भारत का कोई भी राज्य हो वो अपनी संस्कृति के अलावा अपने खान पान के नाम पर भी जाना जाता है |  ऐसे में हमारा बिहार भला क्यों पीछे रहेगा हर क्षेत्र में  दुनिया भर में पहचान बनाने वाले बिहार के लोग खाने बेहद शौक़ीन होते हैं | बिहार प्रदेश में ऐसे कई लज़ीज व्यंजन हैं, जो स्वाद के मुरीदों का दिल जीतने का दम रखते हैं। तो आइए,चलते हैं जिंदगी के भागदौड़ के  शोर-गुल  से दूर बिहारी स्वाद की उस दुनिया में, जहां सब पर भारी दाल-भात तरकारी भी है तो हर दिल अजीज लिट्ठी-चोखा भी | तो बिना देर किये शुरू करते हैं चर्चा दिलकश बिहारी व्यंजनों की

लिट्टी चोखा

भले आज दुनिया पिज्जा बर्गर और चाइनीज डिश की दीवानी हो पर एक खांटी बिहारी के दिल में आज भी लिट्टी-चोखा हीं बसता है | बिहार के हर चौक चौराहे पर कोई चीज मिले या न मिले पर लिट्टी-चोखा का स्टाल जरूर दिख जायेगा | स्वाद और सेहत से भरपूर लिट्टी-चोखा बिहार का इकलौता डिश है जिसने बिहार की सिमा पार कर देश दुनिया को अपने स्वाद का दीवाना बनाया है | वैसे तो यह हर मौसम में खाने वाला व्यंजन है पर जाड़े के मौसम में कुछ ज्यादा हीं पसंद किया जाता है लिट्टी और चोखा

दाल भात चोखा सब्जी अचार

एक बिहारी कहावत है सबपर भारी दाल-भात तरकारी और ये कहावत बिलकुल सही भी है क्योंकि 99% बिहारियों के रसोई घर में इसी का कब्ज़ा है | यह भोजन खास कर वैसे युवा जो अपने घर से दूर जा कर पढाई करते हैं उनके बीच यह डी बी सी के नाम से भी मशहूर है | दाल भात चोखा सब्जी की सबसे खास बात यह है की यह भोजन हर दिन सब के थाली में मौजूद रहता है फिर भी  इस भोजन से कोई ऊबता नहीं है अगर दो दिन भी लगातार कोई दूसरा भोजन खाना पड़े तो तीसरे दिन सपने में भी दाल भात चोखा सब्जी अचार हीं दिखाई देगा |

पिट्ठा

पिट्ठा को बिहारी मोमो कहा जाये तो ये गलत नहीं होगा पिट्ठा इस वजह से भी ब्रांड है क्योंकि यह नयी फसल का पकवान है. ऐसा पकवान जो हर घर में पौष या पूस का महीना आते ही जरूर बनता है. पूस का महीना आते ही बिहार के तकरीबन हर घर में पिट्ठा के बनने के बारे में सवाल शुरू हो जाते हैं. पूस आ गया है पिट्ठा नहीं बनेगा? इसका कारण भी पर्याप्त है |

क्योकि पिट्ठा किसी एक फ्लेवर में नहीं बल्कि कई फ्लेवर में तैयार होता है | अगर किसी को नमकीन पसंद है तो आलू के चोखा,चने के दाल और उबले हुए मटर को भर कर तैयार किया जाता है या फिर मीठा खाने वालों के लिए मावे, तीसी और गुड़, तथा भुने हुए बादाम और चीनी या गुड़ के मिश्रण को भर कर तैयार किया जाता है |

खिचड़ी चोखा

खिचड़ी को बिहार का स्टेपल फूड कहा जाए तो गलत नहीं होगा। सैकड़ों सालों से खिचड़ी बिहार के अलावा देश के लगभग हर हिस्से में खाई जा रही है। मकर संक्रांति का त्योहार तो खासतौर पर खिचड़ी के लिए ही जाना जाता है। कहते हैं खिचड़ी के चार यार दही, पापड़, घी, अचार। यानी खिचड़ी खाते समय दही, पापड़, घी और अचार साथ में होना जरूरी है | शनिवार के दिन  गांव हीं नहीं बल्कि शहरों में भी लगभग हर घर में पकाया जाता है खिचड़ी और लोग शौक से इसे खाते भी हैं

कचौड़ी घुघनी

इसमें कोई दो राय नहीं है की खस्ता कचौड़ी और चने की घुघनी बिहार के सबसे पसंदीदा नास्ते में शामिल है आज भाग-दौड़ के जिंदगी में लगभग 50% बिहारियों का नास्ता रोड के किनारे बिकने वाला कचौड़ी घुघनी हीं होता है | और भला हो भी क्यों नहीं कम पैसे में इतना बढ़िया नास्ता कोई हो हीं नहीं सकता | महज 10-15 रूपए की मिलने वाली कचौड़ी घुघनी हर उम्र के बिहारियों का पसंदीदा नास्ता है

बिहारी साग-भात

शायद हीं कोई बिहारी होगा जो चने और खेसारी के साग का दीवाना न हो, खास कर महिलाओं  की साग के प्रति दीवानगी देखते बनती है दिसंबर और जनवरी में साग भात उनके सबसे पसंदीदा भोजनों में से एक होता है, अगर उसमे घी मिल जाये तो सोने पे सुहागा |चना और खेसारी के हरे भरे खेत जिस तरह हरियाली का अहसास कराते हैं ठीक उसी तरह थाली में इसकी मौजूदगी खाने के जायके को कई गुणा बढ़ा देती है दिसंबर और जनवरी में अगर आप बिहार  के गाँव, खास कर दियारा क्षेत्र में जायेगें तो  आप को गाँव के हर गली में खेसारी और चना साग  की खुशबु हवा में घुली मिलेगी |

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niraj kumar
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