देश में जारी लॉक डाउन के कारण देश का हर तबका परेशान रहा है, पर सबसे ज्यादा उनलोगों को परेशानी आई जो गंभीर रोग से ग्रसित थे, क्योकि इस दौरान डॉक्टर भी बहुत कम उपलब्ध थे | साथ हीं आवागमन भी पूरी तरह से ठप्प था, और तो और हर चौक-चौराहे पर पुलिस भी मुस्तैद रहती थी जो बाहर निकलने वाले की अच्छी खबर लेते थे | ऐसे में बक्सर शहर के गिट्टू तिवारी जिन्होंने गंभीर रूप से बीमार 100 से भी अधिक लोगों को रक्त मुहैया कराया, जो की काबिलेतारीफ हैं |

आम दिनों में भी काफी सक्रिय रहते थे गिट्टू तिवारी

गिट्टू तिवारी कहते हैं कि जो खुशी किसी अनजान की जिंदगी बचाने के बाद हमे मिलती है उसके आगे दुनिया की सारी ख़ुशी फीकी पड़ जाती है | ऐसा नहीं है की गिट्टू तिवारी लॉक डाउन के दौरान हीं सक्रीय थे, आम दिनों में भी ये समाज सेवा के लिए काफी सक्रीय रहते हीं थे, लेकिन लॉक डाउन के दौरान परिस्थितिया बिलकुल विपरीत थी फिर भी गिट्टू तिवारी और उनकी टीम जरुरतमंद बीमार लोगों को रक्त मुहैया कराना, एम्बुलेंस की व्यवस्था कराना, इसके अलावा अगर जिन बीमार व्यक्ति के पास दवा के भी पैसे नहीं थे उन्हें निःशुल्क दवा भी उपलब्ध कराते थे गिट्टू तिवारी |

पुलिस से भी होता था सामना

लॉक डाउन के दौरान परिस्थितियां आम दिनों से बिल्कुल अलग थी, बावजूद इसके गिट्टू तिवारी घर में न रह कर सेवा भाव को चुना | इस दौरान कई बार तो इनके ब्लड डोनर की पुलिस द्वारा पिटाई भी हो चुकी है फिर भी जिंदगी बचाने का जज्बा कम नहीं हुआ |

अंत्योदय सेवा संस्थान के माध्यम से करते हैं सेवा

गिट्टू तिवारी समाज के कल्याणार्थ जो भी कार्य करते हैं वो अंत्योदय सेवा संस्थान के माध्यम से करते हैं | इन कार्यों में स्थानीय लोगों का तो सहयोग मिलता हीं है साथ हीं प्रशासन की मदद से लॉक डाउन के दौरान प्रतिदिन जितना हो सके गरीबों के बीच भोजन के पैकेट भी बंटवाते थे |

रक्तदान एक ऐसा दान होता है जिसे देकर किसी की जिंदगी बचाई जाती है, यह सभी दानों में महत्वपूर्ण माना गया है। यूं तो कई लोग रक्तदान करने से कतराते है, लेकिन जब उन्हें या उनके अपनों की जरूरत पड़ती है तब इसकी जरूरत महसूस होती है- गिट्टू तिवारी