देश में जारी लॉकडाउन के कारण लम्बे समय से अपने-अपने घरों में कैद रहकर थक चुके लोगों को जैसे ही बाजार खुलने की सूचना मिली बुधवार को बाजार में भीड़ लगने लगी। अब ये बात तो तय है की कोरोना के खिलाफ हमारी लड़ाई काफी लम्बी चलने वाली है और हम सभी को जितना हो सके खुद को बचाते हुए कोरोना के साथ जीने की आदत डालनी होगी, क्योंकि कोरोना संक्रमण से बचने का अब तक कोई इलाज तलाशा नहीं जा सका है |

खुद को रखे सुरक्षित

अब लॉकडाउन में प्रशासन द्वारा तो यथा संभव मिल गई है, पर लोगों को भी जिम्मेदारी के दायरे को बढ़ाना होगा | अब प्रदेश में कोरोना का खतरा कई गुणा बढ़ गया है और मार्केट में भीड़ भी काफी उमड़ रही है | ऐसे में जितना हो सके सोशल डिस्टेंस का पालन करें, जब जरुरी हो तभी बाहर निकलें एवं मास्क एवं सेनिटाइजर का सदा प्रयोग करें | बदले माहौल में नई शुरुआत के लिए आम आदमी के साथ ही संस्थाएं भी तैयारी में जुट गयी हैं।

फ़िलहाल कोई इलाज नहीं है

आम आदमी में इस बात को लेकर उत्कंठा है कि क्या जीवन ऐसे ही चलता रहेगा या फिर हमें कोरोना के साथ जीने की आदत डालनी होगी। कोरोना वायरस का फ़िलहाल कोई इलाज नहीं है बस इसे हमे अपनी सूझ-बुझ और जिम्मेवारी से रोकना है | ऐसा कभी नहीं होगा कि कोरोना को एक भी केस भविष्य में फिर ना मिले | कोविड 19 के कारण पिछले कई दिनों से राजधानी के म्यूजियम बंद हैं। म्यूजियम प्रशासन अब कोरोना से बचाव के मानदंडों का पालन करते हुए आम लोगों के स्वागत की तैयारी कर रहा है।

वैज्ञानिक कोरोना वायरस का टीका तैयार नहीं है तैयार

दरअसल दुनियाभर के वैज्ञानिक पांच महीनों के प्रयास के बाद भी कोरोना वायरस का एक टीका तैयार नहीं कर पाए हैं |  WHO और दुनिया के सभी बड़े वैज्ञानिक अब मानने लगे हैं कि शायद आने वाले कुछ समय तक हमें टीके की उम्मीद करने के बजाए इस वायरस के साथ जीने की आदत डालनी होगी | हाल ही में WHO ने अपने बयान में कहा था कि अब दुनिया को इस वायरस के साथ जीना पड़ सकता है |  कई वैज्ञानिकों का कहना है कि एड्स और डेंगू जैसे महामारी का भी अब तक इलाज नहीं मिल पाया है, कोरोना भी ऐसा ही एक वायरस हो सकता है

niraj kumar