बिहार प्राचीन काल से हीं समृद्ध संस्कृति वाला राज्य रहा है। रामायण काल से लेकर महाभारत तक में बिहार का जिक्र आया है, तो जाहिर सी बात है की बिहार में बहुत सारे प्राचीन मंदिर भी होंगे | आज हम इसी विषय पर बात करेंगे और जानेंगे बिहार के दस पौराणिक एवं प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में

बिहार का मुंडेश्वरी देवी मंदिर

बिहार का मुंडेश्वरी देवी मंदिर, दुनिया के सबसे प्राचीन कार्यशील मंदिरों में से एक है। यह बिहार के कैमूर जिले के कौरा क्षेत्र में स्थापित है। यह प्राचीन मंदिर भगवान शिव जी और देवी शक्ति को समर्पित है।यहाँ स्थापित देवी मुंडेश्वरी के दस हाथ हैं जिनमें उन्होंने शक्ति के 10 प्रतीकों को थामा हुआ है और माँ भैंस पर सवार हैं।

गोपालगंज थावे वाली माँ

इसके बाद आपके ले चलते है गोपालगंज जिला जहां स्थित हैं माँ थावे वाली का मंदिर |  इस मंदिर की मान्यता है कि इस मंदिर में मां अपने भक्त रहषु के लिए असम के कामाख्या से थावे आईं और साक्षात दर्शन दिए,इसलिए इसे सिद्धपीठ भी माना जाता है।

माँ पटन देवी

बिहार की राजधानी पटना में स्थित पटन देवी मंदिर शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र माना जाता है |  देवी भागवत और तंत्र चूड़ामणि के अनुसार, सती की दाहिनी जांघ यहीं गिरी थी | सती के 51 शक्तिपीठों में प्रमुख इस उपासना स्थल में माता की तीन स्वरूपों वाली प्रतिमाएं विराजित हैं. इस मंदिर के पीछे एक बहुत बड़ा गड्ढा है, जिसे ‘पटनदेवी खंदा’ कहा जाता है | कहा जाता है कि यहीं से निकालकर देवी की तीन मूर्तियों को मंदिर में स्थापित किया गया था |  वैसे तो यहां मां के भक्तों की प्रतिदिन भारी भीड़ लगी रहती है, लेकिन नवरात्र के प्रारंभ होते ही इस मंदिर में भक्तों का तांता लग जाता है |

पटना स्टेशन स्थित हनुमान मंदिर,

उत्तर भारत के सबसे प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों में शुमार  पटना जंक्शन स्थित महावीर मंदिर में रामनवमी के दिन अयोध्या की हनुमानगढ़ी के बाद सबसे ज्यादा भीड़ उमड़ती है।  इस मंदिर में आकर शीश नवाने से भक्तों की मनोकामना पूर्ति होती है। इस मंदिर को हर दिन लगभग एक लाख रुपये की राशि विभिन्न मदों से प्राप्त होती है |  यह मंदिर बाकी हनुमान मंदिरो से कुछ अलग है, क्योंकि यहां बजरंग बली की युग्म मूर्तियां एक साथ हैं। एक मूर्ति परित्राणाय साधूनाम् अर्थात अच्छे लोगों के कारज पूर्ण करने वाली है और दूसरी मूर्ति- विनाशाय च दुष्कृताम्बु, अर्थात बुरे लोगों की बुराई दूर करने वाली है।बखोड़ा पुर काली माँ का  मंदिर

माँ काली बखोरापुर वाली’

अक्सर आप किसी वाहन के पीछे ‘जय माँ काली बखोरापुर वाली’ लिखा हुआ देखते हैं तो आप के मन में ये सवाल उठता होगा की आखिर बखोरापुर कहाँ है तथा वहाँ स्थित माँ काली का मंदिर कैसा है ? भोजपुर जिला के बड़हरा प्रखंड अंतर्गत बखोरापुर में है भव्य मां काली मंदिर। अपनी भव्यता व विस्तृत क्षेत्रफल में फैलाव के कारण यह मंदिर भक्तों व पर्यटकों को भाने लगी है। वहीं वर्ष में एक बार भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम के कारण भी लोगों के आकर्षण का केन्द्र बना।

