प्राचीन ( Bihar ) बिहार के इतिहास में अगर आप झांकेंगे तो आप को बिहारी कला और संस्कृति के अमूल्य धरोहरों के दर्शन होंगे | इन्ही कलाओं में एक नाम मंजूषा कला का भी आता है जो अंग देश का अभिन्न अंग है |  इसे विश्व की प्रथम कथा आधारित चित्रकला  भी माना जाता है |  मंजूषा कला ( Manju Art ) को स्नेक पेंटिंग, अंगिका कला, भागलपुर कला, अंग कला के नाम से भी जाना जाता है  |

Manju Art

मंजूषा कला ( Manju Art ) की विशेषता

मंजूषा कला Manju Art विश्व की एक मात्र पूर्णतः कथा आधारित कला है | यह बिहुला बिसहरी की धार्मिक गाथा पर आधारित है | मंजूषा कला Manju Art में मात्र तीन रंगों का ही प्रयोग होता है जैसे -गुलाबी, हरा और पीला | मंजूषा कला रेखाचित्र पर आधारित चित्रकला है जिसमे बॉर्डर विशेष रूप से दर्शाया जाता है | मंजूषा कला के बॉर्डर पर आपको बेलपत्र, लहरिया, त्रिभुज, मोखा, सर्प की लड़ी की रेखा चित्र बनी रहती है | मंजूषा कला में पात्रों को अंग्रेजी के x अक्षर की तरह दर्शाया जाता है I मंजूषा कला के मुख्य चिन्ह – सांप, चंपा फूल, सूर्य, कमल, हाथी , घोडा, मोर, मैना, कछुवा, मछली, पेड़, कलश, तीर धनुष, शिवलिंग है और मुख्य पात्र – भगवान शिव, मनसा, चंदू सौदागर, बिहुला, बाला, हनुमान जी इत्यादि है  |

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Manju Art

Manju Art बांस, जुट और पेपर का बना होता है

बिहार के भागलपुर की कथा पर आधारित Manju Art मंजूषा कला की अपनी एक अलग पहचान है मंजुषा कला एक भारतीय कला पद्धति है। यह आठ सतंभ से बना मंदिर नुमा आकृति होती है। यह बांस, जुट और पेपर का बना होता है। इसमे हिन्दू देवी देवताओ को भी चित्रित किआ जाता है। यह आकृति विषहरी पूजा में प्रयोग होता है। यह पूजा सांपों के देवता को समर्पित होाता है जो की भागलपुर और उसके आस पास के शहरों में मनया जाता है।

Manju Art

मंजूषा कला Manju Art से जुडी लोक गाथा

लोक कथाओं के अनुसार भगवान शिव एक बार चंपानगर के तालाब में स्नान करने आतें है और स्नान करने के क्रम में उनके पाँच बाल टूटकर कमल पर गिरते जो पाँच कन्याओं का रूप ले लेती और ये कन्याएँ शिव जी की मानस पुत्री कहलायी I इन्होंने शिव जी से विनती की इन्हें संसार पूजे तो भगवान शिव ने कहा अगर चंपानगर का सौदागर चंदू जो मेरा भक्त है अगर वो तुम्हें पूजे तो संसार भी पूजने लगेगा I मनसा चंदू सौदागर पर दवाब बनाती की वो उसे पूजे |  लेकिन ऐसा होता नहीं, मनसा देवी को सर्प और मायावी शक्तियाँ थी I मनसा देवी कुपित हो चंदू सौदागर को दंड देती उसके सारे पुत्रों को डश लेती और सभी पुत्रों की मृत्यु हो जाती I फिर चंदू सौदागर को शिव जी वरदान से एक पुत्र मिलता जिसका नाम बाला था, उसका विवाह बिहुला से होता I शादी के पहले रात ही, मनसा बाला को नाग से डसवा देती और उसकी भी मृत्यु हो जाती I बिहुला को अपने पतिव्रता धर्म पर पूरा भरोषा होता और वो एक नाव में मंजूषा (एक साज सज्जा से भरी आकृति ) में अपने पति को ले नदी मार्ग से चल देती है |  काफी बाधाओं से लड़ वो भगवान से अपने पति का जीवन वापस ले लेती है और अंत में अपने ससुर चंदू सौदागर को भी मना लेती की वो मनसा की पूजा करें I

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