जिंदगी है दो पल के वो तो बीत जाएगी, पर कुछ ऐसा कर गुजरो की मौत के बाद भी लोग तुम्हे याद रखें | कुछ ऐसा कर गुजरें है बिहार मुजफ्फरपुर के रोहित, जिन्होंने मौत के बाद भी लोगों की जिंदगी में मुस्कान बिखेर कर समाज को बड़ी सीख दी है | और सही मायने में रोहित के माता पिता धन्यवाद के पात्र हैं जिन्होंने अपने कलेजे के टुकड़े का अंग दान organ Donation करने का साहसिक कदम उठाया | इनके लिए तो एक सैल्यूट बनता हीं है 

organ Donation 

सड़क हादसे में घायल हो गए थे रोहित

बिहार मुजफ्फरपुर के औराई प्रखंड के बिहजीवार गांव का रहने रोहित, 13 मार्च को सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे |  15 मार्च को उन्हें आईजीआईएमएस में भर्ती कराया गया था। उन्हें मंगलवार दिन तक होश नहीं आया था। जिसके बाद डॉक्टरों ने मंगलवार की देर रात जांच कर उनके ब्रेन डेड होने की घोषणा की। इसके बाद दिन के 10 बजे दोबारा जांच की गई। उसके परिजनों को इसकी जानकारी दी गई। परिजनों ने उसके अंग को दान organ Donation  करने की सहमति दे दी।

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organ Donation में इस तरह आईजीआईएमएस ने नया कीर्तिमान बना दिया है

लिवर का आईजीआईएमएस में पहली बार प्रत्यारोपण हुआ है। चार भाग्यशाली लोगों में एक को रोहित का लिवर, एक को किडनी और दो को आंख का कॉर्निया मिला है। जबकि कोलकाता के मरीज में रोहित का दिल (हर्ट) लगाया गया है। आईजीआईएमएस के संबंधित विभागों के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने पांच से सात घंटे के ऑपरेशन के बाद प्रत्यारोपण में सफलता प्राप्त की है।

अस्पताल अधीक्षक डॉ. मनीष मंडल ने बताया कि पांचों मरीजों के हालत क्या हैं, इसकी जानकारी 48 घंटे के बाद ही मिल पाएगी। उन्होंने बताया कि ब्रेन डेड मरीज का कौन अंग कितना काम कर रहा है यह मरीज के होश में आने के बाद ही पता चलेगा। जिस मरीज का लिवर प्रत्योरोपण हुआ था वह पिछले चार वर्षों से प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहा था।

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ग्रीन कॉरीडोर बनाकर कोलकाता गया हर्ट

रोहित का हर्ट उसके शरीर से निकलने के ढाई से तीन घंटे के भीतर किसी दूसरे मरीज में प्रत्यारोपित करना था। इसके लिए हर्ट निकलने के बाद आईजीआईएमएस से एयरपोर्ट के बीच ग्रीन कॉरीडोर बनाकर उसके दिल को कोलकाता भेजा गया। दोपहर 1 बजकर 15 मिनट से 1 बजकर 45 मिनट के बीच आईजीआईएमएस से बेली रोड होते हुए एयरपोर्ट तक का एक लेन को ग्रीन कॉरीडोर बनाया गया था।

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कोलकाता से आई डॉक्टरों की टीम आईजीआईएमएस IGIMS से एयरपोर्ट की दूरी मात्र नौ मिनट में तय की। उनकी सुरक्षा जांच भी तत्काल की गई और इंडिगो की फ्लाइट से दिल को कोलकाता ले जाया गया।  तब तत्काल रोटो के कोलकाता स्थित कार्यालय में सूचना दी गई। वहां से एक हर्ट मरीज की सूची मिली जो कोलकाता के मेडिका अस्पताल में भर्ती था।

सोटो और रोटो की ली गई सहमति

मरीजों के organ Donation अंग प्रत्यारोपण के लिए स्टेट ऑर्गन टिश्यू ट्रांसप्लांटेशन ऑर्गेनाइजेशन (सोटो) और क्षेत्रीय अंग प्रत्यारोपण संगठन (रोटो) से मंजूरी ली गई है। अधीक्षक ने बताया कि रोटो के निर्देश पर रोहित का हर्ट कोलकाता के मरीज को लगाया जा रहा है। जिन लोगों ने अंग प्रत्यारोपण के लिए पहले से रजिस्ट्रेशन कराया था, उनको बुधवार दिन के 10 बजे सूचना दी गई। इसके बाद दिन के दो बजे से उनका ऑपरेशन शुरू किया गया।

niraj kumar