये है कि इस मुहिम के साथ ज्यादातर स्कूली बच्चे जुड़े हैं |

100 से भी अधिक लोग हैं फीडऑन  की टीम में

गुरुग्राम में फीडऑन के 100 करीब वॉलंटियर हैं और हफ्ते में एक बार खाना मुहैया कराते हैं |  फीडऑन के सह संस्थापक अर्जुन बताते हैं, “जब हम किसी स्कूल, अनाथालय, निर्माण क्षेत्र या झुग्गी बस्ती में जाते हैं तो वहां खाना पाकर लोग बहुत खुश होते हैं, ताजा और स्वादिष्ट खाना खाकर लोग हमारी सराहना भी करते हैं, खासकर बच्चों में उत्सुकता देखते ही बनती है |  जब हम झुग्गी बस्ती में जाते हैं तो लोग खाने के पैकेट के लिए झपटते हैं, और हमें तब एहसास होता है कि अच्छा भोजन सिर्फ हमें ही नहीं बल्कि सबको पसंद हैं और ये उनका भी अधिकार है.”

वहीं फीडऑन के बारे में जानने के बाद कई लोग जन्मदिन के मौके और शादी की सालगिरह पर इससे जुड़ कर रेस्तरां का खाना लागत मूल्य पर खरीद कर जरूरतमंद लोगों को देते हैं |  अर्जुन और जेसी बताते हैं कि वो फीडऑन को ज्यादा टिकाऊ मॉडल बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा भूखे लोगों तक भोजना पहुंचाया जा सके |

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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