ये सच है की बिमारी किसी का जेब टटोल कर नहीं आती, क्या अमीर क्या गरीब हर कोई किसी न किसी बीमारी के चपेट में कभी भी आ सकता है पर कुछ जानलेवा बीमारियां ऐसी भी है, जिससे पार पाना हर किसी के लिए संभव नहीं है | सही जानकारी रहने पर इससे बचा जा सकता है | उन बिमारियों में एक नाम थैलेसीमिया का भी आता है | जो बेहद खर्चीला एवं लगभग लाईलाज है पर सही समय पर इसकी पहचान हो जाने से आप आने वाली पीढ़ी को इस जटिल बीमारी से बचा सकते हैं | इसी बीमारी के जांच और बचाव हेतु बिहार की राजधानी पटना में कल रविवार 23 फरवरी को माँ वैष्णो देवी सेवा समिति की ओर से थैलेसीमिया की जाँच एवं यथा संभव इलाज के लिए कैम्प  का आयोजन किया जा रहा है |

माँ वैष्णो देवी सेवा समिति की तरफ से थैलीसीमिया मरीजों के लिए सौगात

 रविवार,23 फरवरी को हर 15 से 20 दिनों में ब्लड ट्रांसफ्यूज़ करवाकर जिंदगी जीने के जिद वाले करीब 200 नन्हे थैलिसीमिया पीड़ित बच्चे उनके 560 सगे -भाई बहन और उनके 370 माता पिता के साथ होने वाले अभूतपूर्व और ऐतिहासिक HLA कैम्प  का आयोजन किया जा रहा है ,जहां कोई भी व्यक्ति अपनी जाँच निःशुल्क करा सकता है साथ हीं  थैलेसीमिया  से ग्रसित लोगों के लिए एच.एल.ए. मैच एवं बॉन मैरो ट्रांसप्लांट से पहले की प्रक्रिया भी होगी | बिहार में पहली बार आयोजित होने वाला यह कैम्प पूरी तरह से निःशुल्क है |

दिनांक -रविवार ,23 फरवरी 2020
समय -सुबह 8 बजे से 2 बजे तक

पता -प्रेस क्लब ग्राउंड
तारा नर्सिंग होम के नजदीक
बिस्कोमान भवन के पीछे
गांधी मैदान के नजदीक
पटना
थैलिसीमिया पीड़ित बच्चे और उनके परिवार के सदस्यों के लिए रहने और फ्रेश होने की व्यवस्था है | 
पता -द्वितीय तल्ला,शक्तिधाम मंदिर
प्रेस क्लब ग्राउंड के नजदीक
बिस्कोमान भवन के पीछे
गांधी मैदान के नजदीक
पटना

क्या है थैलसीमिया ?

थैलेसीमिया प्राण घातक और अनुवांशिक बिमारी है , एक ऐसा आनुवंशिक रक्त विकार रोग है जिसमें रोगी के शरीर में लाल रक्त कण तथा हीमोग्लोबिन की मात्रा सामान्य अवस्था से भी कम हो जाती है ।

वस्तुतः मानव शरीर में आक्सीजन का परिवहन तथा संचरण करने के लिए हीमोग्लोबिन नामक प्रोटीन की आवश्यकता पड़ती है और यदि यह न बने या सामान्य आवश्यकता से भी कम बने तो इस परिस्थिति में बच्चे को थैलेसीमिया रोग से ग्रसित होने की आशंका अधिक रहती है । जिसका चिकित्सकीय प्रयोगशाला में रक्त परीक्षण के पश्चात ही पता चल सकता है ।

शिशु में इसकी पहचान तीन माह की अवस्था के बाद ही होती है । बीमार बच्चे के शरीर में में रक्ताल्पता के कारण उसे बार–बार खून चढ़ाने की आवश्यकता पडती है । रक्ताल्पता के कारण उसके शरीर में लौह तत्व अधिक मात्रा में उत्पन्न होने लगता है जो हृदय, यकृत तथा फेफड़ों में प्रविष्ट होकर उन्हें क्षतिग्रस्त और दूष्प्रभावित कर देता है । जो अंततः प्राणधातक साबित होता है |

बधाई का पात्र है माँ वैष्णो देवी सेवा समिति

mukesh hissariya

थैलीसीमिया से ग्रसित लोगों के लिए सौगात की तरह है यह कैम्प क्योँकि इस बीमारी का इलाज तो छोड़िये इसकी जाँच इतनी महंगी है कि ( लगभग 20000 ) बधाई का पात्र है हर कोई करा नहीं पाता, ऐसे में आज तक जो बिहार में नहीं हुआ वो होने जा रहा है, और इसके लिए बधाई के पात्र है माँ वैष्णो देवी सेवा समिति एवं इसके मुख्य कर्ता धर्ता मुकेश हिसारिया क्योंकि यह कैम्प बिहार में आयोजित होने वाला पहला कैम्प है जहां मरीजों की जाँच के अलावा 1200 लोगों के रहने खाने एवं बच्चों के खेलने की पूरी व्यवस्था की जाएगी |

थैलेसीमिया के प्रकार एवं लक्षण

थैलेसीमिया दो तरह के होते हैं

1 थैलेसीमिया माइनरः इसमें अधिकतर मामलों में कोई लक्षण नजर नहीं आता हैं । कुछ रोगियों में रक्त की कमी या एनीमिया हो सकता हैं ।

2 थैलेसीमिया मेजरः जन्म के ३ महीने बाद कभी भी इस बीमारी के लक्षण नजर आ सकते हैं ।

  1. बच्चों के नाख़ून और जीभ का पीला पड़ जाना
  2. बच्चे के जबड़ों और गालों में असामान्यता आ जाना
  3. बच्चे का विकास रुक जाता है और बच्चे का उम्र से काफी छोटा नजर आना
  4. सूखता चेहरा एवं वजन न बढ़ना

E . हमेशा बीमार नजर आना एवं कमजोरी

  1. सांस लेने में तकलीफ

अगर आपके बच्चे में भी इस तरह के लक्षण दिखाई देते हैं तो अविलम्ब इसकी जाँच कराएं | हर हफ्ते खून चढ़वाना ही है इस बीमारी का इलाज