जैसे हमारा देश बड़ा हैं ठीक उसी तरह भारतीय समाज में फैली कुरीतियां भी अभी बहुत है | और जब तक हम इससे निजाद नहीं पाएंगे तब तक  एक सभ्य समाज का निर्माण भारत के लिए दिवा स्वप्न की तरह है | इसमें जितनी जिम्मेवारी सरकार की है उससे कहीं ज्यादा हमारी भी होनी चाहिए | समाज  घुली कुरीतियों के खिलाफ अपनी जिम्मेदारी का बहुत बेहतर तरीके से निर्वाह कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के दो दोस्त विनय और आशीष, जो समाज में फैले कुरीतियों के खिलाफ नुक्कड़-नाटक कर लोगों  जागरूक करते हैं

नाटकों के जरिए कर रहे हैं जन आंदोलन

उत्तर प्रदेश के एटा जिले के गांव नगला राजा के विनय कुमार और इलाहाबाद के आशीष श्रीवास्तव नाटकों के जरिए जन आंदोलन कर रहे हैं। इसके लिए वे राज्य के अलग-अलग जिलों और गांवों में जा-जाकर नुक्कड़ नाटक के जरिए लोगों को जागरूक करते हैं। यानी वे गली-गली जाकर अपने नुक्कड़ नाटकों के जरिए लोगों में कुपोषण को लेकर जागरूकता पैदा करते हैं।

क्या होता है नुक्कड़ नाटक

नुक्कड़ नाटक एक ऐसी नाट्य विधा है, जो परंपरागत रंगमंचीय नाटकों से भिन्न है। यह रंगमंच पर नहीं खेला जाता तथा आमतौर पर इसकी रचना किसी एक लेखक द्वारा नहीं की जाती, बल्कि सामाजिक परिस्थितियों और संदर्भों से उपजे विषयों को इनके द्वारा उठा लिया जाता है। जैसा कि नाम से जाहिर है इसे किसी सड़क, गली, चौराहे या किसी संस्थान के गेट अथवा किसी भी सार्वजनिक स्थल पर खेला जाता है। इसकी तुलना सड़क के किनारे मजमा लगा कर तमाशा दिखाने वाले मदारी के खेल से भी की जा सकती है। अंतर यह है कि यह मजमा बुद्धिजीवियों द्वारा किसी उद्देश्य को सामने रख कर लगाया जाता है।

कुम्भ मेले में भी कर चुके  जागरूक

विनय और आशीष उत्तर प्रदेश में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक उत्सवों जैसे इलाहाबाद के कुंभ मेले और बलिया के ददरी मेले में नुक्कड़ नाटकों की मैराथन चला चुके हैं, जिनसे इन मेलों में आने वाले लाखों लोगों को जागरूक किया गया है। ऐसे आयोजनों में लाखों लोगों की भीड़ के बीच उनकी टीम दिन-रात नुक्कड़ नाटकों और नुक्कड़ सभाओं के जरिए पोषण का संदेश देती है।

बना चुके हैं लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड

 

हाल ही में उन्होंने महाकुंभ मेले में एक दिन में सबसे ज्यादा नुक्कड़ नाटक करने का लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने स्वस्थ भारत प्रेरकों की टीम के साथ मिलकर 24 घंटे में 100 नुक्कड़ नाटक किए और इसके जरिए वे 1 लाख से अधिक लोगों तक सीधे अपना संदेश पहुंचाने में सफल रहे। इस नाटक को विनय ने आसान भाषा में लिखा और आशीष ने स्वस्थ भारत प्रेरकों की टीम को तैयार करवाया था। इसी कुंभ में उनकी टीम ने 30 हजार से अधिक लोगों को कुपोषण से लड़ने के लिए शपथ दिलाते हुए हस्ताक्षर अभियान भी चलाया।

 

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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