देवार्क सूर्य मंदिर,

बिहार के औरंगाबाद जिले में देव नामक स्थान पर स्थित एक हिंदू मंदिर है जो देवता सूर्य को समर्पित है। यह अति प्राचीन सूर्य मंदिर अन्य सूर्य मंदिरों की तरह पूर्वाभिमुख न होकर पश्चिमाभिमुख है | यह मंदिर देवार्क सूर्य मंदिर या केवल देवार्क के नाम से भी प्रसिद्ध | यह मंदिर अपनी अनूठी शिल्पकला के लिए भी जाना जाता है। पत्थरों को तराश कर बनाए गए इस मंदिर की नक्काशी उत्कृष्ट शिल्प कला का बेजोड़ नमूना है। यहाँ स्थित शिलालेख से पता चलता है कि इस पौराणिक मंदिर का निर्माण एक लाख पचास हजार सात वर्ष पूरा हुआ। पुरातत्वविद इस मंदिर का निर्माण काल आठवीं-नौवीं सदी के बीच का मानते हैं।

हरिहरनाथ मंदिर

हम सभी को पता है की सोनपुर मिला एशिया का सबसे बड़ा मेला है पर शायद ये नहीं जानते की सोनपुर की धरती पर मेला अलावे भी कुछ है जो विश्व में इकलौता है जी हां सही पहचाने | इस धरती पर बाबा हरिहर नाथ मंदिर में स्थित शिवलिंग विश्व में अनूठा है। यह इकलौता शिवलिंग हैं जिसके आधे भाग में शिव और शेष में विष्णु की आकृति है। मान्यता है कि इसकी स्थापना 14,000 वर्ष पहले भगवान ब्रह्मा ने शैव और वैष्णव संप्रदाय को एक-दूसरे के नजदीक लाने के लिए की थी। इसके साथ ही संगम किनारे स्थित दक्षिणेश्वर काली की मूर्ति में शुंग काल का स्तंभ है। कुछ मूर्तियां तो गुप्त और पाल काल की भी हैं।

। मंदिर के मुख्य पुजारी सुनील चंद्र शास्त्री का कहना है कि कार्तिक एकादशी से पूर्णिमा तक गंगा-गंडक संगम में स्नान और बाबा हरिहरनाथ पर जलाभिषेक का विशेष महत्व है। आज भी नेपाल, असम, उत्तराखंड आदि से हजारों की संख्या में संत आते हैं।

बाबा गरीब नाथ मंदिर

बाबा गरीब नाथ मंदिर लीचियों के शहर मुजफ्फरपुर के दिल में स्थित है, बाबा गरीबनाथ मंदिर मुजफ्फरपुर के दर्शनीय स्थल मे सबसे लोकप्रिय आकर्षणों में से एक है। यहां भगवान शिव की मूर्ति बाबा गरीबनाथ के रूप में मंदिर में स्थापित है, और स्थानीय किंवदंतियों के अनुसार, और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बाबा गरीबनाथ धाम का तीन सौ साल पुराना इतिहास रहा है। लेकिन मिले दस्तावेज के अनुसार 1812 ई. में इस स्थान पर छोटे मंदिर में बाबा की पूजा-अर्चना होती रही थी। मुजफ्फरपुर के गरीब नाथ मंदिर में हर साल सावन में लाखो श्रद्धालु कावड़ ले के आते है! बाबा के भक्त सोनपुर के पास पहलेजा घाट से दक्षिण वाहिनी गंगा का पवित्र गंगा जल लेकर सोनपुर हाजीपुर के रास्ते 65 KM की यात्रा नंगे पाँव पूरी कर के बाबा को जल चढ़ाते है! यह बिहार की सबसे लम्बी दुरी की कावड़ यात्रा है!

जानकी मंदिर, सीतामढ़ी

सीतामढ़ी रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से लगभग 1.5 किमी दूर स्थित यह मंदिर माता  सीता का जन्म स्थान है। नवरात्रि और राम नवमी त्योहारों के दौरान हजारों में भक्त मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं  ऐसा माना जाता है कि यह मंदिर लगभग 100 साल पुराना है। मंदिर का बड़ा प्रवेश द्वार इस पवित्र स्थान पर आगंतुकों का गर्मजोशी से स्वागत करता है। भक्तों की एक बड़ी सभा को समायोजित करने के लिए अंदर एक विशाल आंगन है। यहां के लोगों का मानना है कि माता सीता आज भी यहां निवास करती हैं और अपने भक्तों की सहायता करती हैं।

आरा शहर की अधिष्ठात्री हैं आरण्य देवी, महाभारतकाल से हो रही पूजा

भोजपुर के जिलामुख्यालय का नामकरण जिस आरण्य देवी के नाम पर हुआ है वे इलाके के लोगों की आराध्य हैं। यह नगर की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती है। मंदिर तो बहुत पुराना नहीं है पर यहां प्राचीन काल से पूजा का वर्णन मिलता है। संवत् 2005 में स्थापित इस मंदिर के बारे में कई किदवंतियां प्रचलित हैं। इसका जुड़ाव महाभारतकाल से है। इसे भगवान राम के जनकपुर गमन के प्रसंग से भी जोड़ा जाता है।

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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