जीरादेई भारत के बिहार प्रान्त में सीवान जिले में स्थित एक छोटा गाँव है जो भारत के पहले राष्ट्रपति डाक्टर राजेन्द्र प्रसाद की जन्मस्थली होने के कारण जाना जाता है। जीरादेई आज भी अपने मूल संस्कार के बहुत करीब है।

आज भी आधुनिकता से परे है यह गांव

जब डॉ राजेन्द्र प्रसाद राष्ट्रपति बने तब गोवेर्मेंट ने उनसे पूछा की हम आपके गाँव के लिए क्या कर सकते है, वह हम कोई मिल लगा दे या कोई कारखाना लगा दे ताकि गांव का विकास सके। तब उनके गांव के लोग उनके पास आये और बोले की हम लोग नहीं चाहते है की कोई कारखान लगाया जाये , क्यों की अगर ऐसा हुआ तो हमारी जमीन सरकार के पास चली जायेगी और हम लोग ऐसा नहीं चाहते। तब डॉ राजेंद्र प्रसाद ने उनकी बात मानते हुए प्रेजिडेंट आर्डर निकला गया की कोई भी जमीनी अधिकरण नहीं किया जाएगा। आज यहाँ बिजली, पानी और सड़क हैं पर कोई कारखाना नहीं है। इस वजह से यहाँ की खूबसूरती बनी हुई है |

चप्पेचप्पे में है ऐतिहासिकता :

यह जगह ऐतिहासिक रहा है। इसके जर्रे-जर्रे में ऐतिहासिकता भरी हुई है। खासकर यह पूरा इलाका भगवान बुद्ध से जुड़ा हुआ है।  आधुनिक काल में पुरातत्वविद डब्ल्यू होल 1899 में जीरादेई के पतौर पहुंचा था। पतौर में वह तीन साल रहा था। उसने सबसे पहले बताया कि यह क्षेत्र भगवान बुद्ध से जुड़ा है। उसने बताया कि लौरिया के अंगार स्तूप से 12 योजन की दूरी पर कुशीनारा है। कुशीनारा से 12 योजन की दूरी पर जीरादेई का इलाका है। इस आधार पर उसने इस जगह को भगवान बुद्ध की ऐतिहासिकता से जोड़ा।

भगवान बुद्ध को निर्वाण की प्राप्ति

कहा जाता है कि जीरादेई में ही भगवान बुद्ध को निर्वाण की प्राप्ति हुई थी। हालांकि यह स्थल भगवान बुद्ध से भी जुड़ा है। तीन हजार साल से भी अधिक समय का इसका इतिहास रहा है। जीरादेई के मुईयांगढ़, तितरा और भरथईगढ़ में जो पुरातात्विक साक्ष्य मिले हैं उससे पता चलता है कि यह इलाका कभी बौद्ध विहारों के लिए जाना जाता होगा। यहां के टीले देखने में स्तूप जैसे लगते हैं। टीलों की जो थोड़ी बहुत खुदाई हुई है उसमें कई मृदभांड, मृणमूर्तियां मिली हैं।