सोंचिये कैसा भयानक दृश्य होगा जब अचानक सड़कों पर हर जीवित प्राणी बेहोश हो कर गिरने लगे इंसान को कुछ समझ में आये उससे पहले वो बेहोश हो जाये ! कुछ ऐसा हीं घटित हुआ है 7 अप्रैल 2020 को आंध्रप्रदेश के  विशाखापट्टनम में जहां एक फैक्ट्री से जहरीली गैस रिसाव के कारण  ताजा सूत्रों के अनुसार 11 लोगों की मृत्यु हो गई एवं 1000 से अधिक लोग बेहोश हैं | सच कहा जाये तो यादों से धूमिल हो चुकी 1984 कि भोपाल गैस त्रासदी की तस्वीर फिर से साफ़ हो गई |

तकनीकी खराबी है जिम्मेवार

प्लास्टिक के फैक्टरी के दो टैंकों में रखे स्टाइरीन गैस से जुड़ी प्रशीतन प्रणाली में तकनीकी खराबी आने के कारण उसमें गैस बना और वह लीक हो गई | फैक्‍टरीज विभाग की ओर से प्राप्त प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के हवाले से उन्होंने कहा, ‘‘स्टाइरीन एकलक सामान्य तौर पर तरल रूप में रहता है और उसके भंडारण का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस के नीचे रहने पर वह सुरक्षित रहता है | लेकिन प्रशीतन (रेफ्रीजेरेशन) इकाई में गड़बड़ी के कारण यह रसायन गैस में बदल गया’’ उन्होने यहां संवाददाताओं को बताया कि तकनीकी खामी के कारण टैंक में रखे गए रसायन का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया और वह गैस में बदलकर लीक हो गया |

इस फ़ैक्ट्री में बनता था एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक के बर्तन

विशाखापट्टनम में जानलेवा स्टिरीन गैस का रिसाव जिस एलजी पॉलिमर इंडिया के कारखाने से हुआ वह दक्षिण कोरिया की रसायन कंपनी एलजी केम की अनुषंगी कंपनी है |  एलजी केम ने एक स्थानीय कंपनी का अधिग्रहण कर 1997 में भारत में इस क्षेत्र में कारोबार शुरू किया था | कंपनी के इस वाइजैग संयंत्र में पॉलीस्टिरीन (पीएस) का विनिर्माण किया जाता है, जिसका खानपान सेवा उद्योग में काफी इस्तेमाल होता है. इस रसायन का इस्तेमाल प्लास्टिक के एकबारगी इस्तेमाल वाले ट्रे और कंटेनर, बर्तन, फोम्ड कप, प्लेट और कटोरे आदि बनाने में होता है |  इन्हें एक बार इस्तेमाल करने के बाद फेंक दिया जाता है |

टैंकों में 1,800 टन स्टिरीन गैस थी

जानकार सूत्रों के अनुसार एलजी पॉलिमर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की विशाखापट्टनम फैक्‍टरी को लॉकडाउन के बाद फिर से खोलने के लिये तैयार किया जा रहा था, तभी यह दुर्घटना हुई | कंपनी के कर्मचारी परिचालन को फिर से शुरू करने की तैयारी कर रहे थे, तभी शुरुआती घंटों में गैस का रिसाव होने लगा |

कहा जा रहा है कि जब रिसाव हुआ तब भंडारण टेंक में 1,800 टन स्टिरीन गैस थी. ठहराव और तापमान में बदलाव के कारण, स्टिरीन का स्वत: पॉलीमराइजेशन हो सकता है, जिसके कारण वाष्पीकरण हो सकता है |