किसी ने ठीक हीं कहा है कि ! आप भगवान के भरोसे मत रहो, हो सकता है भगवान आपके भरोसे बैठा हो | दोस्तों बिहार के माउंटेन मैन दशरथ मांझी से तो आप भली-भांति अवगत होंगे, जिन्होंने दुनिया के तानों की परवाह किये बीना अकेले हीं पहाड़ का सीना चीड़ डाला था | भले इस में उन्हें बाइस वर्ष का वक्त लगा, पर उनके द्वारा किये गए कार्यों को दुनिया आजीवन याद रखेगी | कुछ इसी तरह के कार्य को अंजाम दिया है बिहार के रोहतास जिला के तिलौथू के युवाओं ने | इन युवाओं ने माउंटेन मैन दशरथ मांझी से प्रेरणा लेकर न सिर्फ पहाड़ को काटा बल्कि 2 किलोमीटर से अधिक लंबी सड़क भी बना डाली वो भी बिना किसी सरकारी मदद के | 

बना डाली दो किलोमीटर लम्बी सड़क

रोहतास जिला के तिलौथू के पास कैमूर पहाड़ी पर प्राचीन ‘तुतुला भवानी’ मंदिर है, जहां पहुंचने का रास्ता काफी दुर्गम था। तीन पहाड़ी नदियों को पार करने के बाद जंगली रास्तों से लोग वहां पहुंच पाते थे, इस यात्रा के दौरान हादसे भी होते थे | लेकिन यहां की युवाओं ने जब गया के पहाड़ पुरुष दशरथ मांझी की कहानियां सुनी, तो इन लोगों में भी हौसला आया। ‘तुतला भवानी’ मंदिर दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं के साथ लगातार हो रहे हादसों से सबक लेकर युवाओं ने प्रण लिया कि वे लोग भी दशरथ मांझी की तरह पहाड़ को काट देंगे। प्रेरणा लेकर गांव के युवाओं ने हाथ से हाथ बढ़ाया और पहाड़ के किनारे को काट-काट कर दो किलोमीटर लंबी पथरीली सड़क हाथों से बना डाली |

बिना मशीन के काटा पहाड़

वन विभाग के लोगों को जब पता चला तो इस पर थोड़ी देर के लिए रोक लगवा दी, पर फिर एक शर्त पर काम शुरू करवा दिया गया, शर्त यह थी कि कोई भी मशीन का उपयोग नहीं करना होगा |  युवाओं ने ऐसा ही किया। अपने हाथों से ही पत्थर तोड़-तोड़ कर रास्ता बना दिया।आज तुतला भवानी मंदिर जाने के लिए लोगों को लगभग 5 किलोमीटर कम सफर तय करना होता है। तुतला भवानी के सुंदर झरना तथा मंदिर का दर्शन अब आसान हो चली हैं। यहां के युवा कहते हैं कि उन लोगों ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से आशा छोड़ दी और अपने हौसलों की बदौलत पहाड़ काटकर सड़क बना लिए। इसलिए जब जिलाधिकारी इस मंदिर में दर्शन करने को आए तो मूलभूत सुविधाएं बढ़ाने की बात भी कहि थी। कहते हैं कि कल इंसान में हौसला हो तो कुछ भी कर सकता है। मानव जब जोर लगाता है, पत्थर भी पानी बन जाता हैं। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है।

niraj kumar
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