सामाजिक जीवन का ताना-बाना पुरुष और स्त्री के बीच हीं सिमटा रहता है पर इन के अलावा  तीसरा जेंडर भी हमारे समाज का हिस्सा है, लेकिन  इसकी पहचान कुछ ऐसी है जिसे सभ्य समाज में अच्छी नज़र से नहीं देखा जाता | समाज के इस वर्ग को थर्ड जेंडर, किन्नर या हिजड़े के नाम से जाना जाता है |भारत ही नहीं, पूरे दक्षिण विश्व में इनके दिल की बात और आवाज़ कोई सुनना नहीं चाहता क्योंकि पूरे समाज के लिए इन्हें एक बदनुमा दाग़ समझा जाता है और लोगों के लिए ये सिर्फ़ हंसी व् मनोरंजन के पात्र हैं |

खुद भी ट्रांसजेंडर हैं रेशमा प्रसाद

बिहार की रेशमा प्रसाद  ट्रांसजेंडर हैं और ‘दोस्ताना सफर’ संगठन के जरिए ट्रांसजेंडर समुदाय की बेहतरी के लिए काम करती हैं |  रेशमा प्रसाद कमजोर बेसहारा दबे कुचली महिलाओं एवं किन्नरों के हक़ के लिए सदैव उपलब्ध रहती हैं साथ हीं   लड़कियों की शिक्षा और बेटियों की गर्भ में हत्या न हो इसके लिए वो गरीबों की बस्तियों में अक्सर कार्यक्रम करतीं रहतीं हैं

ट्रांसजेंडर के प्रति सामाजिक सोच में कुछ बदलाव आया है?

भले आज हमारी सोंच आधुनिक हो गई है, पर किन्नरों के समाज में स्थिति के प्रति कोई बदलाव नहीं आया है | आज भी स्थिति जस के तस है जो पहले थी | आज भी किन्नर  सड़क पर कहीं भी दख जाते हैं तो लोग पीछे से गालियां देते हैं, मजाक उड़ाते हैं  | समाज में बदलाव तो तब होगा जब लोग अपने बीच में इन्हे भी  जगह देंगे |  रोजगार के मौके मिलेंगे तो समाज के बीच इनकी समाजिक अंत:क्रिया बढ़ेगी, इनकी स्वीकार्यता भी बढ़ेगी | लेकिन ये सब बाते दूर के ढोल की तरह हीं हैं |

ट्रांसजेंडरों के कल्याणार्थ शुरू की ‘नाच बाजा डॉट कॉम’

दो साल पहले बिहार के उद्योग विभाग ने पटना की ट्रांसजेंडर रेशमा प्रसाद के एनजीओ ‘दोस्ताना सफर’ को ‘नाच बाजा डॉट कॉम’ नाम से अपना स्टार्टअप चलाने के लिए 10 लाख रुपए का अनुदान दिया था। अब इस वेबसाइट के माध्यम से देशभर के लोग अपने यहां शादी-ब्याह, जन्मदिन, गोद भराई आदि घरेलू उत्सवों के लिए ट्रांसजेंडर समुदाय से सीधे संपर्क कर एप के जरिये ऑनलाइन बुकिंग कर लेते हैं। प्रोग्राम से मिलने वाली राशि में से सौ रुपए ‘नाच बाजा डॉट कॉम’ चलाने के लिए दे दिए जाते हैं। पिछले साल दिल्ली में आयोजित स्टार्टअप एक्सपो के 400 स्टॉलों के बीच रेशमा का स्टार्टअप भी निवेशकों को हैरत में डालता रहा। रेशमा का दावा है कि यह देश का पहला यूनिक ट्रांसजेंडर स्टार्टअप है।

नाच बाजा डॉट कॉम देश का पहला ट्रांसजेंडर स्टार्टअप

यूनिक बिजनेस मॉडल वाला रेशमा का ‘नाच बाजा डॉट कॉम’ ट्रांसजेंडर समुदाय को अपनी कलाओं के प्रदर्शन के माध्यम से सम्मानजनक जीवन में सहायक बन रहा है। वह इस स्टार्टअप के माध्यम से विदेशों तक अपने समुदाय के लोगों के साथ इस तरह के बिजनेस अनुभव साझा करना चाहती हैं। इस समय इससे बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली सहित दक्षिणी राज्यों के अच्छे शास्त्रीय गायक, नृत्यांगना से लेकर वाद्य यंत्र बजाने वाले हजारों कुशल ट्रांसजेंडर जुड़ चुके हैं। इसके माध्यम से उन्हे सैकड़ों उत्सवों तक सीधे पहुंच जाने का अवसर मिल रहा है। यह भी एक यूनिक कोशिश मानी जा सकती है जो समाज में हेय समझने वाले ट्रांसजेंडर समुदाय को सम्मानजनक जीवन देने में सहायक बन रहा है