आज पूरा विश्व Covid-19 से जूझ रहा, ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी उन्हें आई जिनकी जीविका हीं हर रोज के काम पर टिकी होती थी | भले हम इस अदृश्य दानव पर आने वाले कुछ समय में फतह पा लेंगे, पर उसके बाद होगी जिन्दा रहने की जद्दोजहद | और अगर बात बिहार की करें तो यहाँ का परिणाम और भी भयावह होने वाला है |

पुरे भारत में हैं बिहारी मजदूर

भले आज बिहार सबसे ज्यादा आई ए इस आईआईटियन और डॉक्टर पैदा करता हो, पर ये भी सत्य है की यहाँ उद्योग धंधे नहीं है,और मजबूरन बिहार के मजदूर वर्ग के लोगों को काम की तलाश में प्रदेश से बाहर जाना पड़ता है | आप भारत के किसी कोने के फैक्ट्री में चले जाइये आपको वहां कोई-न-कोई  बिहारी मजदूर मिल हीं जायेगा , जो दर्शाता है की हमारा बिहार कितना पिछड़ा हुआ है |

पैदा होगी बेरोजगारों की फ़ौज

आज देश में जारी लॉक डाउन के कारण पुरे देश से बिहारी मजदूरों का पलायन हो रहा है | और इस पलायन के दौरान उन्हें किन-किन परिस्थितियों से दो-दो हांथ करना पड़ा है ये सोंच कर भी उनके रोंगटे खड़े हो जाते होंगे | अब शायद हीं वे लोग बाहर जाने की सोंचेंगे | अब वे लोग बिहार में हीं जो संसाधन है उसमें रोजगार की तलाश करेंगे अब वे लोग बिहार में हीं जो संसाधन है उसमें रोजगार की तलाश करेंगे | और आज बिहार की परिस्थिति को देखते हुए संभव नहीं है |

स्वरोजगार हीं है एक सहारा

बिहार में इतनी फैक्ट्रियां हैं नहीं की हर किसी को रोजगार दे सके ऐसे में स्वरोजगार हीं है एक उपाय जिसके माध्यम से कुछ हद तक रोजगार पैदा किया जा सकता है | अब सरकार को भी स्वरोजगार को बढ़ावा देने ले लिए कुछ ठोस कदम उठाने होंगे, वरना परिणाम भयावह हो सकता है क्योकि बेरोजगारी की वजह से युवाओं का रुझान ज्यादातर अपराध की तरफ हीं जाता है और आने वाले समय में अगर बिहार में अगर अपराध का ग्राफ तेजी से बढे तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होगा |