जहां आज आधुनिक जीवन शैली में स्मार्ट फोन की दुनिया में हीं लोग व्यस्त रहते हैं, और स्वयं को मॉडर्न और सुशिक्षित कहने वाले लोग वृद्धजनों की सेवा करना तो दूर की बात है, उन्हें उपेक्षित करके वृद्धाश्रमों में धकेलने में भी परहेज नहीं करते |  ऐसे में जब कोई बेटा अपने वृद्ध माता-पिता के लिये कोई भी श्रेष्ठ कार्य करता है, तो हमें उसे ‘आधुनिक श्रवण कुमार’ का टैग देने में कोई गुरेज़ नहीं करना चाहिये। बेटों के लिये ऐसा ही प्रेरणादायी काम कर रहे हैं कर्नाटक के मैसूर में रहने वाले 40 साल के इंजीनियर डॉ. कृष्ण कुमार, जो अपनी बूढ़ी माँ को पुरानी चेतक स्कूटर पर देश के तीर्थ स्थानों के दर्शन कराने निकले हैं।

वर्ष 2018 को मैसूर से हुई थी मातृ सेवा संकल्प यात्रा की शुरुवात

कर्नाटक के मैसूर में रहने वाले डॉक्टर कृष्णा कुमार मातृ सेवा की संकल्प यात्रा पर हैं। स्कूटर पर बिठाकर वे अपनी 70 साल की मां को देश-दुनिया का सफर करा रहे हैं। पिछले डेढ़ साल में वे मां को देशभर के 17 तीर्थ स्थानों के दर्शन करवा चुके हैं। वे स्कूटर से नेपाल और भूटान भी जा चुके हैं। हाल ही में वे असम के तिनसुकिया पहुंचे। ” उनकी मातृ सेवा संकल्प 16 जनवरी 2018 को मैसूर से शुरू की थी।

21वीं सदी का श्रवण कुमार

अब तक 48 हजार किलोमीटर से ज्यादा का सफर कर चुके  डॉ. कृष्णा कुमार सबसे पहले वे कर्नाटक से केरल गए। फिर उन्होंने तमिलनाडु, पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, गोवा, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और बिहार तक की यात्रा की।”इन राज्यों के तीर्थ स्थलों और धार्मिक स्थलों के दर्शन भी करवाए। अब वे अरुणाचल प्रदेश के परशुराम कुंड की तरफ यात्रा करने जा रहे हैं। वहीं, मां के प्रति इस प्रेम को देख लोग उन्हें 21वीं सदी का श्रवण कुमार कहने लगे हैं। मां चूड़ारत्न बताती हैं कि मैं कृष्ण जैसा बेटा पाकर खुश हूं। जब से मेरे पति का निधन हुआ है, तब से वह मेरी देखभाल कर रहा है। इतना ही नहीं वह मेरी हर छोटी से छोटी ख्वाहिश को पूरा करता है। तीर्थयात्रा की ख्वाहिश पूरी करने के लिए वह मुझे स्कूटर से घुमा रहा है।

अपनी नौकरी से इस्तीफा दे करा रहे हैं माँ को तीर्थाटन

जब कृष्णा कुमार के मां ने हंपी देखने की इच्छा जताई तो बेटे कृष्ण कुमार ने कभी घर की चौकट से बाहर नहीं गई अपनी मां को देशभर की यात्री कराने का निर्णय लिया। इसके तुरंत बाद उसने नौकरी से इस्तीफा दिया और अपनी 20 साल पुरानी बजाज स्कूटर पर मां को यात्रा करवाई।  मैसूर में अकेली रह रही अपनी मां की इच्छा पूरी करने के लिए उन्होंने कितनी भी दूर जाने के फैसला किया। उन्होंने बताया कि उन्हें लगा कि अकेली उनकी मां अपने एकलौते बेटे के साथ बेहतर जीवन बिताने का अधिकार है और जीवन में उन्हें अपनी कुर्बानियों के लिए सम्मानजनक जीवन बिताने की जरूरत है। सालों तक घर की रसोई तक ही सीमित रही अपनी मां को अब पूरे देश में तीर्थयात्रा कराने का फैसला किया है।